Home पर्व और त्योहार क्यों मनाई जाती है शीतला अष्टमी, जानिए इसका महत्व

क्यों मनाई जाती है शीतला अष्टमी, जानिए इसका महत्व

चैत्र मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि के दिन शीतला अष्टमी का पर्व मनाया जाता है. कई जगह इस पर्व कौ बसौड़ा भी कहते हैं इस दिन बासी भोजन करने की प्रथा है, जिसके चलते इसे बसौड़ा कहा जाता है. होली के आठवें दिन शीतला अष्टमी मनाई जाती है. (sheetala ashtami importance) शीतला अष्टमी के दिन घर में खाना नहीं बनाया जाता बल्कि इस दिन एक दिन पहले बने भोजन को खाया जाता है.

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शुभ मुहूर्त sheetala ashtami importance

इस साल तिथियों में परिवर्तन के कारण दो दिन शीतला अष्टमी का पर्व मनाया जा रहा है. 5 अप्रैल  को 3 बजे तक शीतला अष्टमी की तिथि है.

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ऐसे करें शीतला अष्टमी की पूजा sheetala ashtami puja

शीतला अष्टमी का पर्व मनाने के लिए एक दिन पहले यानि कि शीतला सप्तमी के दिन ही तैयारी कर लेनी चाहिए. एक दिन पहले ही रसोई घर की साफ-सफाई कर लें, भोजन बना लें. शीतला अष्टमी के दिन सुबह ही स्नान  कर के व्रत का संकल्प लें और मां शीतला की विधिवत आराधना करने के बाद उन्हें एक दिन पहले बने बासी भोजन का भोग लगाएं. माता शीतला को दही, रबड़ी, चावल से बनें पदार्थों का भोग लगाएं. हिंदु धर्म में शीतला अष्टमी एकमात्र ऐसा पर्व है जब देवी मां को बासी खाने का भोग लगाया जाता है. शीतला अष्टमी के दिन जो भी भक्त मां शीतला की सच्चे मन से आराधना करता है मां शीतला उसकी गर्मी के दिनों में होने वाली बीमारियों से रक्षा करती हैं.

शीतला माता की पौराणिक कथा sheetala ashtami katha

शीतला माता की एक पौराणिक कथा प्रचलित है, कहते हैं एक बार एक बुजुर्ग महिला और उसकी दो बहुओं ने शीतला अष्टमी का व्रत रखा. बसौड़े के दिन बासी भोजन का भोग लगाने की प्रथा है लेकिन बुजुर्ग महिला की दोनों बहुओं को कुछ समय पहले ही बच्चे हुए थे जिसके चलते उन्हें डर था कि  बासी भोजन करने से नुकसान होगा इसलिए बहुओं ने सुबह जाता भोजन बनाकर मां शीतला को उसका भोग अर्पित कर दिया. पूजा के कुछ समय बाद दोनों बहुओं की संतानों ने दम तोड़ दिया. जब सास को इस बारें में पता चला तो उसने अपनी दोनों बहुओं को घर से निकाल दिया. दोनों बहुएं अपने बच्चों का शव लेकर घर से निकल पड़ी. रास्ते में वो एक जगह आराम करने के लिए रूकी जहां उन्हें दो बहने शीतला और ओरी मिली, वो दोनों बहनें अपने सिर के जुओं से परेशान थी. दोनों बहुओं ने मिलकर उनके सिर को साफ किया, इससे खुश होकर उन दोनों बहनों ने बहुओं का आशीर्वाद दिया. दोनों बहुएं रोने लगी और अपने बच्चों के शव उन्होंने दोनों बहनों को दिखाएं. तब बच्चों के शव देखकर शीतला ने कहा कि उन दोनों को उनके गलत काम करने की सजा मिली है. दोनों बहुएं समझ गई कि ताजे खाने का भोग लगाने के कारण उनके बच्चों की मृत्यु हुई है दोनों बहुओं ने माता शीतला से क्षमा याचना की, मां शीतला ने प्रसन्न होकर दोनों की संतानों को फिर से जीवित कर दिया.

शीतला अष्टमी व्रत का महत्व sheetala ashtami importance

कहते हैं जो लोग शीतला माता की पूजा करते हैं मां शीतला उनकी चेचक और संक्रामक बीमारियों से रक्षा करती हैं.

शीतला स्त्रोत

वंदे हं शीतलां देवीं रासभस्थां दिगंबराम् ।
मार्जनीकलशोपेतां शूर्पालंकृतमस्तकाम् ॥

अर्थ – शीतला माता हाथों में कलश, सूप, मार्जन (झाड़ू) और नीम के पत्ते धारण किए होती हैं. गर्दभ की सवारी किए हुए यह अभय मुद्रा में विराजमान हैं.

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