Home धर्म कथाएं जानिए किन औषधियों को माना गया है नवदुर्गा का स्वरूप

जानिए किन औषधियों को माना गया है नवदुर्गा का स्वरूप

नवदुर्गा का अर्थ होता है मां दुर्गा के नवरूप, आज हम आपको ऐसी नौ औषधियों को बारे में बताएंगे जिनमें मां दुर्गा के नौ रूप विद्यमान होते हैं. (chaitra navratri 2021) मां दुर्गा के नौ औषधी रूपों के बारे में मार्कण्डेय चिकित्सा पद्धति में उल्लेख मिलता है. भगवान ब्रह्मा ने इसके रहस्य को दुर्गाकवच में बताया है. मां दुर्गा के ये नौ औषधी रूप भक्तों को रोगों से बचाते हैं व लोगों को रोगों से लड़ने की शक्ति प्रदान करते हैं. मां दुर्गा का स्वरूप माने जाने वाली ये औषधियां लोगों की रक्षा करने के लिए एक कवच की तरह काम करती हैं इसलिए इसे दुर्गा कवच कहा जाता है. इनके प्रयोग से व्यक्ति अकाल मृत्यु को भी टाल सकता है और अपनी पूरी उम्र जीता है. chaitra navratri 2021

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आइए जानते हैं 9 गुणों वाले नवदुर्गा औषधियों को बारे में chaitra navratri 2021

1 शैलपुत्री यानि हरड़ – मां दुर्गा का पहला स्वरूप शैलपुत्री को माना जाता है. हरड़ को मां शैलपुत्री का रूप माना जाता है. हरड़ एक ऐसी औषधी है जिसका प्रयोग कई समस्याओं में किया जाता है. हरड़ एक आयुर्वेदिक औषधी है जिसे हिमावती के नाम से भी जाना जाता है जो सात प्रकार की होती है.

 

हरीतिका- भय को हरने वाली

पथया – हित करने वाली

कायस्थ – शरीर बनाए रखने वाली

अमृता – अमृत के समान

हेमवती – हिमालय पर मिलने वाली

चेतकी – चित्त को प्रसन्न करने वाली

श्रेयसी (यशदाता) शिवा – कल्याण करने वाली

  1. ब्रह्मचारिणी- मां दुर्गा का दूसरा स्वरूप है ब्रह्मचारिणी. जिसे ब्राह्मी के रूप में जाना जाता है. यह औषधी आयु और स्मरण शक्ति को बढ़ाती है, रूधिर विकारों को दूर करती है, वाणी में मधुरता घोलती है, ब्राह्मी को सरस्वती के नाम से भी जाना जाता है. गैस व मूत्र से संबंधित बीमारियों में ये दवा के रूप में प्रयोग की जाती है. मन और मस्तिष्क को शक्ति प्रदान करने के लिए भी इसे प्रयोग करते हैं. मूत्र के विकारों को शरीर से बाहर निकालने के लिए ब्राह्मी का प्रयोग किया जाता है. इस रोग से पीड़ित व्यक्तियों को मां ब्रह्मचारिणी की आराधना करनी चाहिए.
  2. चंद्रघंटा- मां दुर्गा का तीसरा स्वरूप चंद्रघंटा के नाम से जाना जाता है, औषधियों को रूप में इसे चंदुसूर कहते हैं. ये पौधा धनिए के जैसा दिखाई देता है. इस पौधे की पत्तियों की लोग सब्जी बनाते हैं, जो लोग मोटापे की समस्या से परेशान रहते हैं उनको इसके सेवन से लाभ मिलता है. इसे चर्महन्ती के नाम से भी जानते हैं. चंद्रिका औषधी के उपयोग से ह्रदय की बीमारी में आराम मिलता है वहीं इसके प्रयोग से शक्ती भी बढ़ती है. जो लोग इन बीमारियों से पीड़ित होते हैं उन्हें मां दुर्गा के चंद्रघंटा स्वरूप की आराधना करनी चाहिए.

  1. कुष्मांडा- मां दुर्गा का चौथा स्वरूप मां कुष्मांडा है औषधी के रूप में इसे पेठा कहते हैं जो कि एक प्रकार का मिष्ठान होता है. ये मिठाई कुम्हड़े से बनती है कुम्हड़ा स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होता है इसकी सब्जी भी बनाई जाती है. जो पुष्टिकारण, रक्त के विकारों को खत्म करने वाली व वीर्यवर्धक होती है. कुम्हड़े के प्रयोग से पेट भी साफ होता है. जो लोग मानसिक रूप से कमजोर होते हैं इसका प्रयोग करने से उन लोगों को अमृत तुल्य लाभ होता है. कुम्हड़ा शरीर के सभी विकारों को दूर करने की क्षमता रखता है. गैस की समस्याओं से निजात पाने के लिए इसका प्रयोग किया जा  सकता है, इन समस्याओं से पीड़ित व्यक्ति को मां कुष्मांडा की आराधना करनी चाहिए.

5 स्कंदमाता- मां दुर्गा का पांचवा स्वरूप स्कंदमाता के नाम से जाना जाता है. औषधी के रूप में अलसी मां का रूप है. यह वात, पित्त, कफ जैसे रोगों का नाश करने वाली औषधी है.

  1. कात्यायनी – मां दुर्गा का छटवां स्वरूप कात्यायनी है. इसे आयुर्वेद में अम्बा, अम्बालिका, अम्बिका और मोइया जैसे नामों से जाना जाता है. कफ, पित्त, अधिक विकार एवं कंठ के रोगों से पीड़ित व्यक्ति को इसके प्रयोग से लाभ होता है.
  2. कालरात्रि- मां दुर्गा का सातवां स्वरूप कालरात्रि है जिसे नागदौन औषधि के रूप में जाना जाता है. इस औषधी का प्रयोग सभी प्रकार के रोगों में किया जाता है ये एक विजय दिलाने वाली औषधी है. इसे घर में लगाने से व्यक्ति को सभी समस्याओं से छुटकारा मिलता है.
  3. महागौरी– मां दुर्गा का 8वां रूप महागौरी है. औषधी के रूप में ये तुलसी है. तुलसी के सात प्रकार होते हैं. तुलसी सभी रोगों का नाश करती है इसके सेवन से रक्त साफ होता है.

9 सिद्धिदात्री – मां दुर्गा का नवमां स्वरूप सिद्धिदात्री कहलाता है. औषधी के रूप में इसे शतावरी या नारायणी भी कहते हैं. शतावरी का प्रयोग बुद्धि बल एवं वीर्य के लिए उत्तम होता है. यह रक्त विकार और वात पित्त शोध नाशक होती है व हृदय को बल देती है. इसे महाऔषधि भी कहते हैं.

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