9 विदेशी संत बन गए महामंडलेश्वर, अब दुनियाभर में हिंदू धर्म का प्रचार-प्रसार


प्रयागराज @ हिंदू धर्म को लेकर प्रयागराज कुंभ सदियों तक बेहद यादगार साबित होगा। जी हां, हर हिंदू इस काम पर गर्व करेगा। दरअसल राम मंदिर निर्माण के लिए एड़ी चोटी का जोर लगाने वाले निर्मोही अखाड़े ने नौ विदेशी संतों का पट्टाभिषेक किया।

इसके साथ ही उन्हें महामंडलेश्वर की पदवी से सम्मानित किया। अब इन विदेशी संतों के जरिए दुनिया के कौने कौने में हिंदू धर्म के बारे में लोगों को जागरुक किया जाएगा और हिंदू धर्म से जुड़ने की शिक्षा दुनियाभर में दी जाएगी।

हिन्दू धर्म के लिए बड़ी बात

यह एक बहुत बड़े कदम के रुप में देखा जा रहा है। हर हिंदू को इस कदम पर गर्व महसूस हो रहा है। वाकय यह कुंभ हिंदूओं के लिए एक बड़ी सौगात लाया है। आईए विस्तार से जानते हैं।

हिंदू धर्म और आध्यात्म की ऐसी लगन लगी कि सबकुछ छोड़कर संन्यासी हो गए। दो दशक से ज्यादा समय तक धर्म की ध्वजा थामे रखने के बाद आखिरकार शुक्रवार को 9 विदेशी संन्यासियों को अखाड़ों की सबसे बड़ी उपाधि महामंडलेश्वर मिल ही गई। प्रयाग कुंभ में निर्मोही अखाड़े में विधि-विधान से विदेशी संन्यासियों को महामंडलेश्वर बनाया गया। इस मौके पर गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपानी और अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरी भी मौजूद थे।

किस-किस को मिली महामंडलेश्वर की उपाधि

शुक्रवार को महामंडलेश्वर की उपाधि पाने वाले ये विदेशी संत साईं मां के शिष्य हैं। लक्ष्मीदेवी साईं मां एक फाउंडेशन चला कर हजारों विदेशियों को हिंदू धर्म से जोड़ रही हैं। निर्मोही अखाड़ेे में महामंडलेश्वर अभिषेक के बाद सभी संन्यासी साईं मां के शिविर में पहुंचे। यहां पर विधि विधान के साथ गुरू पूजन की गई।

1- जयेंद्र दास- फ्रांस, इंजीनियर एवं इलेक्ट्रिकल कैमेस्ट्री के विशेषज्ञ, 2- अनंत दास- अमेरिका (वर्तमान में भारत में), यूएस से स्नातक, 3- श्रीदेवी मां- अमेरिका, सात साल की आयु में महर्षि महेश योगी संस्थान से जुड़ी, वूमन स्टडी से ग्रेज्युएट, 4- परमेश्वर दास- अमेरिका, मनोविज्ञान के विशेषज्ञ, 5- राजेश्वरी मां- जापान, पेशे से जर्मनी, जापानी और अंग्रेजी की शिक्षिका, 6- त्रिवेणी दास- अमेरिका, मनोविज्ञान से स्नातकोत्तर, 7- जीवन दास- अमेरिका, चिकित्सक एवं पर्वतारोही, 8- दयानंद दास- इज़राइल, विज्ञान से स्नातक, 9- त्यागानंद दास- अमेरिका, स्नातक।

कई देशों धर्म शिक्षण कर चुकी श्रीदेवी मां

श्रीदेवी मां ने बताया कि वे एक शिक्षक के रूप में अमेरिका, भारत, आयरलैंड, आस्ट्रेलिया, जापान, बालविया में हिंदू धर्म संस्कृति का प्रचार प्रसार कर चुकी हैं। उन्होंने बताया कि वे अपनी मातृभूमि चिली में भी एक आश्रम स्थापित कर चुकी है। अब उनका ध्येय पूरे विश्व में सनातन धर्म का प्रचार करना है। इन विदेशी संतों को सबसे पहले अखाड़े के प्रमुख व दूसरे महामंडलेश्वरों ने दीक्षा दी. इसके बाद इनकी चादरपोशी की रस्म हुई। कितने आकर्षक लग रहे हैं न महामंडलेश्वर बने दो विदेशी संत. अखाड़े के पदाधिकारियों के साथ ही सभी 13 अखाड़ों के प्रमुखों व श्रीमहंतों ने इन नए महामंडलेश्वरों को माला पहनाकर अखाड़े के फैसले पर अपनी मुहर लगाई।

निर्मोही अखाड़े की स्थापना १७२० में रामानंदाचार्य ने की थी। इस अखाड़े के मठ और मंदिर उत्तर प्रदेश, उत्तराखण्ड, मध्यप्रदेश, राजस्थान, गुजरात और बिहार में हैं। पुराने समय में इसके अनुयायियों को तीरंदाजी और तलवारबाजी की शिक्षा भी दिलाई जाती थी।

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