मां महामाया देवी का प्रसिद्ध तंत्र स्थल, जहां जागृत अवस्था में हैं दो भैरवनाथ!

amazing Bhairavnath in rajrajeshwari maa mahamaya devi mandir raipur chhattisgarh

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रायपुर. छत्तीसगढ़ के रायपुर में देश का इकलौता मंदिर हैं, जहां दो भैरव बाबा जागृत अवस्था में हैं। तांत्रिक पद्धति से बने मां महामाया देवी मंदिर की महिमा निराली हैं। यहां भैरवनाथ जागृत अवस्था में होने से तुरंत परिणाम प्रस्तुत करते हैं। यहां के चमत्कार दशकों से मश्हूर हैं। श्री महामाया देवी मंदिर में प्रवेश के दौरान दोनों ओर भैरवनाथ मंदिर बने हुए हैं। यहां श्री काल भैरवनाथ बाबा और श्री बटुक भैरवनाथ बाबा के दर्शन कर सकते हैं। देशभर में सिर्फ यही मंदिर हैं, जहां दो भैरव नाथ एक साथ दर्शन देते हैं।




मंदिर के पुजारी पंडित मनोज शुक्ला कहते हैं कि मंदिर की कलाकारी से सरकारी अफसर अंदाजा लगाते हैं कि मंदिर 8 वीं शाताब्दी का करीब 1300 साल पुराना मंदिर हैं।

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बाबा देते हैं तत्काल परिणाम (tantra sadhana in hindi )

मंदिर के पुजारी पंडित मनोज शुक्ला कहते हैं कि यहां सिद्ध तांत्रिक स्थल होने से यहां दोनों भैरवनाथ जागृत अवस्था में हैं। भैरवनाथ तुरंत प्रमाण देते हैं। लेकिन तंत्र साधना गृहस्थ लोगों को नहीं करनी चाहिए। गृहस्थ लोगों को केवल सच्चे मन से ध्यान करना चाहिए और बाबा के दर्शन करने चाहिए, मात्र इतने में ही बाबा फल देते हैं।


राजाओं की कुलदेवी है मां

यह मंदिर है है वंश के राजा मोरध्वज खास तांत्रिक विधि से बनवाया था। है है वंश के राजाओं की माता कुलदेवी है। इस तरह राजवंश ने पूरी छत्तीस मंदिरों का निर्माण करवाया था, यह मंदिर राजाओं के किलों के पास स्थित है।

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पंडित शुक्ला बताते हैं कि मां के चरणों में जो भी भक्त सच्ची आस्था से मनोकामना मांगता है, वह पूरी जरूर पूरी होती है। यह देश का पहला ऐसा मंदिर है जहां दो भगवान भैरव स्वरूप दो मंदिर हैं।

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(छत्तीसगढ़ के रायपुर में देश का इकलौता मंदिर, जहां जागृत अवस्था में हैं दो भैरवनाथ)

मां ने राजा से कहा था मुझे मंदिर ले चलो

स्वयं महामाया देवी मां ने राजा से कहा था मुझे मंदिर ले चलो। राजा मोरध्वज अपनी सेना के साथ खारुन नदी के तट पर महादेव घाट पर रात्रि विश्राम के लिए ठहरे। यहां सुबह रानी नदी में नहाने गईं तो उन्हें कई सांप दिखे। तत्काल राजा को सूचित किया गया। राजा ने आकर देखा तो मां की प्रतिमा दिखी। राजा से मा ने कहा कि मैं यहीं रहना चाहती हूं। मेरे रहने का इंतजाम किया जाए।



मां ने राजा से यह भी कह दिया था कि तुम्हारे उठाने के बाद मुझे कहीं रख दिया तो मैं वहीं स्थापित हो जाउंगी। राजा ने पुरानी बस्ती में निर्माणाधीन मंदिर में के गर्भगृह में मां की मूर्ति को स्थापित कर दिया। मूर्ति रखने का स्थान बन रहा था, इसलिए मां की प्रतिमा को राजा ने पास में ही रख दिया, इसके बाद कोई मां की प्रतिमा को आज तक तय स्थान पर नहीं रख पाया। इससे एक खास चमत्कार भी देखा जाता है। मां के मंदिर में प्रतिमा के दोनों ओर खिड़कियां हैं, इन खिड़कियों में एक ही खिड़की से मां को देखा जा सकता है।

 

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