Home पर्व और त्योहार कैसे करें वरुथिनी एकादशी का व्रत जाने नियम, पौराणिक कथा

कैसे करें वरुथिनी एकादशी का व्रत जाने नियम, पौराणिक कथा

हर महीने में दो एकादशी व्रत होते हैं इस तरह हिंदु धर्म में पूरे साल भर में 24 एकादशी के व्रत होते हैं अधिकमास होने पर दो एकादशी बढ़ जाती हैं और अधिकमास वाले साल में 26 एकादशी होती हैं. हर एकादशी का नाम अलग-अलग होता है. 7 मई 2021 को वरुथिनी एकादशी (Varuthini Ekadashi) का व्रत है. आज हम आपको वरुथिनी एकादशी के व्रत के बारे में बताएंगे.

वरुथिनी एकादशी व्रत की पौराणिक कथा (Varuthini Ekadashi 2021)

भगवान कृष्ण ने अर्जुन को वरुथिनी एकादशी व्रत के बारे में बताया था. भगवान कृष्ण ने एकादशी व्रत की जो कथा अर्जुन को सुनाई थी वो इस प्रकार है. प्राचीन काल में दानवीर राजा मांधाता  ने नर्मदा नदी के तट पर तपस्या की थी, जब राजा मांधाता तपस्या में लीन थे उस समय एक भालू आकर उनके पैर चबाने लगा और उन्हें खींटकर जंगल में ले गया. जब राजा मांधाता को इसका एहसास हुआ तो उन्होंने तप के नियम का पालन करते हुए भालू पर क्रोध दिखाने की जगह भगवान विष्णु से रक्षा की प्रार्थना की. राजा मांधाता की प्रार्थना पर भगवान विष्णु वहां पहुंचे और राजा को भालू से बचाने के लिए उन्होंने भालू का अपने सुदर्शन चक्र से वध कर दिया. लेकिन तब तक भालू राजा मांधाता के पैर को खा चुका था. राजा मांधाता ने जब अपने पैर की हालत देखी तो उन्हें बहुत दुख हुआ तब भगवान विष्णु ने राजा मांधाता को बताया कि उनके पैर की ये दशा उनके पूर्व जन्म के कर्मों के कारण हुई है. भगवान विष्णु ने राजा मांधाता को कहा कि वो मथुरा में जाकर उनके वाराह अवतार की आराधना करें और वरुथिनी एकादशी का व्रत करें. भगवान विष्णु के कहने पर राजा मांधाता ने मथुरा में जाकर विधि विधान से वाराह अवतार की आराधना की और वरुथिनी एकादशी का व्रत किया व्रत के प्रभाव से उनका पैर ठीक हो गया.

वरुथिनी एकादशी व्रत की पूजन विधि (Varuthini Ekadashi 2021)

एकादशी के पूर्व की रात्रि में सात्विक भोजन करें.

दशमी तिथि की रात्रि में सात्विक भोजन करें.

एकादशी का व्रत निर्जला और फलाहार दोनों तरीकों से किया जा सकता है.

एकादशी के दिन सूर्योदय के पूर्व नित्य क्रमों से निवृत्त होकर व्रत का संकल्प लें.

भगवान विष्णु को सोलह प्रकार की सामग्री अर्पित करें,

और उनकी विधिवध आराधना करें, भगवान विष्णु को अक्षत, नैवेद्य और दीपक समर्पित करें.

पीपल के पेड़ की जड़ में कच्चा दूध चढ़ाएं और घी का दीपक जलाएं.

पीपल का पेड़ न हो तो तुलसी के पेड़ का पूजन भी किया जा सकता है. ॐ नमो भगवत वासुदेवाय नम: के मंत्र का जाप करें.

रात में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करें.

व्रत के दौरान भगवान विष्णु का ध्यान करते रहें.

एकादशी के अगले दिन द्वादशी के दिन व्रत खोलें, किसी ब्राह्मण या गरीब को भोजन कराएं. व्रत का पारण करें.

 

व्रत का नियम (Varuthini Ekadashi 2021)

कांस्यं मांसं मसूरान्नं चणकं कोद्रवांस्तथा।

शाकं मधु परान्नं च पुनर्भोजनमैथुने।।

एकादशी के दिन कांसे के बर्तन में भोजन न करें.

इस दिन मांस और मसूर की दाल का सेवन न करें.

एकादशी के दिन कोदों का शाक और शहद के सेवन को भी निषेध माना गया है.

एकादशी के दिन केवल एक ही वक्त का भोजन करें.

एकादशी के दिन स्त्री के साथ नहीं सोना चाहिए.

एकादशी के दिन पान खाने, दातुन, नमक और तेल का सेवन वर्जित है.

एकादशी के दिन जुआ न खेलें, क्रोध न करें, किसी की निंदा न करें, जूझ न बोले और बुरे लोगों की संगत न करें.

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वरुथिनी एकादशी व्रत का फल (Varuthini Ekadashi 2021)

जो व्यक्ति वरुथिनी एकादशी व्रत करता है उसके सभी पाप नष्ट हो जाते हैं, वरुथिनी एकादशी सौभाग्य और मोक्ष फल देती है. वरुथिनी एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति को 10 हजार वर्ष तक तपस्या करने के बराबर पुण्य प्राप्त होता है. कुरूक्षेत्र में सूर्यग्रहण के समय एक मन सोना दान करने के बराबर पुण्य मात्र वरुथिनी एकादशी व्रत करने से मिल जाता है. जो मनुष्य पूरी श्रद्धा के साथ वरूथिनी एकादशी का व्रत करता है वो मनुष्य लोक में सुख भोग कर स्वर्ग में सुख का भागी बनता है. वरुथिनी एकादशी के व्रत को करने से व्यक्ति को कन्यादान और अन्नदान के बराबर पुण्य फल की प्राप्ति होती है. व्रत के महात्म्य को पढ़ने से एक हजार गाय दान देने के बराबर फल की प्राप्ति होती है. इस व्रत को करने से गंगा स्नान के बराबर फल प्राप्त होता है.

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