हनुमानजी की नाभी से निकलता है जल, प्रसाद में पीने से खत्म होती हैं गंभीर बीमारियां!

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छिंदवाड़ा. जय जामसांवली! हनुमानजी के दिव्यधाम में लोग अर्जियां लगाते है, यहां हनुमानजी की प्रतिमा शयनमुद्रा में स्थापित हैं। कहते हैं रामभक्त हनुमानजी की प्रतिमा एक पीपल के पेड़ के नीचे से प्रकट हुई थी। आज इस धाम को चमत्कारिक हनुमान मंदिर के नाम से देश-दुनिया में जाना जाता है।
इस धाम में रामभक्त हनुमानजी सबकी बिगड़ी बनाते हैं। संकट मोचन सबके संकट हर लेते हैं। यहां रोग से लेकर दोष तक सब का नाश हो जाता हैं और अभय का वरदान हर भक्त को मिलता हैं।



मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा के ग्राम जामसांवली में भगवान हनुमान साक्षात विराजे हैं। इस हनुमान मंदिर का कौना-कौना विशेषताओं से जगमगाता है, इसलिए इस मंदिर को चमत्कारिक मंदिर के नाम से पहचाना जाता हैं। मंदिर में स्थापित हनुमानजी की विशाल प्रतिमा शयन मुद्रा में है, जो अद्वितीय हैं। पूरे देश में कहीं भी शयन मुद्रा में हनुमानजी की इतनी बड़ी प्रतिमा नहीं हैं।

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कई कहानियां है चमत्कार की
पुजारी सुरेश बताते हैं भगवान हनुमानजी स्वयं प्रकट हुए थे। मंदिर में गंभीर बीमारियां का चमत्कारिक इलाज होता हैं। मंदिर में स्थापित हनुमानजी की प्रतिमा की नाभी से जल निकलता है, जिसे प्रसाद के रुप में पिलाया जाता है। यह जल रहस्यमयी तरीके से निकलता है।



यह जल पिने से तमाम बिमारियां जड़ से नष्ट हो जाती है। प्रेत बाधाओं से भी यह चमत्कारी जल मुक्ति दिलाता है। कई बड़े-बड़े अस्पतालों में इलाज नहीं होने के बाद यहां लोग गंभीर बीमारियों में स्वस्थ्य होकर गए हैं। यह जल संजीवनी बूटी की तरह साबित हुआ है। ट्यूमर, कैंसर जैसी गंभीर बीमारियां भी ठीक हुई हैं।

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यह भी है मान्यता
त्रेता युग में वनवास के लिए ग्राम जामसांवली से निकले थे, तब पीपल के पेड़ के नीचे अपूत खजाना गढ़ा था, जिसकी रक्षा के लिए यहां हनुमानजी ठहरे थे।

 

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