तुला राशि में सूर्य गोचर के परिणाम, किसके जीवन में आएगी शुभता और किसको हो सकती है परेशानी?

जब सूर्य राशि परिवर्तन करता है, तो इसे सूर्य संक्रांति के नाम से जाना जाता है. 17 अक्टूबर को सूर्य शाम 06:44 बजे सूर्यदेव तुला राशि में प्रवेश करेंगे. चूंकि सूर्य एक राशि में एक महीने की अवधि तक गोचर करते हैं इसलिए ये इस बार 16 नवम्बर की शाम 06:32 तक यहीं रहेंगे. तुला राशि सूर्य की नीच राशि मानी जाती है अर्थात यहां जाकर वे कमजोर होंगे. अब राशिवार जाने:

ज्योतिर्विद बब्बन कुमार सिंह 8989098404

मेष राशि: पांचवें के स्वामी सातवें में जा रहे हैं. यहां पंचमेश सप्तमेश को पीड़ित करेंगे. इसलिए पति-पत्नी या व्यावसायिक साझेदारों के बीच तनाव के योग. नौकरी में भी परेशानी के योग. कोई नया काम शुरू न करें.

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वृषभ राशि: चौथे के स्वामी छठे भाव में. चन्द्र से गोचर अच्छा लेकिन लग्न से अच्छा नहीं. माता या पिता को सेहत की तकलीफ. जमीन के मामले में मुकद्दमेबाजी संभव. इसलिए इस एक महीने जमीन-जायदाद के मामले को टाल दें.

मिथुन राशि: तीसरे का स्वामी पंचम भाव में. छात्र पढाई-लिखाई पर विशेष ध्यान दें. पराक्रमेश पंचमेश को हानि दे रहा है. इसलिए ज्यादा सक्रियता अच्छी बात नहीं. बुद्धि का नाश हो रहा है.

कर्क राशि: दूसरे भाव के स्वामी चौथे भाव में. आर्थिक दृष्टि से अच्छा. पैत्रिक संपत्ति में विवाद की संभावना या कुछ लोगों के पुराने विवाद सुलझने की भी संभावना. घर के मामलों में शांत रहे. कुछ लोगों को धन हानि की भी संभावना.

सिंह राशि: राशिश पराक्रम भाव में. चन्द्र से अच्छा गोचर लेकिन लग्न से उतना अच्छा नहीं. कम सक्रिय हों व एडवेंचर से बचें क्योंकि दुर्घटना के योग. लेकिन नौकरी में प्रमोशन या वेतन वृद्धि की सफलता के योग.

कन्या राशि: व्यय भाव के स्वामी दूसरे भाव में. अर्थ पर नजर रखें. गलत संगत से बचें. वाणी ख़राब होने से रिश्तों में दरार मुमकिन. या परिवार के सदस्यों के सेहत खराब हो सकती है.

तुला राशि: आय के स्वामी लग्न में. अपने सेहत का खास ध्यान रखें. ज्यादा काम न करें. दुश्मन ग्रह के योगों के कारण उत्पन्न अंहकार व क्रोध के कारण लडाई-झगड़ा के योग. फलतः मान-सम्मान प्रभावित होगा.

वृश्चिक: दसवें के स्वामी व्यय भाव में. विदेश से संबंधित जातकों के लिए शुभ. या दूर देश के भ्रमण के योग. मानसिक या पारिवारिक तनाव के योग. सरकार या उच्च अधिकारियों से से तनाव के योग. गुप्त शत्रु के हावी होने के योग.

धनु: भाग्य व रोग भाग के स्वामी आय भाव में. सबसे अच्छा योग. राज्य व् वरिष्ट अधिकारियों से लाभ. करियर में विस्तार. आय के नए स्रोत. अध्यात्म में झुकाव. तीर्थ यात्रा. पिता से लाभ के योग.

मकर राशि: अष्टम के स्वामी दसवें भाव में. (लग्न से) दफ्तर में सतर्क रहें. अपने काम से काम रखें. लेकिन इस राशि के लिए लाभदायक गोचर.

कुंभ राशि: सप्तम का स्वामी नौवें भाव में. चंद्र से खराब गोचर. जीवन साथी या साझेदार की राय पर पूरा विश्वास न करें. बल्कि उन मामलों में किसी और से राय भी लें.

मीन राशि: रोग के स्वामी आठवें में. विपरीत राज योग. इसलिए जन्म कुंडली में भी ये योग हो तो कुछ बड़ा लाभ संभव. लेकिन सामान्यतः मान-सम्मान पर आंच आ सकती है.

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