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नवरात्रि में देवी मां के 16 श्रृंगार, महिलाएं भी ऐसे होती हैं तैयार

शारदीय नवरात्रि का त्योहार मां शक्ति के भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है। कहते हैं इन 9 दिनों में मां की सच्चे मन से आराधना करने से जीवन के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। इस साल शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 07 अक्टूबर से 15 अक्टूबर तक चलेगी। इन 9 दिनों में श्रद्धालु उपवास रखते हैं और माता के दर्शन के लिए मंदिरों में जाकर सुख-शांति और समृद्धि की कामना करते हैं। पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान जयपुर – जोधपुर के निदेशक ज्योतिषाचार्य अनीष व्यास ने बताया कि वहीं इस समय माता की पूजा के लिए देवी मां का 16 श्रृंगार किया जाता है। नवरात्रि के पर्व पर महिलाएं भी देवी मां की पूजा के लिए खूब सज धज कर तैयार होती हैं । नवरात्रि में महिलाएं भी मां को खुश करने के लिए सोलह श्रृंगार करती हैं ।

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अनीष व्यास, विश्वविख्यात भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक, पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान, जयपुर 9460872809

आइए विश्वविख्यात भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक अनीष व्यास से जानते हैं देवी मां के 16 श्रृंगार ।

फूलों का श्रृंगार
सोलह श्रृंगार में फूलों से श्रृंगार करना शुभ माना जाता है। फूलों की महक मन को ताजगी प्रदान करती है। ऐसे में महिलाएं मां को भी फूलों से सजाती हैं और खुद भी फूलों का श्रृंगार करती हैं ।.

बिंदी
कहते हैं माथे पर सिंदूर का टीका या बिंदी लगाने से शरीर में पॉजिटिविटी का संचार होता है। इससे मानसिक शांति भी मिलती है। इस दिन चंदन का भी टीका लगाया जाता है। महिलाएं मां शक्ति को सिंदूर का टीका लगाने के साथ साथ खुद भी बिंदी लगाती हैं। ये 16 श्रृंगार का एक अहम हिस्सा है।

मेहंदी
सुहागिन महिलाओं में किसी भी त्योहार पर मेहंदी लगाने की परंपरा है। पूजा-पाठ के समय महिलाएं हाथों में मेहंदी लगाती हैं। ये सोलह श्रृंगार के प्रमुख श्रृंगार में से एक है। मेहंदी शरीर को शीतलता प्रदान करती है और त्वचा संबंधी रोगों को दूर करती है।

मांग में सिंदूर
मांग में सिंदूर लगाना सुहाग की निशानी है। वहीं सिंदूर लगाने से चेहरे पर निखार आता है. इसके अपने वैज्ञानिक फायदे भी होते है। मान्यता है कि मांग में सिंदूर लगाने से शरीर में विद्युत ऊर्जा को नियंत्रित करने में भी मदद मिलती है।

गले में मंगल सूत्र
मोती और स्वर्ण से युक्त मंगल सूत्र या हार पहनने से ग्रहों की नकारात्मक ऊर्जा को रोकने में मदद मिलती है। कहते हैं कि इससे रोग प्रतिरोधक क्षमता में भी वृद्धि होती है। गले में स्वर्ण आभूषण पहनने से हृदय रोग संबंधी रोग नहीं होते है। हृदय की धड़कन नियंत्रित रहती है। वहीं मोती चंद्रमा का प्रतिनिधित्व करते है। इससे मन चंचल नहीं होता है। नवरात्रि के समय मां को आभूषण पहनाएं जाते हैं और महिलाएं भी ज्वैलरी पहनती है।

कानों में कुंडल
मान्यता है कि कान में आभूषण या बाली पहनने से मानसिक तनाव नहीं होता है। कर्ण छेदन से आंखों की रोशनी तेज होती है। यह सिर का दर्द कम करने में भी सहायक होता है।

माथे पर स्वर्ण टिका
माथे पर स्वर्ण टिका महिलाओं की सुंदरता बढ़ाता है।

कंगन या चूड़ियां
कहते हैं कि हाथों में कंगन या चूड़ियां पहनने से रक्त का संचार ठीक रहता है। इससे थकान नहीं होती है। साथ ही यह हॉर्मोंस को भी बैलेंस्ड रखता है।

बाजूबंद
इसे पहनने से भुजाओं में रक्त प्रवाह ठीक बना रहता है। कहते हैं कि इससे दर्द से मुक्ति मिलती है। वहीं इससे सुंदरता में निखार आता है।

कमरबंद
मान्यता है कि इसे पहनने से पेट संबंधी दिक्क्तें कम होती है। कई बीमारियों से बचाव होता है।

पायल
पायल पैरों की सुंदरता में चार चांद लगाती है। वहीं इनको पहनने से पैरों से निकलने वाली शारीरिक विद्युत ऊर्जा शरीर में संरक्षित होती है। कहते हैं कि चांदी की पायल पैरों की हड्डियों को मजबूत बनाती है।

बिछिया
बिछिया को सुहाग की एक प्रमुख निशानी के तौर पर माना जाता है लेकिन इसका प्रयोग पैरों की सुंदरता तक ही सीमित नहीं है। बिछिया नर्वस सिस्टम और मांसपेशियां को मजबूत बनाए रखने में भी मददगार होती है।

नथनी
नथनी चेहरे की सुंदरता में चार चांद लगाती है। यह एक प्रमुख श्रृंगार है लेकिन इसका वैज्ञानिक महत्व भी है। नाक में स्वर्ण का तार या आभूषण पहनने से महिलाओं में दर्द सहन करने की क्षमता बढ़ती है।

अंगूठी
अंगूठी पहनने से रक्त का संचार शरीर में सही बना रहता है। इससे हाथों की सुंदरता बढ़ती है। इससे पहनने से आलस कम आता है।

काजल
कहते हैं कि काजल आंखों की सुरंदता को बढ़ाता है। वहीं आंखों की रोशनी भी तेज करने में सहायक होता है। इससे नेत्र संबंधी रोग दूर होते है।

मेकअप
फेस पर ब्यूटी प्रोडक्ट्स लगाने से चेहरे की सुंदरता बढ़ती है। है. वहीं इससे महिलाओं के आत्मविश्वास में वृद्धि होती है और उनमें एनर्जी बनी रहती है।

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