जय शनि देव : शनिवार का पंचांग, 18 अगस्त 2018 का क्या है शुभ मुहूर्त

जय श्रीराधेकृष्ण
-सूर्यसिद्धान्तीय
-(सूर्य पंचांग रायपुर)
-दिनांक 18 अगस्त 2018
-दिन शनिवार
-सूर्योदय 05:29:54
-सूर्यास्त 18:10:45
-दक्षिणायन
-संवत् 2075
-शक् 1940
-ॠतु- वर्षा
-श्रावण मास
-शुक्ल पक्ष
-अष्टमी तिथि 29:03:05 परं नवमी तिथि
 -विशाखा नक्षत्र 21:41:26 परं अनुराधा नक्षत्र
– ब्रह्म योग 20:00:39 परं ऐन्द्र योग
-प्रथम विष्टी करण 28:33
-द्वितिय बव करण 58:53
-राहुकाल-
09/01- 10:31अशुभ
-अभिजीत 11:57 / 12 :49 शुभ
-सूर्य- सिंह राशि
-चन्द्र- तुला राशि 15:28:37 परं वृश्चिक राशि
-श्रीदुर्गाष्टमी 8
-भद्रान्तः16:55
-मृत्युबाण 14:09 उ
– भद्रोत्तर विशाखा में-
नीलकृष्णवस्त्ररत्नादिधारण मुहूर्त।
-श्रावणमास
-पार्थिव शिवपूजन
( एक मास तक)
-शाकत्यागव्रतं
डाॅ गीता शर्मा, ज्योतिष मनीषी, कांकेर छत्तीसगढ।
(7974032722)

श्रावणमास

“भक्तौ ज्ञाने न भेदो हि तत्कर्तुः सर्वदा सुखम।
विज्ञानं न भवत्येव सति भक्तिविरोधिनः।।”
अर्थात् – भक्ति और ज्ञान में कोई भेद नहीं ।भक्त व ज्ञानी दोंनो को ही सदा सुख प्राप्त होता है।जो भक्ति का विरोधी है, उसे ज्ञान की प्राप्ति नहीं हो सकती।
“क्षमा ब्रह्म क्षमा सत्यं क्षमा भूतं च भावि च।
क्षमा तपः क्षमा शौचं क्षमयेदं धृतं जगत्।।”
अर्थात क्षमा ब्रह्म है, क्षमा यज्ञ है,क्षमा वेद हैऔर क्षमा शास्त्र है।जो इस प्रकार जानता है, वह सब कुछ क्षमा करने योग्य हो जाता है।क्षमा ब्रह्म है, क्षमा सत्य है, क्षमा भूत है, क्षमा भविष्य है, क्षमा तप है और क्षमा शौच है। क्षमा ने ही सम्पूर्ण जगत् को धारण कर रखा है।
“भवाय भवनाशाय महादेवाय धीमहि।
उग्राय उग्रनाशाय शर्वाय शशिमौलिने।।” (शि पु 20/43)
उक्तमंत्र द्वारा विद्वान उपासक भगवान शंकर की पूजा करें।यह भ्रम छोड़कर उत्तम भाव- भक्ति से शिव की अराधना करें; क्योंकि भगवान शिव भक्ति से ही मनोवांच्छित फल देते हैं।
“दुर्गेया शाम्भवी माया सर्वेषां प्राणिनामिह।
भक्तं विनार्पितात्मानं तया सम्मोह्यते जगत्।।”
 (शि पु रू सृ 2/25)

ज्योतिष शनि

नवग्रहों में अपने अनुग्रह तथा विग्रह की बहुमुखी स्थितियोंके लिये शनि पर्याप्त प्रसिद्ध हैं।मंगल अपनी दशा में एक बार ही मारता है किन्तु शनि की भोष्णता जातकों को स्मरणमात्र से आतंकित  प्रकंपित कर देती है।
ब्रह्मा, विष्णु महेश सप्तॠषि इन्द्रादि देवता भी शनि की दृष्टि निक्षेप से पद विगलित हुये ।वैज्ञानिको ने इसे नील नीलय का सुन्दरतम ग्रहस्वीकार किया शनि के सौंदर्य पर वैज्ञानिक मुग्ध हैं।इन्हें आकाश में निहारने से मन को शान्ति मिलती है।शनि के तीन वलय इसकी सुन्दरता को बढ़ाते हैं।ये वलय दस मील मोटे और काफी चौड़ हैं।ये दुरबीन से दिखाई पड़ते हैं।
 किन्तु शनि का प्रभाव जीवन पर पड़ता ही है।कृपालु हो जाने पर धन, यश, वैभव सभी कुछ देता है तथा रूष्ट हो जाने पर राजा को भी रास्ते का भिखारी बना देता है।शनि की क्रूर दृष्टि का प्रभाव सर्वविदित है इससे आक्रान्त व्यक्ति अभिशापों की श्रंखला से आबद्ध हो जाता है।इसके छणिक कुप्रभाव से ही शारीरिक कष्ट, धन हानि,अपयश, कार्यावरोध, पलायन, निष्कासन, कारावास, दरिद्रता,मतिभ्रम,शत्रुभय आदि अनेक त्रासद स्थितियां व्यक्ति के समक्ष आ खड़ी होती हैं, और यदि पूर्णतया कुपित हो जाये तो सब कुछ हाथ से निकल जाता है।जन्मकुण्डली में अन्य शुभ ग्रह भी हों तो भी शनि का संत्रास भोगना पड़ता है।
और शनि को शान्त प्रसन्न एवं अनुकूल करने के निमित्त मंत्र हवन अनुष्ठान आदि का सहारा लेना ही पड़ता है।
हनुमत उपासना,शिव उपासना, सूर्य उपासना द्वारा शनि को प्रसन्न अवश्य करना चाहिये। ज्योतिर्विद से सलाह ले अनुष्ठान द्वारा आप शनि को प्रसन्न कर, कष्टों को किसी हद तक क्षीण कर सकते हैं।
निज चिन्तन
“जिन्दगी” में कई “मुश्किलें” आती हैं—-,
और “इंशान” इनसे “घबरा” जाता है—-?
पर ना जाने कैसे “हजारों” “काँटों” के “बीच” रह कर भी—-,
“फूल” मुस्कुराता है—–?
 (चलते रहिये)
श्रीकृष्णं शरणं ममः
डाॅ गीता शर्मा , ज्योतिष मनीषी, 
माँ गायत्री ज्योतिष अनुसंधान केन्द्र, कांकेर,छत्तीसगढ
(7974032722)

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