100 वर्ष हो गए नश्वर देह त्यागे… फिर भी सारी दुनिया मुरीद होती जा रही है साईं की….

स्वप्निल व्यास @ इंदौर. सचमुच कौन हैं साईं. कभी सोचा है क्यों लगातार बढ़ती जा रही है इनके भक्तों की कतार. ऐसा क्या है साईं में कि जो भी शिरडी जाता है, साईं का ही होकर रह जाता है. आखिर क्या है साईं नाम की महिमा साईं बाबा के भक्त उन्हें साक्षात भगवान का ही अवतार मानते हैं।  उन्होंने अपने जीवन में कई असंभव चमत्कार दिखाए थे जिन्हें देख कर लोग हतप्रभ हो गए थे। साईं बाबा ने अपने जीवन भर मानव मात्र की सेवा तथा कल्याण करने का ही आदेश दिया था
लेखक स्वप्निल व्यास, इंदौर
जैसे पर्वतों में हिमालय श्रेष्ठ है वैसे ही संतों में श्रेष्ठ हैं सांई। सांई नाम के आगे ‘थे’ लगाना उचित नहीं, क्योंकि सांई आज भी हमारे बीच हैं। बस, एक बार उनकी शरण में होना जरूरी है, तब वे आपके आसपास होंगे। यह अनुभूत सत्य है। बाबा के बारे में कहा जाता है कि यदि उनके प्रति आप भक्ति की भावना से भरकर उनकी समाधि पर माथा टेकेंगे तो आपकी किसी भी प्रकार की समस्या हो, उसका तुरंत ही समाधान होगा। जब सांईंबाबा आपकी भक्ति को कबूल कर लेते हैं, तो आपको इस बात की किसी न किसी रूप में सूचना भी दे देते हैं। सांईं न हिन्दू हैं और न मुसलमान, वे सिर्फ अपने भक्तों के दु:ख-दर्द दूर करने वाले बाबा हैं। सांईं बाबा का स्पष्ट संदेश है कि यदि तुम मेरी ओर देखोगे तो मैं तुम्हारी ओर देखूंगा। मेरे भक्त को जीवन में किसी भी प्रकार का कष्ट नहीं होने दूंगा।
अपने भक्तों के कष्ट दूर करना कोई चमत्कार नहीं है, लेकिन उनके भक्त इसे चमत्कार ही मानते हैं। सांईंबाबा ने अपने जीवनकाल में कई ऐसे चमत्कार दिखाए जिससे कुछ लोगों ने उनको राम का अंश जाना तो ‍कुछ ने श्याम का। सांईं के 11 वचनों के अनुसार वे आज भी अपने भक्तों की सेवा के लिए तुरंत ही उपलब्ध हो जाते हैं।
आखिर में ना ऊँच नीच में रहूँ ना जात पात में रहूँ,
रहे तू मेरे दिल में साईं और मैं औकात में रहूँ,
हर रज़ा तेरी मुझे क़ुबूल हो हमेशा दिल से,
शुकराना करता रहूँ तेरा, चाहे किसी हालात में रहूँ!
ओम साईं राम!

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