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साल 2022 के पहले ही दिन बन रहा है कालसर्प योग! जानें कितने संकटों से होगा सामना

नई दिल्‍ली: साल 2022 की जन्‍म कुंडली में कालसर्प योग बन रहा है. देश की कुंडली में कालसर्प योग बनना कई तरह के संकटों का इशारा है. साल 2021 खत्‍म हो रहा है. नये साल 2022 का स्‍वागत करने का समय आ चुका है.

लोग इसे लेकर बेहद उत्‍साहित हैं लेकिन कोरोना के फिर से सिर उठाते ही राज्‍यों में प्रतिबंध लगने शुरू हो गए हैं. ज्‍योतिष के मुताबिक इस सबके पीछे ग्रहों की स्थितियां भी जिम्‍मेदार हैं. ज्‍योतिषीय गणनाओं के मुताबिक साल 2022 की कुंडली बड़े उलट-फेरों का संकेत दे रही है. यह उलट-फेर राजनीतिक, कोरोना महामारी, व्‍यापार, आंदोलन आदि को लेकर कई हलचलों से जुड़े हुए हैं.

पहले ही दिन बन रहा है काल सर्प योग

ज्‍योतिषाचार्यों के मुताबिक साल के पहले दिन 1 जनवरी 2022 की कुंडली में ही काल सर्प योग बन रहा है. कुंडली से जुड़ा यह बेहद खतरनाक दोष कई तरह की मुश्किलों का कारण बन सकता है. इसमें राजनीतिक टकराव भी प्रमुख है. नए साल की जन्‍म कुंडली का लग्‍न कन्या है. तृतीय भाव में मंगल, चन्द्रमा और चतुर्थ भाव में केतु है. वहीं सूर्य और शुक्र पंचम भाव में मौजूद हैं. इसी तरह बुध और शनि षष्ठम भाव में, राहु नवम भाव में हैं. ग्रहों की यह‍ स्थिति नए साल की कुंडली में कालसर्प दोष बन रही है.

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आ सकती हैं ये बड़ी मुसीबतें

– नए साल की कुंडली में काल सर्प योग बनना देश के लिए शुभ नहीं है. इससे राजनीतिक दलों के बीच टकराव बढ़ेगा. ऐसे हालात में राजनेता जनता के हितों के बजाय अपने हितों को पूरा करने में लगे रहेंगे.

– ग्रहों की यह स्थिति शत्रु देशों की बुरी चाल से भी आगाह करती है. अनदेखी करने पर शत्रु देश में बड़ी घटना को अंजाम दे सकते हैं.


– हालांकि आर्थिक तौर पर देश की स्थिति पहले से बेहतर होगी. अप्रैल के बाद देश के उद्योग-व्‍यापार जगत के हालात बेहतर होंगे और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे. इससे पिछले 2 सालों में कोरोना के कारण बिगड़े हालातों से निपटने में मदद मिलेगी.

क्या कहती है मंगल की दशा

भारतवर्ष की कुंडली के अनुसार तीसरी लहर के बारे में विचार करें तो कोरोनावायरस की पहली लहर मंगल की महादशा में शनि की अंतर्दशा शनि के प्रत्यंतर दशा से प्रारंभ हुई। अधिकतम 97894 प्रकरण 16 सितंबर 2020 को आए थे। उस समय मंगल की महादशा में शनि की अंतर्दशा में चंद्रमा के प्रत्यंतर में बुद्ध की सूक्ष्मदशा प्रारंभ हुई थी। इस कुंडली के अनुसार मंगल की महादशा में केतु के अंतर में केतु का प्रत्यंतर 10 फरवरी 2022 से प्रारंभ हो रहा है। कुंडली में केतु ग्रह वायरस जनित रोगों का प्रतिनिधित्व करता है।

मंगल इस कुंडली में अष्टम भाव का स्वामी है। अष्टम भाव मृत्यु के बारे में विचार करता है। इस कुंडली में मंगल दशम भाव में बैठा है जो राज्य का भाव है। यह बताता है कि उस समय राज्य किसी कारण बस 18 फरवरी तक ध्यान नहीं दे पाएगा और इस बीच में कोरोना के प्रकरण बढ़ेंगे जिस पर शासन द्वारा 15 मार्च 2022 के बाद काबू पा लिया जाना चाहिए परंतु कालसर्प योग उस समय 13 अप्रैल 2022 से 25 अप्रैल 2022 तक है।
25 अप्रैल 2022 तक तीसरी लहर समाप्त नहीं हो पाएगी। इस कुंडली में मंगल की महादशा में केतु की अंतर्दशा में गुरु का प्रत्यंतर 5 मई से प्रारंभ होगा। इस समय कोरोनावायरस पर काफी हद तक कंट्रोल हो जाएगा ,परंतु कोरोनावायरस समाप्त नहीं होगा। मंगल की महादशा में सूर्य की अंतर्दशा में सूर्य का प्रत्यंतर 8 सितंबर 2023 में आएगा और इस समय कोरोनावायरस भारतवर्ष में या तो नाम मात्र का ही बचेगा या समाप्त हो जाएगा।

कोरोनावायरस की तीसरी लहर आएगी। इस प्रश्न कुंडली में कुंडली सिंह लग्न की है। केतु इसके चौथे भाव में हैं। शनि छठे भाव में हैं। गुरु सातवें भाव में हैं। चंद्रमा आठवें भाव में है। सूर्य नवम भाव में हैं। दशम भाव में बुध और शुक्र हैं और एकादश भाव में मंगल हैं। इस कुंडली में वर्तमान में बुध में शनि की प्रत्यंतर दशा चल रही है जो कि 30 मार्च 2021 से प्रारंभ हो रही है। शनि इसमें छठे भाव का स्वामी है। अतः यह एक प्रबल मारकेश है। हम यह देख भी रहे हैं, कि 30 मार्च से कोरोनावायरस के नए प्रकरणों में बड़ी तेजी आई है और एक्टिव मरीजों की संख्या मैं बहुत तेजी से वृद्धि हुई है। इस कुंडली के अनुसार बुद्ध की प्रत्यंतर दशा 1 सितंबर 2021 से प्रारंभ होगी।

अतः 1 सितंबर 2021 के बाद कोरोनावायरस के दूसरी लहर के प्रकरणों में काफी कमी आना प्रारंभ हो जाएगा। इस कुंडली के अनुसार 18 जनवरी 2022 से बुध की महादशा में शनि की अंतर्दशा में केतु का प्रत्यंतर प्रारंभ होगा। जो कि तीसरी लहर आने का संकेत है। अतः हम कह सकते हैं कि इस समय से तीसरी लहर की आने की संभावना है। इस समय प्रश्न कुंडली के गोचर की छठे भाव में सूर्य, बुध और शनि हैं। अतः यह समय परेशानी वाला होगा। मंगल उच्च का होकर 26 फरवरी 2022 से छठे भाव में आएगा। इस समय के बाद तीसरी लहर का प्रभाव कम होना प्रारंभ हो जाएगा।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. Dharmakathayen.com इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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