Home धर्म कथाएं Blessings Of Lord Shiva : जानिए भगवान शिव की मनपसंद 11 चीजें

Blessings Of Lord Shiva : जानिए भगवान शिव की मनपसंद 11 चीजें

महाशिवरात्रि (Mahashivratri 2021) शिवभक्तों को लिए बेहद खास दिन होता है इस साल शिवरात्रि 11 मार्च 2021 को है. भगवान शिव को भक्त बड़ी ही सरलता से प्रसन्न कर सकते हैं, और मनवांछित फल की प्राप्ति कर सकते हैं. आज हम आपको ऐसी 11 चीजों के बारे में बताने जा रहे हैं जो शिवजी को अतिप्रिय हैं जिन्हें भगवान शिव को समर्पित कर आप उन्हें आसानी से प्रसन्न कर सकते हैं.

ये 11 सामग्रियां हैं : जल, बिल्वपत्र, आंकड़ा, धतूरा, भांग, कर्पूर, दूध, चावल, चंदन, भस्म, रुद्राक्ष Blessings Of Lord Shiva

जल : भगवान शिव इतने भोले है कि वो सिर्फ जल से भी प्रसन्न हो जाते हैं ऐसी मान्यता है कि जब समुद्र मंथन से निकला हलाहल विष शिव जी ने अपने कंठ में धारण किया तो विष के प्रभाव से उनका कंठ नीला हो गया और उन्हें जलन का अहसास हुआ, उनकी इस पीड़ा को दूर करने के लिए उस समय सभी देवी-देवताओं ने उन पर जल अर्पित किया, Blessings Of Lord Shiva जिससे शिवजी को शीतलता मिली. इसलिए शिव जी को जल बेहद प्रिय है. शिवपुराण में कहा गया है कि शिव ही जल हैं.

बिल्वपत्र : बिल्वपत्र या बेलपत्र, भगवान शिव की प्रिय वस्तुओं में शामिल है. बेलपत्र को भगवान शिव के तीन नेत्रों की संज्ञा मिली है. कहते हैं जो भक्त भगवान शिव को एक बेलपत्र अर्पित करता है उसे 1 करोड़ कन्यादान के बराबर पुण्य मिलता है. यदि शिवजी को प्रसन्न करना हो तो उनका अभिषेक करें और बेलपत्र अर्पित करें.

आंकड़ा : आंकड़ा को आप आंक या अकौआ के नाम से भी जानते होंगे. इसमें सफेद रंग के फूल होते हैं ये फूल भगवान शिव की अतिप्रिय वस्तुओं में शामिल हैं, कहते हैं जो व्यक्ति भगवान शिव को आंक के फूल अर्पित करता है उसे सोना चढ़ाने के बराबर पुण्य मिलता है.

धतूरा : भगवान शिव को धतूरा भी चढ़ाया जाता है धतूरा भी शिवजी को बेहद प्रिय है. कहते हैं कि शिवजी कैलाश में निवास करते हैं और वो जगह बेहद ठंडी है, क्योंकि धतूरा गर्म होता है और इसे यदि एक निश्चित मात्रा में लिया जाए तो यह औषधी की तरह काम करता है इसलिए शिवजी को धतूरा प्रिय है. Blessings Of Lord Shiva शिवजी को धतूरा प्रिय होने का एक कारण देवी भागवत में वर्णित हैं जिसके अनुसार जब शिवजी ने हलाहल का सेवन किया तो वो व्याकुल हो उठे, तब अश्विनी कुमारों ने भांग, धतूरा, बेल आदि औषधियों से शिव जी की व्याकुलता को दूर किया था. तब से ही शिवजी को धतूरा प्रिय है.

भांग : शिवजी को प्रसाद में भांग चढ़ाने की परंपरा है, भांग ध्यान केंद्रित करने में सहायक होती है और भगवान शिव हमेशा ध्यान मुद्रा में ही होते हैं, भगवान शिव को हलाहल के सेवन के बाद भांग औषधी के रूप में दी गई थी, Blessings Of Lord Shiva भगवान शिव ने भक्तों की दी गई हर साधारण वस्तु को स्वीकार किया है.भांग भी उन्हीं में से एक है. भगवान शिव संसार की हर नकारात्मकता को अपने अंदर ग्रहण कर लेते हैं और संसार को सकारात्मकता से भर देते हैं.

कर्पूर : कर्पूरगौरं करूणावतारं…. ये मंत्र भगवान शिव को अतिप्रिय है, जिसका अर्थ होता है कपूर के समान उज्जवल. शिवजी के पूजन में कपूर का विशेष स्थान है Blessings Of Lord Shiva

कपूर की सुगंध वातावरण को महका देती है इसे जलाने से वातावरण पवित्र और सुगंधित हो उठता है भगवान शिव को कपूर की खुशबू बहुत भाती है तो यदि आप शिवजी को प्रसन्न करना चाहते हैं तो इस मंत्र का जाप करें और कपूर जलाएं.

दूध: भगवान शिव को कच्चा दूध भी प्रिय है. जिस दूध का सेवन न किया गया हो वो दूध भगवान शिव को अर्पित करें.

चावल : चावल का प्रयोग सभी पूजा में किया जाता है.

चावल को अक्षत भी कहते हैं जिसका अर्थ होता है जो खंडित न हो. भगवान शिव की पूजा में जब तक उन्हें अक्षत न चढ़ें वो पूजा अधूरी मानी जाती है. यदि आपके पास पूजा की कोई एक सामग्री कम हो, और आप पूजा में इसकी जगह चावल का उपयोग करें तो इसे पूरा माना जाता है. Blessings Of Lord Shiva

चंदन : चंदन शीतलता प्रदान करता है. भगवान शिव को सिंदूर नहीं चढ़ता भगवान शिव को चंदन का त्रिपुंड लगाया जाता है. चंदन की खुशबू से वातावरण खुशनुमा बन जाता है. जो व्यक्ति भगवान शिव को चंदन अर्पित करता है उसे मान-सम्मान और यश की प्राप्ति होती है.Blessings Of Lord Shiva

भस्म : भस्म किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद बची हुई उसकी आखिरी निशानी होती है. कहते हैं जब सती ने हवन कुंड में कूदकर अपने प्राणों की आहूति दे दी थी तो शिवजी ने क्रोध में उनकी भस्म को अपने शरीर में लपेट लिया था ताकि वो माता सती की आखिरी निशानी को अपने साथ रख सकें. भस्म का संबंध पवित्रता से भी है.

इसलिए शिवजी को भस्म प्रिय है. Blessings Of Lord Shiva

रुद्राक्ष : रुद्राक्ष की उत्पत्ति भगवान शिव के नेत्र से गिरे जल से हुई है, इसलिए शिवजी को रुद्राक्ष भी पसंद हैं. कहते हैं, एक समय भगवान शिवजी ने एक हजार वर्ष तक समाधि लगाई. समाधि खत्म होने पर जब शिवजी ने आंखे खोली तो उनके नेत्र से पानी की दो बूंदें गिरी इन बूंदों से रुद्राक्ष के पेड़ों की उत्पत्ति हुई. जिसपर रुद्राक्ष आए. रुद्राक्ष शिवजी और शिवजी को भक्त दोनों को ही पसंद हैं.

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