Home धर्म कथाएं इन सात लोगों को मिला है अमरता का वरदान, आप भी इस...

इन सात लोगों को मिला है अमरता का वरदान, आप भी इस मंत्र से …

हिंदु धर्म में सात लोगों को चिरंजीवी (Sapt chiranjeevi) होने का वरदान प्राप्त है. ये सात वो लोग हैं जो किसी वरदान या किसी अभिशाप के कारण धरती से मुक्त न हो सके और आज भी धरती में किसी न किसी रूप में विचरण कर रहे हैं आज हम आपको ऐसे ही सात चिरंजीवी लोगों के बारे में बताने वाले हैं. कहते हैं इन सात लोगों का नाम लेने भर से व्यक्ति के कष्ट कट जाते हैं.

daily horoscope 9 march 2021 panchang rashifal, aaj ka rashifal, mangalwar ka rashifal in hindi

अश्वत्थामा बलिव्र्यासो हनूमांश्च विभीषण:।

कृप: परशुरामश्च सप्तएतै चिरजीविन:॥

सप्तैतान् संस्मरेन्नित्यं मार्कण्डेयमथाष्टमम्।

जीवेद्वर्षशतं सोपि सर्वव्याधिविवर्जित।।

इस श्लोक के अनुसार अश्वथामा, दैत्यराज बलि, हनुमान, विभीषण, कृपाचार्य, परशुराम और मार्कण्डेय ऋषि इन सात लोगों को नाम जो व्यक्ति नित्य सुबह लेता है उसे दीघ्रार्यु प्राप्त होती है. वेद व्यास जी को भी चिरंजीवी माना गया है.

यहां दबाकर धर्म कथाएं का मोबाइल एप डाउनलोड करें

बलि (Sapt chiranjeevi)

राजा बलि अपनी दानवीरता के लिए जाने जाते हैं. अपनी वीरता से बलि ने इंद्र को पराजित कर स्वर्ग में कब्जा कर लिया था. कहते हैं बलि के द्वार से कोई भी याचक खाली हाथ नहीं जाता था, बलि को अपनी दानवीरता का अंहकार हो गया था बलि के अंहकार को नष्ट करने और देवताओं को स्वर्ग वापस दिलाने के लिए भगवान विष्णु ने वामन अवतार लिया था और तीन पग में भगवान ने सारी धरती नाप दी थी. तीसरा पैर रखने धरती पर जगह न होने के कारण भगवान ने तीसरा पैर बलि के सिर पर रखा और उसे पाताल लोक भेज दिया.

परशुराम (Sapt chiranjeevi)

भगवान परशुराम को भगवान विष्णु का छटवां अवतार माना गया है परशुरा्म जी को भी चिरंजीवी होने का वरदान मिला है. परशुराम जी भगवान राम के काल में रहें. परशुराम जी जमदग्नि ऋषि और रेणुका के पुत्र थे जिनका नाम राम हुआ करता था. शिवजी ने उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर उन्हें फरसा भेंट किया था तबसे उन्हें परशुराम के नाम से जाना जाता है. भगवान परशुराम का जन्मोत्सव वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है जिसे अक्षय तृतीय भी कहते हैं.

हनुमान(Sapt chiranjeevi)

हनुमान जी को अजर अमर अविनाशी कहा जाता है. कहते हैं धरती पर जब तक भगवान राम का नाम रहेगा तब तक हनुमान जी धरती पर वास करते रहेंगे. रामायण काल में भगवान हनुमान भगवान राम को लंका विजय कराने में सहायक बनते हैं तो महाभारत काल में वो महाबली भीम की परीक्षा लेते हैं कहते हैं हनुमान जी की पूंछ को भीम अपनी पूरी ताकत लगाने के बाद भी हटा नहीं पाया था.

विभीषण (Sapt chiranjeevi)

रावण के भाई विभीषण को भगवान राम ने चिरंजीवी होने का वरदान दिया था. कहते हैं विभीषण हर समय भगवान राम का नाम जपते रहते हैं.

ऋषि व्यास (Sapt chiranjeevi)

महाभारत की रचना करने वाले व्यास ऋषि को भी चिरंजीवी होने का वरदान मिला है. व्यास जी पराशर ऋषि और सत्यवती के पुत्र थे. कहते हैं यमुना नदी के बीच में स्थित एक द्वीप में उनका जन्म हुआ था. इनके सांवले रंग के कारण इन्हें कृष्ण और जन्मस्थान के कारण ‘द्वैपायन’ कहा जाता है. व्यासस्मृति के नाम से व्यास जी ने प्रणीत एक स्मृतिग्रन्थ लिखा है. भारतीय वांड्मय एवं हिन्दू-संस्कृति व्यासजी की ऋणी है.

lord sun transit in pisces zodiac malmas 2021 start date in hindi

अश्वत्थामा (Sapt chiranjeevi)

अश्वथामा गुरू द्रोणाचार्य का पुत्र हैं, कहते हैं अश्वथामा के माथे पर अमरमणि स्थित है इसलिए उन्हें अमरता का वरदान प्राप्त है. हालांकि कहते हैं कि अर्जुन ने अश्वथामा के माथे से मणि को निकाल लिया था और महाभारत के युद्ध में ब्रह्मास्त्र चलाने के कारण भगवान कृष्ण ने उन्हें शाप दिया था कि कल्पांत तक वो इस धरा पर भटकते रहेंगे.

कृपाचार्य (Sapt chiranjeevi)

शरद्वान् गौतम के पुत्र कृपाचार्य को भी चिरंजीवी होने का वरदान मिला है. कृपाचार्य कौरवों के कुलगुरू थे, तथा रिश्ते में अश्वथामा के मामा थे. महाभारत के युद्ध में कृपाचार्य ने कौरवों की तरफ से युद्ध में भाग लिया था.

Read More: जानिए किन औषधियों को माना गया है नवदुर्गा का स्वरूप

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments