जय श्री महाकालेश्वर : सूर्यसिद्धांतीय दैनिक पंचांग 13 अगस्त 2018, सोमवार का पंचांग

lord vishnu

जय श्रीराधेकृष्ण

-सूर्यसिद्धान्तीय-
-(सूर्य पंचांग रायपुर)

-दिनांक 13 अगस्त 2018
-दिन सोमवार
-सूर्योदय 05:28:25
-सूर्यास्त 18:14:08
-दक्षिणायन
-संवत् 2075
-शक् 1940
-ॠतु- वर्षा
-श्रावण मास
-शुक्ल पक्ष
-द्वितिया तिथि 11:04:44 परं तृत्तिया तिथि
-पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र 22:52:35 परं उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र
-परिध योग 07:37:34 परं शिव योग 26:55:50
-प्रथम कौलव करण 14:01
-द्वितिय तैतिल करण 41:28
-राहुकाल-
07:31 / 09:01अशुभ
-अभिजीत 11:58 / 12 :51शुभ
-सूर्य- कर्क राशि
-चन्द्र- सिंह राशि 28:35:34 फ
परं कन्या राशि

-श्रावणसोमवार व्रतम्
-श्रंगार द्वितिया
-मधुश्रवा तृतिया
-हरियाली तीज
-दुर्गायात्रा
-गौरीपूजा
-मृत्युयोगः 11:04 या
-रवियोगः 22:52 या

डाॅ गीता शर्मा, ज्योतिष मनीषी, कांकेर छत्तीसगढ।
(7974032722)

-श्रावणमास
-पार्थिव शिवपूजन
(एक मास तक)
शाकत्यागव्रतं
-श्रीमहाकाल सवारी (उज्जैन)
-धर्मसम्राटस्वामीकरपात्री जी जयंती
-झूला प्रारम्भः श्री बांकेबिहारी जी ( वृन्दावन)
-वीर दुर्गादास राठौर जयंती
-जिल्हेज ( मु 12 प्रा )

श्रावणमास

“दुर्गेया शाम्भवी माया सर्वेषां प्राणिनामिह।
भक्तं विनार्पितात्मानं तया सम्मोह्यते जगत्।।”
(शि पु रू सृ 2/25)

-वास्तव में इस संसार के भीतर सभी प्राणियों के लिये शम्भू की माया को जानना अत्यन्त कठिन है।जिसने भगवान शिव के चरणों में अपने आपको समर्पित कर दिया है, उस भक्त को छोड़ कर शेष सारा जगत उनकी माया से मोहित हो जाता है।

“ध्यानयज्ञात्परं नास्ति ध्यानं ज्ञानस्य साधनम्।
यतः समरसं स्वेष्टं योगी ध्यानेन पश्यति।।”
(शिवपुराण रू सृ खं 12/46)

ध्यानयज्ञ से बढ़ कर कोई वस्तु नहीं।ध्यान ज्ञान का साधन है; क्योंकि योगी ध्यान के द्वारा अपने इष्टदेव समरस शिव का साक्षात्कार करता है।

ज्योतिष

जिनकी जन्म कुण्डली में सूर्य पापाक्रान्त, शत्रु राशिस्थ व नीच राशिगत होकर सप्तमस्थ होकर कुपित हो, उनका दाम्पत्य जीवन मधुर सरस सफल नहीं रह जाता। उन्हें सूर्य की उपासना करनी चाहिये ।

गाय, पितर, ब्राह्मणों की सेवा करने से सूर्यदेव
प्रसन्न होते हैं।उनकी उग्रता का शमन होता है।
आदित्य ह्रदयस्तोत्र का पाठ भी सूर्यदेव के कुप्रभाव को क्षीण करता है।

सूर्यपिता का कारक ग्रह है।जिसके गृह में पिता दुःखी बेबस हैं उन्हें सूर्य का क्रोध ( ताप) जला (दुःखी करता है) डालता है ।
अतः अपने वृद्ध माता पिता की सेवा करें।आपके सूर्य शीतल होंगे। दाम्पत्य- जीवन में आई बाधा दूर होगी।

सूर्य के मंत्र से सूर्य को जल अर्घ्य भी देना चाहिये।
सूर्य से आत्मा प्रतिष्ठा,मान-सम्मान तथा आरोग्यता आदि का भी विचार किया जाता है।आत्माकारक ग्रह सूर्य जातक-जातिका के आन्तरिक गुण, दोष , शक्ति, चालचलन एवं उच्च अभिलाषा का भी बोध कराता है।सूर्य राजकीय शासकीय सेवा से भी जोड़ता है।

निज चिन्तन

“जिस “त्याग” से “अभिमान” उत्पन्न हो —-,
वह “त्याग” नहीं—–,
“त्याग” से “शान्ति” मिलनी चाहिये—-,
अन्ततः “अभिमान” का “त्याग” ही—-,
“सच्चा” “त्याग” है—–!

(चलते रहिये)

श्रीकृष्णं शरणं ममः

डाॅ. गीता शर्मा , ज्योतिष मनीषी,

माँ गायत्री ज्योतिष अनुसंधान केन्द्र, कांकेर,छत्तीसगढ

(7974032722)

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