विजयादशमी महापर्व है साहस और संकल्प का, इस पर्व से जुड़ी लोकप्रिय कथा

स्वप्निल व्यास @ इंदौर. विजयादशमी के दिन रावण, मेघनाद व कुंभकर्ण के बड़े-बड़े पुतले बनाकर उनका दहन कर बुराई पर अच्छाई की जीत का सूत्रवाक्य दोहराते हैं। किन्तु समाज की स्थितियां देख नहीं लगता कि बुराई हारी है और अच्छाई जीती है। अत्याचार, अनाचार, दुराचार व भ्रष्टाचार का रावण हमारे चहुंओर तांडव कर रहा है। यह हमारे वर्तमान सामाजिक जीवन की विडम्बनाग्रस्त सच्चाई है। आज हम अपने ऋषि-मनीषियों द्वारा बतायी गयी पर्वों की प्रेरणाओं को पूरी तरह भुला बैठे हैं। पर्वों में निहित आत्मिक संवेदना हमारी जड़ता के कुटिल व्यूह में

अकाल मौत कोई नहीं मरता, जान लेने से 24 घंटे पहले हर इंसान को ये 4 संकेत देते हैं यमराज ..

जिसका जन्म हुआ है, उसकी मृत्यु होना भी निश्चित ही है। इस सच को कोई नहीं बदल सकता, लेकिन कब हमारी मृत्यु हो सकती है, इसका पता पहले ही लग जाता है। माना जाता है कि यमलोक के दूत हर इंसान को उसकी मौत से पहले यमराज के 4 संदेश भेजते हैं, जिनसे यह समझा जा सकता है कि अब उसका अंतिम समय आने वाला है।एक प्रचलित कथा के अनुसार यमराज ने अपने एक भक्त अमृत को वचन दिया था कि वे हर किसी के मौत से पहले ही 4 संकेतों से जरिए

आज भी भारत के इस गाँव में हनुमान जी की पूजा करना माना जाता है गुनाह ..

हनुमान जी की पूजा – ऐसा माना जाता है कि कलियुग में आज भी एक ऐसा देवता मौजूद हैं जो अपने भक्‍तों की हर मनोकामना पूर्ण करते हैं।सभी कष्‍टों को हरने वाले हनुमान जी ही वो देवता हैं जो आज भी मौजूद हैं और मनुष्‍य जाति की रक्षा कर रहे हैं।भारत में भगवान राम के बाद हनुमान जी की पूजा सबसे ज्‍यादा की जाती है। शनिवार और मंगलवार के दिन तो जैसे हनुमान जी के मंदिरों में मेला सा लग जाता है। आपने अब तक सोचा होगा कि हनुमान जी को

द्रौपदी की लाज बचाने के पीछे ये थे कारण, नहीं जानते होंगे दूसरा कारण ..

महाभारत के युद्ध के बारे में सभी ने पढ़ा और देखा होगा। वो संसार में हुआ अब तक का सबसे बड़ा युद्ध था जो धर्म और अधर्म के लिए लड़ा गया था। एक ऐसा युद्ध जिसमें शत्रु ही भाई थे और भाई ही शत्रु। इस युद्ध के होने के पीछे कई कारण थें। उनमें से एक बड़ा कारण थीं पांडवों की पत्नी द्रौपदी। एक कहानी ये भी प्रचलित है कि द्रौपदी का जब चीर हरण हुआ तो उनकी लाज की रक्षा भगवान श्री कृष्ण ने की थी हालांकि इसके पीछे भी

माता इस वर्ष सिंह के बजाय नौका पर सवार आयेगीं, माता की सवारी इस वर्ष नौका रहेगी

माता इस वर्ष सिंह के बजाय नौका पर सवार आयेगीं चूंकि प्रतिपदा तिथि इस वर्ष बुधवार को पड रही है इसीलिये माता की सवारी इस वर्ष नौका रहेगी। इस वर्ष शरद ऋतु अंर्तगत पडने वाली शारदीय नवरात्र या महाकाली नवरात्र की महत्वपूर्ण तिथियां और उस दिन किया जाने वाले सफलता प्राप्ति के मंत्र जिनके जप से आप अप्रत्याशित लाभ प्राप्त कर सकते है । वे बालिकाऐं जिनके विवाह में अनावश्यक विलंब हो रहा है वे संपूर्ण नवरात्र में रोजाना प्रातः एवं संध्या काल के समय मंत्र ’ ऊॅं कात्यायनी महामाये

शारदीय नवरात्रि 10 अक्टूबर से, क्यों माना गया है नौ दिन का पर्व

 नवरात्रि देवी दुर्गा की आराधना का पर्व, धार्मिक ग्रंथों के अनुसार देवी दुर्गा की आराधना के पर्व चैत्र, आषाढ़, आश्विन और माघ की शुक्ल प्रतिपदा से नवमी तक 9 दिन के होते हैं, परंतु प्रसिद्धि में चैत्र और आश्विन नवरात्रि ही मुख्य माने जाते हैं। इनमें भी देवी भक्त आश्विन नवरात्रि अधिक करते हैं। इनको यथाक्रम वासंती और शारदीय नवरात्रि कहते हैं।इनका आरंभ चैत्र और आश्विन शुक्ल प्रतिपदा को होता है अत: यह प्रतिपदा 'सम्मुखी' शुभ होती है।  घटस्थापना का समय प्रात:काल है अत: उस दिन चित्रा या वैधृति रात्रि तक रहें

अपनी किस गलती को सुधारने स्वर्ग से वापस आए थे कर्ण

हिंदू धर्म से संबंध रखने वाले लगभग लोगों को पता होगा कि 24 सितंबर से पितृ पक्ष शुरू हो चुका है जो 8 अक्टूबर तक चलेगा। इस समय हर कोई श्राद्ध कर अपने पितरों को प्रसन्न करने में लगा हुआ है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इन दिनों अपने पितरों के नाम पर लोग ब्राह्माणों को भोजन कराते हैं और दान-दक्षिणा देते हैं, क्योंकि एेसा कहा जाता है कि एेसा करने से पूर्वजों की आत्मा को मोक्ष की प्राप्ति होती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार पितृ तर्पण की ये परंपरा प्राचीन

मोर पंख में हैं नवग्रह का वास, पढ़ें आश्चर्यजनक फायदे

मोर, मयूर, पिकॉक कितने खूबसूरत नाम है इस सुंदर से पक्षी के। जितना खूबसूरत यह दिखता है उतने ही खूबसूरत फायदे इसके पंखों के भी हैं। हमारे देवी -दवताओं को भी यह अत्यंत प्रिय हैं। मां सरस्वती, श्रीकृष्ण, मां लक्ष्मी, इन्द्र देव, कार्तिकेय, श्री गणेश सभी को मोर पंख किसी न किसी रूप में प्रिय हैं। पौराणिक काल में महर्षियों द्वारा इसी मोरपंख की कलम बनाकर बड़े-बड़े ग्रंथ लिखे गए हैं।मोर के विषय में माना जाता है कि यह पक्षी किसी भी स्थान को बुरी शक्तियों और प्रतिकूल चीजों के प्रभाव से

कैसे मिलता है पितरों को भोजन, साथ में जानिए श्राद्ध करने से मिलते हैं कौन से 6 लाभ

प्राय: कुछ लोग यह शंका करते हैं कि श्राद्ध में समर्पित की गईं वस्तुएं पितरों को कैसे मिलती है? कर्मों की भिन्नता के कारण मरने के बाद गतियां भी भिन्न-भिन्न होती हैं। कोई देवता, कोई पितर, कोई प्रेत, कोई हाथी, कोई चींटी, कोई वृक्ष और कोई तृण बन जाता है। तब मन में यह शंका होती है कि छोटे से पिंड से अलग-अलग योनियों में पितरों को तृप्ति कैसे मिलती है? इस शंका का स्कंद पुराण में बहुत सुन्दर समाधान मिलता है।एक बार राजा करंधम ने महायोगी महाकाल से पूछा, 'मनुष्यों द्वारा

मात्र इन 5 कामों को करने से ज़िंदगी में कभी नहीं होगी आपको धन की कमी

अगर आपको लगता है कि आपकी लाख कोशिशों के बाद भी धन की परेशानी बनी रहती है। जो आय होता है उससे जरुरतें पूरी नहीं हो रही है तो आपको अपने दैनिक जीवन में पांच काम शामिल कर लेना चाहिए। यह पांच काम ऐसे हैं जिनमें आपको एक पैसा नहीं खर्च करना है और इनसे आय बढ़ने के साथ बचत में भी वृद्घि होगी। गुरूवार के दिन करें यह काम   गुरूवार के दिन का स्वामी देव गुरू बृहस्पति को माना गया है। गुरू धर्म और धन के स्वामी ग्रह हैं। धन संबंधी परेशानी

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