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Kumbh Mela अखाड़े क्या हैं, जानें अखाड़ों का इतिहास और कुंभ से इनका क्या है संबंध

हरिद्वार में कुंभ के मेले (Kumbh Mela) का आगाज पहले ही हो चुका है और अब महाशिवरात्रि के अवसर पर शाही स्‍नान होने जा रहा है। सभी अखाड़ों के साधु संत यहां पहुंच चुके हैं। इस बार महाशिवरात्रि के अवसर पर 11 मार्च साधुओं का यहां रेला लगेगा और सभी लोग गंगा में स्‍नान करेंगे। कभी सोचा है कि साधुओं के इन समूह को अखाड़ा क्‍यों कहा जाता है, जबकि अखाड़ा तो वह होता है जहां पहलवान लोग कुश्‍ती लड़ते हैं? हम आपको बताएंगे इसकी वजह। क्‍या है इनका इतिहास और कैसे शुरू हुई यह परंपरा? (Kumbh Mela) आज हम आपको इन सभी सवालों का जवाब देने जा रहे हैं।

अखाड़ों का इतिहास Kumbh Mela

ऐसा माना जाता है कि साधु संतों के समूह को अखाड़ा नाम सबसे पहले आदि शंकाराचार्य ने दिया। इन अखाड़ों के साधु आध्‍यात्मिक ज्ञान के साथ-साथ शस्‍त्र विद्या में पारंगत माने जाते हैं। Kumbh Mela ऐसा माना जाता है कि प्राचीन काल में बौद्ध धर्म के बढ़ते वर्चस्‍व और मुगलों के आक्रमण से हिंदू धर्म की रक्षा करने के लिए शंकाराचार्य शस्‍त्र विद्या में निपुण साधुओं के कुछ संगठन बनाए और इन्‍हें अखाड़ा नाम दिया।

ऐसे बने 14 अखाड़े Kumbh Mela

शाही सवारी, हाथी-घोड़े की सजावट, घंटा-नाद, नागा-अखाड़ों के करतब और तलवार और बंदूक का खुले आम प्रदर्शन यह अखाड़ों की पहचान है। जो साधु तलवार और अन्‍य शस्‍त्र चलाना नहीं जानते हैं, उन्‍हें इन अखाड़ों में शस्‍त्र चलाने की दीक्षा दी जाती है। आरंभ में मात्र 4 अखाड़े ही बने थे, लेकिन अभी इनकी संख्‍या 14 हो चुकी है। वर्ष 2019 में जब प्रयागराज में कुंभ का आयोजन हुआ था तो किन्‍नर अखाड़े को आधिकारिक रूप से शामिल करने के बाद अखाड़ों की संख्‍या 14 हो गई थी।

अखाड़ों के नाम
परंपरा के मुताबिक शैव, वैष्णव और उदासीन पंथ के संन्यासियों के मान्यता प्राप्त कुल 13 अखाड़े हैं।

शैव संन्यासी संप्रदाय के 7 अखाड़े Kumbh Mela

1. श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी- दारागंज प्रयाग
2. श्री पंच अटल अखाड़ा- चैक हनुमान, वाराणसी
3. श्री पंचायती अखाड़ा निरंजनी-दारागंज, प्रयाग
4.श्री तपोनिधि आनंद अखाड़ा पंचायती – त्रंब्यकेश्वर, नासिक
5.श्री पंचदशनाम जूना अखाड़ा- बाबा हनुमान घाट, वाराणसी
6.श्री पंचदशनाम आवाहन अखाड़ा- दशाश्वमेघ घाट, वाराणसी
7.श्री पंचदशनाम पंच अग्नि अखाड़ा- गिरीनगर, भवनाथ, जूनागढ़
बैरागी वैष्णव संप्रदाय के 3 अखाड़े
8. श्री दिगम्बर अनी अखाड़ा- शामलाजी खाकचौक मंदिर, सांभर कांथा
9. श्री निर्वानी आनी अखाड़ा- हनुमान गढ़ी, अयोध्या
10.श्री पंच निर्मोही अनी अखाड़ा- धीर समीर मंदिर बंसीवट, वृंदावन, मथुरा

उदासीन संप्रदाय के 3 अखाड़े Kumbh Mela

11. श्री पंचायती बड़ा उदासीन अखाड़ा- कृष्णनगर, कीटगंज, प्रयाग
12. श्री पंचायती अखाड़ा नया उदासीन- कनखल, हरिद्वार
13.श्री निर्मल पंचायती अखाड़ा- कनखल, हरिद्वार

इसके अलावा किन्‍नर अखाड़े को भी अब साधु परिषद से आधिकारिक मान्‍यता मिल चुकी है। इस तरह अखाड़ों की आधिकारिक संख्‍या अब 14 हो चुकी है।

Kumbh Mela कुंभ से अखाड़ों का संबंध

जिस प्रकार से बौद्ध धर्म के भिक्षु जहां एकत्र होते हैं उस स्‍थान को मठ कहा जाता है, उसी प्रकार से अखाडे़ साधुओं के मठ माने जाते हैं। माना जाता है कि पहले अखाड़ों की संख्‍या केवल 4 थी, बाद में साधुओं के बीच वैचारिक मतभेद होते चले गए और एक मत के साधुओं ने अपने अलग संगठन बना लिए और इस प्रकार से बढ़ते-बढ़ते अखाड़ों की संख्‍या 13 हो गई। हिंदू धर्म में कुछ ऐसी प्रमुख तिथियां होती हैं जिन पर गंगा में स्‍नान करना शुभ और पुण्‍यदायी माना जाता है। इन सभी तिथियों पर कुंभ में साधु संत स्‍नान करते हैं, इसलिए इसे शाही स्‍नान कहा जाता है।

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