जय वीर हनुमान : मंगलवार का पंचांग, दिनांक 9 अक्टूबर 2018 का सूर्यसिद्धान्तीय पंचांग

जय श्रीराधेकृष्ण!
-सूर्यसिद्धान्तीय
-(सूर्य पंचांग रायपुर)
-दिनांक 9 अक्टूबर 2018
-दिन-मंगलवार
-सूर्योदय 05:41:58
-सूर्यास्त 05:25:05
-दक्षिणायन
-संवत् 2075
-शक् 1940
-ऋतु- शरद
-आश्विन मास
-कृष्ण पक्ष

डाॅ गीता शर्मा, ज्योतिष मनीषी, कांकेर छत्तीसगढ।
(7974032722)

-अमावस्या 08:46:33 परं प्रतिपदा तिथि
– हस्त नक्षत्र 12:41:58 परं चित्रा नक्षत्र
– ऐन्द्र योग 16:06:25 परं वैधृति योग
-प्रथम नाग करण 07:41
-द्वितिय किंस्तुघ्न करण 36:00
-राहुकाल-15:31 / 17:01 अशुभ
-अभिजीत 11:43/ 12 :31 शुभ
-सूर्य- कन्या राशि
-चन्द्र- कन्या राशि 24:24:33 परं तुला राशि
-मातामह श्राद्ध ( नाना का श्राद्ध)
-दौहित्रकृत मातामह श्राद्ध
-भौमवती अमावस्या
-स्नानदानश्राद्धादौ पुण्यतमा
-स्वात्यांबुधः 08:32
-चित्रायांशुक्रः 09:59
-हस्त में- सूर्ययुति
-भाद्रपदमास
-दुग्धमाश्विन त्यजेत्
-महाविष्णु प्रीत्यर्थ ब्राह्मणभोजनं

क्षमा
क्षमा धर्मः क्षमा सत्यं क्षमा दानं क्षमा यशः।
क्षमा स्वर्गस्य सोपानमिति वेदविदो विदुः।।

अर्थात्-
क्षमा ही धर्म ह, क्षमा ही सत्य है और क्षमा ही दान,यश और स्वर्ग की सीढी है।क्षमा का विरोधी भाव क्रोध है।यह क्रोध दूसरे की कम अपनी स्वयं की अधिक हानि करता है।क्रोध पर विजय पाने पर ही क्षमा की प्रतिष्ठा होती है।

दान
“अन्नदानं प्रधानं हि कौन्तेय परिचक्षते।
अन्नस्य हि प्रदानेन रन्तिदेवो दिवगंतः।।”
अर्थात्-
अन्नदान सब दानों में श्रेष्ट है।अन्नदान के पुण्य के कारण ही राजा रन्तिदेव को स्वर्गलोक की प्राप्ति हुई।

इसके अलावा अन्न व विभिन्न वस्तुओं के दान का भी बहुत महत्व हमारे शास्त्रोंमें बताया गया है।
जिसे लक्ष्मी की कृपा प्राप्त है,उसे धन का ज्यादा से ज्यादा अंश धर्मकार्य, यज्ञादि तथा सेवा-परोपकार में लगाने को तत्पर रहना चाहिये।

श्रीमद् भगवद् गीता
विश्व में गीता का समादर है।भारत में प्रकट हुई गीता विश्व मनीषा की धरोहर है।
अतः इसे राष्ट्रीय शास्त्र का मान देकर भेदभाव तथा कष्ट से पीड़ित मानवता को सम्पूर्ण शान्ति देने का प्रयास करें।
आगे—-
-गीता-(प्र अ 5)

“धृष्टकेतुश्चेकितानः काशिराजश्च वीर्यवान।
पुरूजित्कुन्तिभोजश्च शैब्यश्च नरपुगंवः।।”

अर्थात्

-धृष्टकेतु”- दृढ़कर्त्तव्य
-चेकितानः- जहां भी जाय, वहां से चित्त को खींचकर इष्ट में स्थिर करना,
-काशिराज- कायारूपी काशी में ही वह साम्राज्य है,
-पुरूजित्- स्थूल, सूक्ष्म और कारण व
शरीरों पर विजय दिलानेवाला पुरूजित्
-कुन्तिभोज:- कर्त्तव्य से भव पर विजय, नरों में श्रेष्ट,
-शैब्य- सत्य व्यवहार
-क्रमश—–

निज चिन्तन➖

अपने “उसूलों” पर “अडिगता” ही—-,
“लक्ष्य” “संधान” को—–;
“सरल” करता जाता है—-!

श्रीकृष्णं शरणं ममः

डाॅ गीता शर्मा
माँ गायत्री ज्योतिष अनुसंधान केन्द्र, कांकेर,छत्तीसगढ

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