Home धार्मिक स्थल Mystery Of Mahakaleshwar : अवंतिका जहां के राजा हैं महाकाल

Mystery Of Mahakaleshwar : अवंतिका जहां के राजा हैं महाकाल

उज्जैन. उज्जैन को बाबा महाकाल (Mystery Of Mahakaleshwar ) की नगरी होने का गौरव प्राप्त है. जिसे पहले अवंतिका के नाम से जाना जाता था. शिप्रा नदी के किनारे बसा उज्जैन शहर मंदिरों का शहर भी कहा जाता है. सदियों से नगरी बाबा महाकाल की नगरी के तौर पर जानी जाती रही है. वर्तमान के उज्जैन को अलग-अलग सालों में अलग-अलग नामों के नाम से जाना जाता रहा है. कनकश्रृंगा, कुशस्थली, भोगस्थली, अमरावती जैसे कई नामों से उज्जैन को जाना जाता था.

king of ujjain
उज्जैन के राजा

उज्जैन को बाबा महाकाल की नगरी होने का गौरव प्राप्त है लेकिन इसके अलावा भी ये धरा कई रहस्यों को अपने अंतस में समेटे बैठी है. ऐसा माना जाता है कि पृथ्वी और आकाश का केंद्र बिंदु उज्जैन ही है. (Mystery Of Mahakaleshwar ) उज्जैन ही वो जगह हैं जहां से ब्राह्मांड के समय की गणना की जाती है. महाकाल की नगरी समय का केंद्र है.

महाकाल मंदिर 12 ज्योतिर्लिंग में चौथे नबंर पर आता है जहां भगवान शिव (lord shiva ) महाकाल के रूप में विराजमान हैं. बाबा महाकाल तीनों लोक के स्वामी हैं, हिंदु धर्म के कई शास्त्रों में इस बात का उल्लेख मिलता है कि समय का चक्र बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन से चलता है पृथ्वी का अपनी धुरी पर घूमना हो या चंद्रमा का पृश्वी की परिक्रमा करना सारी क्रियाएं बाबा महाकाल को साक्षी मानकर ही होती हैं.

महाकाल मंदिर इकलौता ऐसा मंदिर है जहां भगवान शिव का भस्म से श्रंगार किया जाता है यहां की भस्म आरती दूर-दूर तक प्रसिद्ध है. बाबा महाकाल (Mystery Of Mahakaleshwar ) को भस्म बेहद प्रिय है, भस्म का संबंध माता सती से है. पुराणों में सात शहरों को मोक्ष देने वाली जगह बताया गया है. उन सात शहरों में उज्जैन का नाम भी शामिल है. उज्जैन की धरा मोक्ष देने वाली है. बाबा महाकाल की नगरी कुंभ भूमि के तौर पर भी जानी जाती है. बाबा महाकाल काल के भी स्वामी हैं. जिस व्यक्ति पर बाबा महाकाल की कृपा होती है उसका बाल भी बांका नहीं हो सकता है.

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उज्जैन नगरी के बारे में आपने ये बात भी जरूर सुनी होगी की यहां कोई जनप्रतिनिधि, सीएम, पीएम या कोई भी ऊंची पदवी वाला व्यक्ति रात नहीं गुजार सकता, उज्जैन के राजा केवल बाबा महाकाल हैं. यदि यहां कोई रात गुजारता है तो उसे अपने पद से इस्तीफा देना पड़ता है इसके कई उदाहरण देखे गए हैं. (Mystery Of Mahakaleshwar ) कांलातर में उज्जैन राजा विक्रमादित्य की नगरी हुआ करती थी. राजा विक्रमादित्य के बाद यहां कोई ऐसा राजा नहीं हुआ जिसने उज्जैन में रात बिताई हो. महाकाल मंदिर इकलौता ऐसा ज्योतिर्लिंग है जो दक्षिणमुखी है. दक्षिण दिशा यमराज की मानी जाती है. और बाबा महाकाल काल को नियंत्रित करने वाले माने जाते हैं. इस मंदिर से कई मान्यताएं जुड़ी हुई हैं. उज्जैन शहर में बाबा महाकाल के अलावा भी कई मंदिर मौजूद हैं. चिंतामन गणेश, हरसिद्धि मंदिर, कालभैरव मंदिर, मंगलनाथ मंदिर उज्जैन भगवान कृष्ण की शिक्षा भूमि भी रही है.

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मृत्युंजय महाकाल (mahamrityunjay mantra) की आराधना का मृत्यु शैया पर पड़े व्यक्ति को बचाने में विशेष महत्व है. खासकर तब जब व्यक्ति अकाल मृत्यु का शिकार होने वाला हो. इस हेतु एक विशेष जाप से भगवान महाकाल का लक्षार्चन अभिषेक किया जाता है-

‘ॐ ह्रीं जूं सः भूर्भुवः स्वः,
ॐ त्र्यम्बकं स्यजा महे
सुगन्धिम्पुष्टिवर्द्धनम्‌।
उर्व्वारूकमिव बंधनान्नमृत्योर्म्मुक्षीयमामृतात्‌
ॐ स्वः भुवः भूः ॐ सः जूं हौं ॐ’

इसी तरह सर्वव्याधि निवारण हेतु इस मंत्र का जाप किया जाता है।

ॐ मृत्युंजय महादेव त्राहिमां शरणागतम
जन्म मृत्यु जरा व्याधि पीड़ितं कर्म बंधनः

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