“भगवान श्री कृष्ण ने बताया कलयुग का अंत | कलयुग के संकेत और भविष्य की भविष्यवाणी | Mahabharat”

कलयुग के बारे में भगवान श्री कृष्ण ने जो बातें बताई थीं, वह हर किसी के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण हैं। महाभारत के युद्ध के पश्चात जब धर्मराज युधिष्ठिर हस्तिनापुर के सिंहासन पर आसीन हुए, तो उन्हें सृष्टि के भविष्य को लेकर कई प्रकार की चिंताएं सताने लगीं। द्वापर युग समाप्त हो चुका था और कलयुग के आने के संकेत मिलने लगे थे। ऐसे में युधिष्ठिर बहुत चिंतित हो गए थे और सोचने लगे कि आने वाले समय में मानव समाज का क्या होगा, धर्म का क्या होगा, और सत्य का हश्र क्या होगा?

युधिष्ठिर की इस चिंता को दूर करने के लिए उन्होंने अपने भाई भीम, अर्जुन, नकुल, और सहदेव के साथ भगवान श्री कृष्ण के पास जाने का निर्णय लिया। युधिष्ठिर ने अपने भाइयों को बुलाया और अर्जुन ने उनके चिंतित स्वर को सुनते हुए पूछा, “भैया, आप इतने चिंतित क्यों दिख रहे हैं? क्या कोई शत्रु हमारे राज्य पर आक्रमण करने वाला है?” युधिष्ठिर ने गहरी सांस ली और कहा, “नहीं, अर्जुन, मेरे मन में चिंता किसी बाहरी शत्रु के बारे में नहीं है। मेरे मन में केवल कलयुग के बारे में विचार है, कि आने वाले समय में मानवता किस दिशा में जाएगी और धर्म और सत्य का क्या होगा?”

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भीम, जो हमेशा अपने बड़े भाई की चिंता में शामिल रहते थे, बोले, “भैया, आपकी चिंता देखकर हम भी असमंजस में पड गए हैं। क्या आप हमें इस संकट के बारे में बता सकते हैं?” युधिष्ठिर ने कहा, “इस समय सबसे बडा संकट कलयुग का आना है। मुझे डर है कि आने वाले समय में धर्म का क्या होगा और सत्य का क्या हश्र होगा?” इसके बाद उन्होंने निर्णय लिया कि वे भगवान श्री कृष्ण के पास जाएंगे, क्योंकि केवल श्री कृष्ण ही उनके मन की इस चिंता का समाधान कर सकते थे।

पांडवों ने द्वारका की ओर प्रस्थान किया, और वहाँ पहुँचने पर भगवान श्री कृष्ण ने उनका स्वागत किया। युधिष्ठिर ने श्री कृष्ण के चरणों में प्रणाम किया और कहा, “हे श्री कृष्ण, आप तो सब कुछ जानते हैं, मैं जानना चाहता हूँ कि कलयुग में मानव का स्वभाव और आचरण कैसा होगा?” श्री कृष्ण मुस्कुराए और बोले, “धर्मराज, आपकी चिंता सही है, लेकिन मैं आपको इसका सीधा उत्तर नहीं दे सकता। इसके लिए आपको और आपके भाइयों को कुछ विशेष अनुभव प्राप्त करने होंगे।”

युधिष्ठिर ने कहा, “हे श्री कृष्ण, आप जो भी परीक्षा चाहते हैं, हम वह पूरी करने के लिए तैयार हैं। कृपया हमें बताएं कि हमें क्या करना होगा?” श्री कृष्ण ने कहा, “आप सभी को अलग-अलग दिशाओं में घने और भयानक वनों में जाना होगा और वहां कुछ विचित्र घटनाओं का सामना करना होगा। जब आप उन घटनाओं को देखेंगे, तो मुझे बताएं, तभी मैं आपको कलयुग के बारे में विस्तार से बताऊँगा।”

पांडवों ने भगवान श्री कृष्ण की आज्ञा स्वीकार की और वन की ओर चल पड़े। प्रत्येक पांडव को एक अद्भुत और रहस्यमय दृश्य का सामना हुआ, जो कलयुग के प्रभावों को प्रदर्शित करता था।

युधिष्ठिर ने देखा कि एक विशालकाय हाथी के दो सूंड थे और वह उन दोनों सूंडों से वन की जड़ें उखाड रहा था। यह दृश्य देखकर युधिष्ठिर चकित हो गए। अर्जुन ने देखा कि एक पक्षी के पंखों पर वेदों की रचनाएं लिखी हुई थीं, लेकिन वह पक्षी मुर्दे का मांस खा रहा था। भीम ने देखा कि एक गाय अपने बछड़े को इतनी जोर से चाट रही थी कि वह लहूलुहान हो गया। सहदेव ने देखा कि एक जलाशय के सात कुएं थे, जिनमें से छह में पानी था, लेकिन एक कुआं पूरी तरह से सूखा था। नकुल ने देखा कि एक विशालकाय शिला पहाड से लुडकते हुए नीचे आ रही थी, लेकिन जैसे ही वह एक छोटे से पौधे के पास पहुंची, वह स्थिर हो गई।

जब पांडव वापस लौटे और श्री कृष्ण से मिले, तो उन्होंने अपने-अपने अनुभव साझा किए। युधिष्ठिर ने सबसे पहले कहा, “हे प्रभु, मैंने देखा कि एक हाथी था जिसके दो सूंड थे, वह जड़ें उखाड रहा था। क्या इसका कोई अर्थ है?” श्री कृष्ण मुस्कुराए और बोले, “धर्मराज, यह दृश्य बताता है कि कलयुग में ऐसे शासक होंगे जो दोनों ओर से शोषण करेंगे। वे दिखावे में कुछ और होंगे, लेकिन अंदर से वे अपने स्वार्थ के लिए लोगों का शोषण करेंगे।”

अर्जुन ने कहा, “प्रभु, मैंने देखा कि एक पक्षी के पंखों पर वेदों की रचनाएं लिखी हुई थीं, लेकिन वह पक्षी मुर्दे का मांस खा रहा था। यह दृश्य क्या संकेत देता है?” श्री कृष्ण ने कहा, “अर्जुन, कलयुग में ऐसे लोग होंगे जो विद्वान और पंडित कहलाएंगे, लेकिन उनका हृदय पवित्र नहीं होगा। वे धर्म और वेदों का उपयोग केवल अपने स्वार्थ के लिए करेंगे।”

भीम ने कहा, “प्रभु, मैंने देखा कि एक गाय अपने बछड़े को इतना जोर से चाट रही थी कि वह लहूलुहान हो गया। इसका क्या अर्थ है?” श्री कृष्ण ने कहा, “भीम, यह दृश्य बताता है कि कलयुग में माता-पिता अपने बच्चों के प्रति इतनी ममता और मोह दिखाएंगे कि बच्चों का विकास बाधित हो जाएगा। अत्यधिक स्नेह के कारण बच्चे आत्मनिर्भर नहीं बन पाएंगे।”

सहदेव ने कहा, “प्रभु, मैंने देखा कि एक जलाशय में छह कुएं में पानी था, लेकिन एक कुआं सूखा था। इसका क्या अर्थ है?” श्री कृष्ण ने कहा, “सहदेव, यह दृश्य बताता है कि कलयुग में लोग दिखावे में संपन्न होंगे, लेकिन वे दूसरों की पीडा की ओर ध्यान नहीं देंगे। उनका ध्यान केवल अपने स्वार्थ पर होगा।”

नकुल ने कहा, “प्रभु, मैंने देखा कि एक शिला पहाड से लुडकते हुए नीचे आ रही थी, लेकिन जैसे ही वह एक छोटे से पौधे के पास पहुंची, वह रुक गई। इसका क्या अर्थ है?” श्री कृष्ण ने कहा, “नकुल, यह दृश्य बताता है कि कलयुग में धन और संपत्ति से जीवन का पतन नहीं होगा। अगर मनुष्य अपने हृदय में भगवान का नाम और भक्ति धारण करेगा, तो वह पतन से बच सकता है।”

भगवान श्री कृष्ण ने पांडवों को बताया कि कलयुग का अंत बहुत ही भयानक और विनाशकारी होगा। गरुड पुराण में भी कलयुग के अंत के समय के संकेत दिए गए हैं।

श्री कृष्ण ने कहा, “जब कलयुग का अंत होगा, तब मानव जीवन की आयु घटकर केवल 20 वर्ष रह जाएगी। स्त्रियां 8-9 वर्ष की आयु में संतान को जन्म देने लगेंगी। पतिव्रता स्त्रियां कहीं दिखाई नहीं देंगी और लोग नैतिकता से दूर हो जाएंगे।”

उन्होंने आगे कहा, “कलयुग के अंत में वृक्ष फलहीन हो जाएंगे, और सभी वृक्ष केवल शमी के होंगे। लोग शाकाहार को छोडकर मांसाहारी भोजन करने लगेंगे। जल की कमी होगी और लोग प्यास के कारण तडपने लगेंगे।”

श्री कृष्ण ने यह भी कहा, “जब कलयुग का अंत निकट होगा, तब आकाश में सात सूर्य दिखाई देंगे। इन सूर्यों के प्रभाव से संपूर्ण पृथ्वी जल जाएगी और यह सृष्टि का अंत होगा। फिर भगवान विष्णु अपने श्वास से मेघ उत्पन्न करेंगे और अगले 100 वर्षों तक जल की वर्षा करेंगे।”

इस प्रकार, कलयुग का अंत एक बहुत बड़े विनाश के रूप में होगा, लेकिन उसके बाद एक नई शुरुआत होगी। भगवान श्री कृष्ण के इन शब्दों ने पांडवों को यह समझने में मदद की कि भले ही कलयुग में धर्म और सत्य का पालन करना कठिन हो, लेकिन अगर वे भगवान की भक्ति में संलग्न रहते हैं, तो वे इस युग के विनाश से बच सकते हैं।

भगवान श्री कृष्ण ने बताया है कलयुग का अंत कैसे होगा?

आज के इस वीडियो के माध्यम से हम बताएंगे कि कलयुग के क्या लक्षण है कलयुग में स्त्री और पुरुष कैसे होंगे, उनकी आयु कितनी होगी, कलयुग का अंत किस प्रकार से होगा और अभी कितना समय बाकी है?

तो चलिए।बिना देरी किए जान लेते हैं दोस्तों महाभारत के युद्ध की समाप्ति के पश्चात जब धर्मराज युधिष्ठिर हस्तिनापुर के सिंहासन पर आसीन हुए तो उनके मन में सृष्टि के भविष्य को लेकर अनेक चिंताएं उठने लगीं। द्वापर युग अब समाप्त होने की कगार पर था।और कलयुग के आगमन के संकेत मिलने लगे थे। युधिष्ठिर यह सोचकर व्याकुल हो उठे कि कलयुग में मानव जीवन का क्या होगा और धर्म की क्या स्थिति रहेंगी?

अपने मन की इस चिंता का समाधान पाने के लिए उन्होंने अपने चारों भाइयों भीम, अर्जुन, नकुल और सहदेवके साथ भगवान श्री कृष्ण के पास जाने का निश्चय किया। युधिष्ठिर ने अपने भाइयों को बुलाया। अर्जुन ने चिंतित स्वर में पूछा हे बड़े भ्राता आप इतने चिंतित क्यों दिखाई दे रहे हैं?

क्या किसी शत्रु ने हमारे राज्य पर आक्रमण करने का दुस्साहस किया है?

यदि ऐसा है तो आप बस आज्ञा दीजिए।मैं अभी जाकर उन सभी का नाश कर दूंगा। युधिष्ठिर ने एक गहरी सांस लेते हुए कहा है प्रिय अर्जुन, मैं तुम्हारे पराक्रम से भलीभाँति परिचित हूँ। इस पृथ्वी पर कोई भी राजा इतना साहस नहीं कर सकता कि हस्तिनापुर पर आक्रमण करने का विचार भी करे।लेकिन मेरा चिंतन किसी बाहरी शत्रु के बारे में नहीं है। भीम जो हमेशा से ही अपने बड़े भाई की हर चिंता को साझा करते थे, बोले तो फिर क्या बात है?

बड़े भैया आपकी चिंता देखकर हमारे मन में भी अनिश्चितता और भय उत्पन्न हो रहा है। कृपया हमें शीघ्र ही बताइए।कि कौन सा संकट हमारे सामने है। युधिष्ठिर ने गंभीर स्वर में उत्तर दिया, हे भीम तुम सत्य कह रहे हो?

एक भयंकर संकट सचमुच आने वाला है। मैं कलयुग के आगमन के विषय में सोचकर चिंतित हूँ।मुझे यह भय सता रहा है कि आने वाले समय में मानव समाज किस दिशा में जाएगा, धर्म का क्या होगा और सत्य का क्या हश्र होगा?

इसीलिए मैंने निश्चय किया है कि अब हमें द्वारकाधीश श्री कृष्ण जीके पास जाना चाहिए। केवल वही हमें इस चिंता से मुक्त कर सकते हैं।सभी पांडवों ने युधिष्ठिर की बातों से सहमति प्रकट की। अर्जुन ने कहा, आप सत्य कह रहे हैं भैया श्री कृष्ण ही इस समय सबसे अधिक ज्ञानी और भविष्य के जाता है। हमें शीघ्र ही उनके पास चलना चाहिए। भीम ने भी उत्सुकता से कहा हे धर्मराज।मैं आपके साथ हूँ, हम सब द्वारिका चलकर श्री कृष्ण से परामर्श करेंगे। इस प्रकार से विचार करके सभी पांडव द्वारिका की ओर प्रस्थान करने लगे। वे पवित्र नगरी द्वारिका में पहुंचे जहाँ श्री कृष्ण ने उनका स्वागत किया।श्री कृष्ण के पास पहुंचते ही युधिष्ठिर ने उनके चरणों में प्रणाम किया और कहा हे केशव आपको बारंबर नमस्कार है। श्री कृष्ण ने मुस्कुराते हुए कहा हे महाराज युधिष्ठिर द्वारिका नगरी में आपका स्वागत है कहिये।मैं आपकी किस प्रकार से सहायता कर सकता हूँ?

युधिष्ठिर ने विनम्रता पूर्वक कहा हे माधव आप तो सब कुछ जानते हैं। द्वापरयुग अब समाप्त होने वाला है और कलयुग के संकेत स्पष्ट रूप से दिखने लगे हैं। मैं यह जानना चाहता हूँ कि कलयुग में मानव का स्वभाव और आचरण कैसा होगा?

वह किस प्रकार के कर्म करेगा और मोक्ष प्राप्ति के लिए उसे कौन से प्रयास करने होंगे?

श्री कृष्ण ने गहरी मुस्कान के साथ उत्तर दिया हे धर्मराज आपकी जिज्ञासा उचित है?

कलियुग के प्रभावों को समझना अत्यंत महत्वपूर्ण है, लेकिन इसका उत्तर मैं आपको सीधे नहीं दे सकता।इसके लिए आपको और आपके भाइयों को कुछ विशेष अनुभव प्राप्त करने होंगे। युधिष्ठिर ने उत्सुकता पूर्वक पूछा हे केशव आप जीस प्रकार की परीक्षा की बात कर रहे है, उसके लिए हम क्या करें?

हमें क्या अनुभव करना होगा?

श्री कृष्ण ने कहा हे महाराज।आपको और आपके चारों भाइयों को अलग अलग दिशाओं में स्थित घने और भयानक वनों में जाकर कुछ विचित्र और अद्भुत चीजें देखनी होंगी। जब आप वहाँ कुछ असामान्य घटनाओं का अनुभव करेंगे तो उन्हें वापस आकर मुझसे साझा करें। तभी मैं आपको कलियुग के प्रभावों के बारे में विस्तार से बता पाऊंगा।युधिष्ठिर कहते हैं, जैसी आपकी आज्ञा केशव आप जीस स्थान की ओर इशारा करेंगे, हम वहाँ पर जाने के लिए तैयार हैं। भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं, हे महाराज आप और आपके चारों भाई अब अलग अलग दिशाओं में जाओ। सभी दिशाओं में भयंकर वन स्थित है।आप उन जंगलों में जाकर देखो, अगर आपको कोई विचित्र चीज़ दिखाई दे तो आप वापस आकर बता देना। मैं उससे आपको आने वाले कलयुग का रहस्य बताऊँगा। फिर युधिष्ठिर और उनके भाइयों ने भगवान श्री कृष्ण की आज्ञा का पालन करते हुए वन की ओर चलने का निर्णय लिया।

पांडव अपने रथों से उतरे।और पैदल ही वन की ओर चल पड़े। वन की यात्रा कठिन थी, लेकिन वे अपने मन में जिज्ञासा और ईश्वर की आज्ञा का पालन करने के उद्देश्य से चल रहे थे। वन का वातावरण शांति और रहस्यमयता से भरा हुआ था और पांडव एक एक करके अलग अलग दिशाओं में जाने लगे।ताकि वे अधिक से अधिक अद्भुत घटनाओं का अनुभव कर सकें। सबसे पहले युधिष्ठिर को एक घने और रहस्यमय वन में एक विचित्र दृश्य दिखाई दिया। उन्होंने देखा कि एक विशालकाय हाथी के दो सूंड हैं। वह हाथी अपने दोनों सूंडों से वन के थपेडों को उखाड रहा था।मानो उसकी शक्ति अद्वितीय हो। यह दृश्य देखकर युधिष्ठिर आश्चर्यचकित हो गए और सोचने लगे कि यह अद्भुत घटना क्या संकेत दे रही है?

उन्होंने उस हाथी को ध्यान से देखा और उसके अद्वितीय रूप को समझने का प्रयास किया। इसके बाद।अर्जुन ने भी एक अद्भुत घटना का साक्षात्कार किया। अर्जुन एक सुंदर और शांत वन में पहुंचे जहाँ पक्षियों की चहचाहट सुनाई दे रही थी। वहाँ उन्होंने देखा कि एक विशाल पक्षी के पंखों पर वेदों की रचाएं लिखी हुई थी। वह पक्षी अत्यंत विशाल और गौरवशाली था।लेकिन वह मुर्दे का मांस खा रहा था। अर्जुन यह दृश्य देखकर सोचने लगे, यह कैसा अद्भुत और विरोधाभासी दृश्य है। एक और यह पक्षी वेदों का ज्ञान धारण करता है और दूसरी ओर वह मृत जीवों का मांस खा रहा है। अर्जुन ने इस दृश्य को ध्यान से देखा और यह समझने का प्रयास किया।फिर भीम जो बड़े बलवान और हृष्ट पुष्ट थे, उन्होंने भी एक अनोखी घटना देखी। भीम एक हरे भरे चारागाह में पहुंचे जहाँ गायों का एक झुंड चढ़ रहा था। वहाँ उन्होंने देखा कि एक गाय ने बछड़े को जन्म दिया और वह गाय अपने बछड़े को इतनी ज़ोर से चाटने लगी।कि वह बछडा लहूलुहान हो गया। भीम ने यह दृश्य देखा और सोचने लगे यह कैसी विचित्र ममता है जो बच्चे को घायल कर रही है?

इसके बाद सहदेव ने एक विचित्र दृश्य देखा। सहदेव एक सुंदर और शांत जलाशय के पास पहुंचे जहाँ सात कुंए थे उन सात कुओं में से।छह कुंओं में पानी भरा हुआ था, लेकिन बीच वाला कुआं जो सबसे गहरा था, उसमें ज़रा सा भी पानी नहीं था। यह दृश्य देखकर सहदेव गहरे विचार में पड गए और सोचने लगे कि यह अद्भुत दृश्य क्या संकेत दे रहा है?

उन्होंने इस दृश्य को ध्यान से देखा और यह समझने का प्रयास किया।और फिर अंत में नकुल ने भी एक अद्भुत दृश्य देखा। नकुल एक पर्वतीय क्षेत्र में पहुंचे जहाँ चारों ओर ऊंचे ऊंचे पर्वत थे और उन पर हरे भरे वृक्ष उगे हुए थे। उन्होंने देखा कि एक पहाड की छोटी सी एक विशालकाय शिला लुढ़कती हुई। नीचे आ रही है वह शिलाअपने रास्ते में आने वाले बड़े बड़े वृक्षों को उखाड कर फेंक देती है। लेकिन जब वह एक छोटे से पौधे के पास पहुंची तो उसे छूते ही वह स्थिर हो गई। नकुल इस घटना से स्तब्ध रह गए और सोचने लगे कि यह छोटा सा पौधा इतना शक्तिशाली कैसे हो सकता है?

उन्होंने इस दृश्य को ध्यान से देखा।और यह समझने का प्रयास किया। शाम होते ही पांचों भाई वंश से वापस लौटे और भगवान श्री कृष्ण के पास पहुंचे। वे सभी अपने अपने अनुभवों को साझा करने के लिए उत्सुक थे। सबसे पहले युधिष्ठिर ने अपनी बात कही हे प्रभु मैंने एक हाथी देखा जिसकी दो सूंडें थीं।यह दृश्य देखकर मैं बहुत चकित हुआ। श्री कृष्ण मुस्कुराए और बोले, धर्मराज इस दृश्य का अर्थ यह है कि कलयुग में ऐसे लोग सत्ता में आएँगे जो दोनों ओर से शोषण करेंगे। वे एक ओर प्रजा से सेवा और भक्ति की मांग करेंगे और दूसरी ओरअपने स्वार्थ के लिए उनका दोहन करेंगे, वे दिखावे में कुछ और होंगे और अंदर से कुछ और ऐसे शासक प्रजा के हित की बजाय अपने स्वार्थ को प्राथमिकता देंगे। इसके बाद अर्जुन ने कहा, प्रभु मैंने एक पक्षी देखा जिसके पंखों पर वेदों की आरचाई लिखी हुई थी।लेकिन वह पक्षी मुर्दे का मांस खा रहा था। यह दृश्य मेरे लिए अत्यंत विचित्र था। श्री कृष्ण ने गहरे विचार में डूबते हुए कहा अर्जुन कलयुग में ऐसे लोग होंगे जो बड़े बड़े विद्वान और पंडित कहलाएंगे। उनके पास ज्ञान तो होगा लेकिन उनका हृदय पवित्र नहीं होगा।वे मृतकों के नाम पर धन अर्जित करने के लिए तत्पर रहेंगे। ऐसे विद्वान केवल अपने लाभ के लिए धर्म और वेदों का उपयोग करेंगे। वे केवल उस समय का इंतजार करेंगे जब कोई धनी व्यक्ति मरे और उनकी संपत्ति उनके नाम हो जाए। इस।युग में धर्म के नाम पर भी छल और कपट होगा। फिर भीम ने अपनी बात कही, प्रभु मैंने देखा कि एक गाय अपने बछड़े को इतनी ज़ोर से चाट रही थी कि वह लहूलुहान हो गया। यह दृश्य मेरे लिए बडा ही विचित्र था। श्री कृष्ण ने गंभीरता से उत्तर दिया भीम।कलयुग में माता पिता अपने बच्चों के प्रति इतनी ममता और मोह दिखाएंगे कि वे उनके विकास का मार्ग ही बाधित कर देंगे। अत्यधिक स्नेह और सुरक्षा के कारण बच्चे आत्मनिर्भर नहीं बन पाएंगे और वे जीवन में आगे बढ़ने के बजाय मोहमाया के जाल में फंस कर रह जाएंगे। माता पिता की ममता।उनके बच्चों के लिए ही बाधा बन जाएगी और बच्चे आत्मनिर्भर बनने के बजाय कमजोर हो जाएंगे। अब सहदेव ने अपनी बारी ली और कहा हे प्रभु मैंने सात कुओं का अद्भुत दृश्य देखा। छः कुंओं में पानी भरा हुआ था, लेकिन बीच वाला कुआं जो सबसे गहरा था।वह पूरी तरह से सूखा था। यह दृश्य मुझे बहुत विचित्र लगा। श्री कृष्ण ने धीरे धीरे उत्तर दिया सहदेव कलयुग में ऐसे लोग होंगे जो दिखावे में बड़े धनाढ्य और संपन्न होंगे। वे बड़े बड़े उत्सवों और आयोजनों में अपार धन खर्च करेंगे, लेकिन अपने पडोस में।भूखे और प्यासे लोगों की ओर देखने की भी जरूरत नहीं समझेंगे। वे केवल अपने स्वार्थ और आनंद के लिए धन का उपयोग करेंगे और दूसरों की पीडा की उन्हें कोई परवाह नहीं होगी। यह युग स्वार्थ और अनदेखी का होगा, जहाँ धन का असली उपयोग नहीं हो पाएगा। अंत मेंनकुल ने अपनी बात कही प्रभु मैंने देखा कि एक विशालकाय शिला पहाड से लुढ़कती हुई नीचे आ रही थी। वह अपने रास्ते में आने वाले बड़े बड़े वृक्षों को उखाडकर फेंक रही थी, लेकिन एक छोटे से पौधे के पास पहुंचते ही वह शिला स्थिर हो गई।यह दृश्य मेरे लिए अत्यंत आश्चर्यजनक था। श्री कृष्ण ने गंभीर स्वर में उत्तर दिया नकुल कलयुग में मनुष्य का पतन बड़े बड़े धनों और संपत्तियों के कारण नहीं रुकेगा। उसका जीवन केवल भौतिक सुख सुविधाओं से उखड जाएगा।लेकिन अगर मनुष्य अपने हृदय में भगवान का नाम और सच्ची भक्ति धारण कर लेता है तो वह पतन के मार्ग से बच सकता है। हरिनाम का छोटा सा पौधा भी जीवन को संभाल सकता है जबकि बड़ेबड़े वृक्ष जैसे धन और सत्ता उसे नहीं बचा पाएंगे, यही कलियुग का सच होगा।भगवान श्री कृष्ण के इन उत्तरों को सुनकर पांचों पांडव गहरे विचार में पड गए। उन्होंने कलियुग के भविष्य की एक झलक देख ली थी और यह समझ लिया कि इस युग में मनुष्य का स्वभाव और आचरण कैसे बदल जाएगा। वे समझ गए।कि इस युग में धर्म और सत्य का पालन करना कितना कठिन होगा, लेकिन यदि वे सच्ची भक्ति और भगवान के नाम का आश्रय ले तो वे अवश्य ही इस पतन से बच सकते हैं। इसके पश्चात पितामह भीष्म ने भी कलियुग के बारे में कुछ भविष्यवाणियां की। उन्होंने कहा।कलियुग में लोग अपने माता पिता की सेवा नहीं करेंगे, संपत्ति के लालच में वे अपने माता पिता को घर से बाहर निकाल देंगे और विषय ***** में लिप्त हो जाएंगे। लोग पराई स्त्रियों पर बुरी नजर डालेंगे और सदैव *** ***** से भरे रहेंगे।यह सुनकर पांडवों ने कलयुग की एक और गहरी झलक पाई और यह समझ गए कि इस युग में मानव का पतन कितना गहरा हो सकता है। उन्होंने यह भी जाना कि धर्म और सत्य के मार्ग पर चलते हुए ही वे इस युग की कठिनाइयों का सामना कर सकते हैं। इसके अलावा गरुड पुराण में भी।कलयुग के अंत का वर्णन मिलता है गरुड पुराण में भगवान श्री कृष्ण ने कलयुग के अंत के संकेत बताए हैं।

एक बार गरुड जी ने भगवान श्री कृष्ण से पूछा हे प्रभु चारों युगों में कलयुग को ही सबसे भयंकर और दुहकदायक माना गया है, इस कलयुग का अंत कैसे होगा?

और इसके अंत के समय कौन से संकेत दिखाई देंगे?

श्री कृष्ण ने गरुड जी की ओर देखकर उत्तर दिया हे गरुड कलियुग का अंत अत्यंत भयानक और विनाशकारी होगा। जब पृथ्वी पर यह संकेत दिखाई देने लगे तो समझ लेना कि कलियुग का अंत निकट आ चुका है और अब सृष्टि का अंत।प्रलय से होगा पहला संकेत मानव आयु का हरास भगवान श्री कृष्ण ने सबसे पहले बताया कि कलियुग के अंत समय में मानव जीवन की आयु घटकर केवल 20 वर्ष रह जाएगी। यह संकेत इस बात का प्रतीक होगा कि मानव का शरीर अत्यंत दुर्बल और कमजोर हो जाएगा।जब मनुष्य मात्र 12 वर्ष का होगा तभी उसके बाल सफेद हो जाएंगे और उसका शरीर झुर्रियों से भर जाएगा। यह संकेत इस बात का प्रतीक होगा कि कलयुग में मनुष्य की शारीरिक और मानसिक शक्ति का पूर्ण पतन हो जाएगा। इसके अलावा उस समय की स्त्रियां आठ या नौ वर्ष की आयु में ही।संतान को जन्म देने लगेंगी। यह स्थिति समाज में एक अस्वाभाविकता और असंतुलन की ओर इशारा करती है। स्त्रियों का शरीर अत्यंत क्षीण और छोटा होगा, लेकिन उनकी भोजन की लालसा अत्यधिक होगी। वे कम संतान को जन्म देंगी और अत्यंत क्रोधी स्वभाव की होंगी।वे अपनी संतान का पालन पोषण करने में भी असमर्थ होंगी, जिससे समाज में अव्यवस्था और असंतोष का माहौल बनेगा। दूसरा संकेत पतिवृता स्त्रियों का लोप भगवान श्री कृष्ण ने दूसरा संकेत बताते हुए कहा कि कलियुग के अंत समय में।पतिवृता स्त्रियां कहीं दिखाई नहीं देंगी। एक ही स्त्री कई पुरुषों से विवाह करेगी। यह स्थिति समाज में नैतिकता और सदाचार का ह्रास होने का प्रतीक है। इसके अलावा लोक पूजा पाठ, श्राद्ध, अंतिम संस्कार, मुंडन और विवाह जैसे धार्मिक।और सांस्कृतिक कार्यों का परित्याग कर देंगे। जल के अभाव के कारण लोग स्नान भी नहीं करेंगे और अशुद्ध ही रहेंगे। कलियुग के अंत में लोग केवल मांसाहारी का ही सेवन करेंगे और कोई भी सात्विक आहार ग्रहण नहीं करेगा। इस युग में लोगों के वस्त्र चमकीले और तने हुए होंगे।जो उनके भौतिकता के प्रति आकर्षण और आध्यात्मिकता से दूर होने का संकेत है। तीसरा संकेत वृक्षों का फलहीन होना भगवान श्री कृष्ण ने तीसरा संकेत बताया कि कलियुग के अंत समय में वृक्षों में फल आना बंद हो जाएगा। सभी वृक्ष फलरहित हो जाएंगे और सृष्टि में।हर तरफ केवल शमी के वृक्ष ही दिखाई देंगे। मनुष्य शाकाहार को त्याग कर केवल मांसाहारी का सेवन करेंगे। इस युग का भोजन तामासिक और रोग उत्पन्न करने वाला होगा, जिससे लोग जल्दी ही बूढ़े होकर मृत्यु को प्राप्त हो जाएंगे। कलयुगी मनुष्य गाय की पूजा करना बंद कर देंगे।और गायों को केवल दूध और मांस के लिए पाला जाएगा। यह संकेत समाज में धर्म, नैतिकता और प्रकृति के प्रति सम्मान की कमी का प्रतीक है। चौथा संकेत अल्पवृष्टि श्री कृष्ण ने चौथे संकेत के रूप में कहा कि कलयुग के अंत समय में अल्पवृष्टि होगी।अर्थात बहुत ही कम बारिश होगी, खेतों में अनाज नहीं उगेगा और धान्य का आकार बहुत छोटा हो जाएगा। फलों में रस भी उत्पन्न नहीं होगा। मनुष्य भूख और प्यास के कारण तडपकर मरने लगेंगे। इस स्थिति में मनुष्य को केवल बकरियों का दूध ही प्राप्त होगा।यह संकेत समाज में प्राकृतिक संसाधनों की कमी और जीवन की कठिनाइयों को दर्शाता है। पांचवा संकेत सात सूर्य और प्रलय अंत में भगवान श्री कृष्ण ने सबसे भयानक संकेत का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि जब कलियुग का अंत निकट होगा तब भगवान विष्णु।सूर्य की किरणों में विराजमान होकर पृथ्वी का संपूर्ण जल सोख लेंगे। आकाश में चारों तरफ सात सूर्य दिखाई देंगे। इन सभी सूर्यो के प्रभाव से संपूर्ण सृष्टि जलकर खाक हो जाएगी। तत्पश्चात रुद्ररूपी भगवान विष्णु संपूर्ण संसार को दग्घ करके अपने श्वास से।मेघों को उत्पन्न करेंगे। ये मेघ भयंकर गर्जना करते हुए अगले 100 वर्षों तक आकाश से जल की वर्षा करेंगे, जिससे सृष्टि की वह भयंकर अग्निशांत हो जाएगी। अग्निशांत होने पर ये मेघ संपूर्ण जगत को जल में डुबो देंगे जिससे संपूर्ण सृष्टि का अंत हो जाएगा।श्री कृष्ण ने गरुड जी से कहा, यह दृश्य इतना विनाशकारी और भयावह होगा कि समस्त संसार जलकर राख हो जाएगा, संपूर्ण जगत का ध्वंस होगा, लेकिन यह केवल एक अंत नहीं है, बल्कि एक नई शुरुआत का संकेत भी है, जब सृष्टि अपने विनाश को प्राप्त कर लेगी।तब भगवान अपनी इच्छा मात्र से एक नई सृष्टि की रचना करेंगे। यह सृष्टि पहले से अधिक शुद्ध, पवित्र और दिव्य होगी जहाँ धर्म, सत्य और आध्यात्मिकता का पुनः उत्थान होगा। यह एक चक्र है सृष्टि पालन और संहार जब एक युग का अंत होता है।तो यह किसी नए युग की शुरुआत के लिए मार्ग प्रशस्त करता है। यह हमें यह समझाता है कि हर अंत एक नई शुरुआत का प्रारंभ है और इस नई सृष्टि में वही जीवित रहेंगे जिन्होंने धर्म और सत्य का पालन किया है। इस प्रकार से कलयुग का अंत होगा।और फिर परमात्मा अपनी इच्छा मात्र से पुनः सृष्टि की रचना करेंगे। यह ज्ञान हमें सीखाता है कि कलयुग की कठिनाइयों और चुनौतियों के बावजूद हमें सच्चे धर्म और भगवान के नाम का आश्रय लेना चाहिए। इसी में हमारा कल्याण है तो दोस्तों इस प्रकार से।गरुड पुराण में कलयुग के अंत का वर्णन किया गया है। यह ज्ञान हमें चेतावनी देता है कि कलयुग के अंत समय में क्या हो सकता है और हमें इस युग में भी धर्म और सत्य के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करता है। अगर आपको यह जानकारी अच्छी लगी हो तो वीडियो को लाइक करें।और चैनल को सब्सक्राइब करना न भूलें। आप सभी का धन्यवाद।