जय वीर हनुमान : मंगलवार का पंचांग, दिनांक 14 अगस्त 2018 का सूर्य पंचांग

जय श्रीराधेकृष्ण
सूर्यसिद्धान्तीय-
-(सूर्य पंचांग रायपुर)
-दिनांक 14 अगस्त 2018
-दिन मंगरवार
-सूर्योदय 05:28:43
-सूर्यास्त 18:13:29
-दक्षिणायन
-संवत् 2075
-शक् 1940
-ॠतु- वर्षा
-श्रावण मास
-शुक्ल पक्ष
-तृतिया तिथि 08:06:26 परं चतुर्थी तिथि
-उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र 21:50:32 परं हस्त नक्षत्र
– सिद्ध योग 26:29:30 परं साध्य योग
-प्रथम गर करण 09:04
-द्वितिय वणिज करण 36:54
-राहुकाल-
15:31 / 17:01अशुभ
-अभिजीत 11:58 / 12 :50शुभ
-सूर्य- कर्क राशि
-चन्द्र- कन्या राशि
(अहोरात्र)
-श्रीविनायक चतुर्थी 4 व्रतं
-दुर्वा गणपतिव्रतं 4
-अंगारक चतुर्थी 4
-श्रीमंगलागौरी व्रतं
-भद्रा प्रारंभः 20:14
-रवि योग 21:50 या
-उत्तराफाल्गुनी में -भद्रा रिक्ता व्याप्ति
-रोगविमुक्ता स्नान मुहूर्त।
-श्रावणमास
-पार्थिव शिवपूजन
( एक मास तक)
शाकत्यागव्रतं
श्रीबल्लभाचार्य पाटोत्सवः श्रावणमास

“भवाय भवनाशाय महादेवाय धीमहि।
उग्राय उग्रनाशाय शर्वाय शशिमौलिने।।” (शि पु 20/43)

डाॅ गीता शर्मा, ज्योतिष मनीषी, कांकेर छत्तीसगढ।
(7974032722)

उक्तमंत्र द्वारा विद्वान उपासक भगवान शंकर की पूजा करें।यह भ्रम छोड़कर उत्तम भाव- भक्ति से शिव की अराधना करें; क्योंकि भगवान शिव भक्ति से ही मनोवांच्छित फल देते हैं।

“दुर्गेया शाम्भवी माया सर्वेषां प्राणिनामिह।
भक्तं विनार्पितात्मानं तया सम्मोह्यते जगत्।।”
(शि पु रू सृ 2/25)

– वास्तव में इस संसार के भीतर सभी प्राणियों के लिये शम्भू की माया को जानना अत्यन्त कठिन है।जिसने भगवान शिव के चरणों में अपने आपको समर्पित कर दिया है, उस भक्त को छोड़ कर शेष सारा जगत उनकी माया से मोहित हो जाता है।

“ध्यानयज्ञात्परं नास्ति ध्यानं ज्ञानस्य साधनम्।
यतः समरसं स्वेष्टं योगी ध्यानेन पश्यति।।”
(शिवपुराण रू सृ खं 12/46)

ध्यानयज्ञ से बढ़ कर कोई वस्तु नहीं।ध्यान ज्ञान का साधन है; क्योंकि योगी ध्यान के द्वारा अपने इष्टदेव समरस शिव का साक्षात्कार करता है।

ज्योतिष

जिनकी जन्म कुण्डली में सूर्य पापाक्रान्त, शत्रु राशिस्थ व नीच राशिगत होकर सप्तमस्थ होकर कुपित हो, उनका दाम्पत्य जीवन मधुर सरस सफल नहीं रह जाता। उन्हें सूर्य की उपासना करनी चाहिये ।

गाय, पितर, ब्राह्मणों की सेवा करने से सूर्यदेव
प्रसन्न होते हैं।उनकी उग्रता का शमन होता है।
आदित्य ह्रदयस्तोत्र का पाठ भी सूर्यदेव के कुप्रभाव को क्षीण करता है।

सूर्यपिता का कारक ग्रह है।जिसके गृह में पिता दुःखी बेबस हैं उन्हें सूर्य का क्रोध ( ताप) जला (दुःखी करता है) डालता है ।
अतः अपने वृद्ध माता पिता की सेवा करें।आपके सूर्य शीतल होंगे। दाम्पत्य- जीवन में आई बाधा दूर होगी।

सूर्य के मंत्र से सूर्य को जल अर्घ्य भी देना चाहिये।
सूर्य से आत्मा प्रतिष्ठा,मान-सम्मान तथा आरोग्यता आदि का भी विचार किया जाता है।आत्माकारक ग्रह सूर्य जातक-जातिका के आन्तरिक गुण, दोष , शक्ति, चालचलन एवं उच्च अभिलाषा का भी बोध कराता है।सूर्य राजकीय शासकीय सेवा से भी जोड़ता है।

निज चिन्तन
“पैसा” होता है “उपयोग” के लिये—–,
“इंशान” होता है “प्रेम” करने के लिये—-,
किन्तु “आज” “विचित्र बात यह है कि—–,
सब पैसे से प्रेम करते हैं—-,
“उपयोग” इंशान का करते हैं—–!

(चलते रहिये)

श्रीकृष्णं शरणं ममः

डॉ. गीता शर्मा, ज्योतिष मनीषी, 
माँ गायत्री ज्योतिष  अनुसंधान केन्द्र, कांकेर,छत्तीसगढ
(7974032722)

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