आज रविवार का सूर्यसिद्धान्तीय सूर्य पंचांग : दिनांक 14 अक्टूबर 2018

shubh muhurat and puja vidhi of surya uttarayan 2018 for india in hindi,

जय श्रीराधेकृष्ण!

-सूर्यसिद्धान्तीय
-(सूर्य पंचांग रायपुर)

-दिनांक 14
अक्टूबर 2018
-रविवार
-सूर्योदय 05:4325
-सूर्यास्त 05:20:52
-दक्षिणायन
-संवत् 2075
-शक् 1940
-ऋतु- शरद
-आश्विन मास
-शुक्ल पक्ष
-पंचमी तिथि 07:14:08
परं षष्ठी तिथि
-ज्येष्ठा नक्षत्र 14:57:07
परं मूल नक्षत्र
-सौभाग्य योग 09:40:46 परं शोभन योग
-प्रथम बालव करण 03:47
-द्वितिय कौलव करण 35:06
-राहुकाल-
17:01 / 18:30 अशुभ
-अभिजीत 11:42/ 12 :29 शुभ
-सूर्य- कन्या राशि
-चन्द्र- वृश्चिक राशि 14:57:07 परं धनुराशि

– स्कन्दमातादर्शनं
– पंचम दिवस
-ललिता पंचमी (उदया तिथि)
-उपांग ललिता 5 वीं व्रतं ( महाराष्ट्रे)
-पंचमी व्रतं ( वैष्णव निम्बार्क तीर्थे )
-अमृतयोग 07:13 या
-मूलेसरस्वत्यावहनं
-पूर्वाषाढ़ेकेतुः 45:58
-गण्डान्तः 8:33- 21:23
-ज्येष्ठा में राहुवेध।

-आश्विनीमासः
-नवरात्रि पर्व
-स्कन्दमातादर्शनम्

नवरात्रि महापर्व➖

या देवि! सर्वभूतेषु!
-नवरात्रि महापर्व, शक्ति आराधना, उपासना, साधना, का पर्व है ।इन्द्रियों के संयमन एवं आसुरी प्रवत्तियों पर नियंत्रण का यह पर्व है।
दुर्गादेवी की दिव्य शक्तियां समस्त विश्व में , समस्त सृष्टि में, समस्त ब्रह्माण्ड में व्याप्त हैं।देवी शक्ति के जितने भी अवतार हुये उन सभी देवियों ने किसी न किसी असुर का संहार कर जगत की रक्षा की है।

डाॅ गीता शर्मा, ज्योतिष मनीषी, कांकेर छत्तीसगढ।
(7974032722)

“सर्वस्वरूपे सर्वेशे सर्व शक्ति समन्विते।
भयेभ्यस्त्रहि नो देवी दुर्गे देवी नमोऽस्तुते।।”
क्रमशः——!
*क्षमा*➖
〰〰〰
क्षमा धर्मः क्षमा सत्यं क्षमा दानं क्षमा यशः।
क्षमा स्वर्गस्य सोपानमिति वेदविदो विदुः।।

अर्थात्-
क्षमा ही धर्म ह, क्षमा ही सत्य है और क्षमा ही दान,यश और स्वर्ग की सीढी है।क्षमा का विरोधी भाव क्रोध है।यह क्रोध दूसरे की कम अपनी स्वयं की अधिक हानि करता है।क्रोध पर विजय पाने पर ही क्षमा की प्रतिष्ठा होती है।

दान➖
〰〰
“अन्नदानं प्रधानं हि कौन्तेय परिचक्षते।
अन्नस्य हि प्रदानेन रन्तिदेवो दिवगंतः।।”
अर्थात्-
अन्नदान सब दानों में श्रेष्ट है।अन्नदान के पुण्य के कारण ही राजा रन्तिदेव को स्वर्गलोक की प्राप्ति हुई।

इसके अलावा अन्न व विभिन्न वस्तुओं के दान का भी बहुत महत्व हमारे शास्त्रोंमें बताया गया है।
जिसे लक्ष्मी की कृपा प्राप्त है,उसे धन का ज्यादा से ज्यादा अंश धर्मकार्य, यज्ञादि तथा सेवा-परोपकार में लगाने को तत्पर रहना चाहिये।

श्रीमद् भगवद् गीता➖
〰〰〰〰〰
विश्व में गीता का समादर है।भारत में प्रकट हुई गीता विश्व मनीषा की धरोहर है।
अतः इसे राष्ट्रीय शास्त्र का मान देकर कलह-कष्ट से पीड़ित विश्व की जनता को शान्ति देने का प्रयास आवश्यक है।

युधामन्युश्च विक्रान्त उत्तमौजाश्च वीर्यवान।
सौभद्रो द्रौपदेयाश्च सर्व एव महारथाः।।6।।
(प्र अ गीता )

अर्थात्➖
पराक्रमी “युधामन्यु”- युद्ध के अनुरूप मन की धारणा,
“उत्तमौजा”- शुभ की मस्ती, सुभद्रापुत्र अभिमन्यु-जब शुभ समाचार आ जाता है, तो मन भय से रहित हो जाता है-ऐसा शुभ आधार से उत्पन्न अभय मन, ध्यानरूपी द्रोपदी के पाँचों पुत्र- वात्सल्य लावण्य, सह्यदयता, सौम्यता,स्थिरता सब के सब महारथी हैं।साधना पथ पर सम्पूर्ण योग्यता के साथ चलने की क्षमतायें हैं।
क्रमश——–

“अस्माकं तु विशिष्टा ये तान्निबोध द्विजोत्तम।
नायका मम सैन्यस्य संज्ञार्थं तान्ब्रवीमि।।”
(प्र अ 7)
अर्थात्➖द्विजोत्तम!
हमारे पक्ष में जो जो प्रधान हैं, उन्हें भी आप समझ लें।आपको जानने के लिये मेरी सेनाके जो नायक हैं, उनको कहता हूं—–
क्रमशः

निज चिन्तन

“राह “संघर्ष” की जो “चलता” है——,
वही “इतिहास” बदलता है——,
जिसने “अंधकार” पर “विजय” पाई है——;
वही “सूर्य” बन “चमकता” है——!

(चलते रहिये)

श्रीकृष्णं शरणं ममः

डाॅ गीता शर्मा
माँ गायत्री ज्योतिष अनुसंधान केन्द्र, कांकेर, छत्तीसगढ

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Top
error: Content is protected !!