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Holika Dahan 2021 पर नहीं होगा भद्रा का साया, गोधूलि बेला से शुरू होगा होलिका दहन

फाल्गुन मास की पूर्णिमा को होली का त्योहार मनाया जाता है। इस दिन होलिका दहन (Holika Dahan 2021) होता है और पड़वा के दिन रंग की होली खेली जाती है। होलिका दहन (Holika Dahan 2021) इस बार 28 मार्च को किया जाएगा। इस बार होली पर भद्रा का साया नहीं रहेगा। पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान के निदेशक ज्योतिषाचार्य अनीष व्यास ने बताया कि होलिका दहन के दिन भद्राकाल सुबह सूर्योदय से शुरू होकर दोपहर में समाप्त हो जाएगी, इसलिए शाम को होलिका दहन (Holika Dahan 2021) बिना भद्रा के समाप्त होगा। होलिका दहन का शुभ मुहूर्त शाम 06:36 से लेकर 8:56 बजे तक होगा। वहीं भद्रा योग दोपहर 1:10 बजे तक ही रहेगा। जबकि होलिका दहन शाम को गोधूलि बेला के समय से शुरू होगा।

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विश्वविख्यात भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक अनीष व्यास ने बताया कि खास बात यह है कि इस दिन होलिका दहन (Holika Dahan 2021) के दौरान हवा की दिशा से तय होगा कि आगामी एक वर्ष तक का समय व्यापार, कृषि, वित्त, शिक्षा व रोजगार आदि के लिए कैसा होगा। होलिका जलने पर जिस दिशा की ओर धुआं उठता है, उससे भविष्य का हाल जाना जाता है। (Holika Dahan 2021) होलिका दहन के समय लौ अगर आसमान की तरफ उठे तो आगामी होली तक सब कुछ अच्छा रहता है। खासकर सत्ता और प्रशासनिक क्षेत्रों में बड़े बदलाव होते हैं परंतु यह सकारात्मक होते हैं और कोई बड़ी जनहानि व फिर प्राकृतिक आपदा की आशंका कम ही होती है।

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अनीष व्यास, विश्वविख्यात भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक, पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान, जयपुर 9460872809

वहीं होलिका दहन (Holika Dahan 2021) की लौ पूर्व की ओर उठती है तो इससे आने वाले समय में धर्म, अध्यात्म, शिक्षा व रोजगार के क्षेत्र में उन्नति के अवसर बढ़ते हैं। लोगों के स्वास्थ्य में भी सुधार होता है। वहीं पश्चिम की ओर होलिका दहन की अग्नि की लौ उठे तो पशुधन को लाभ होता है। आर्थिक प्रगति होती है। हालांकि थोड़ी प्राकृतिक आपदाओं की आशंका रहती है पर कोई बड़ी हानि नहीं होती है। कृषि क्षेत्र में लाभ-हानि बराबर रहते हैं। विश्वविख्यात भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक अनीष व्यास ने बताया कि वहीं उत्तर की ओर हवा का रुख रहने पर देश व समाज में सुख-शांति बनी रहती है। इस दिशा में कुबेर समेत अन्य देवताओं का वास होने से आर्थिक प्रगति होती है। चिकित्सा-शिक्षा के क्षेत्र में अनुसंधान होते है। कृषि- व्यापार में उन्नति होती है। वहीं होलिका दहन के वक्त हवा का रुख दक्षिण की ओर हो तो अशांति व क्लेश बना रहता है। झगड़े-विवाद होते हैं। पशुधन की हानि होती है। आपराधिक मामलों में वृद्धि होती है, परंतु न्यायालयीन मामलों में निपटारे भी तेजी से होते हैं।

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(Holika Dahan 2021) होलिका दहन की रात भी महारात्रि की श्रेणी में शामिल

विश्वविख्यात भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक अनीष व्यास ने बताया कि होलिका दहन की रात को भी दीपावली और शिव रात्रि की भांति ही महारात्रि की श्रेणी में शामिल किया गया है। होलिका की राख को मस्तक पर लगाने का भी विधान है। ऐसा करने से शारीरिक कष्ट दूर होते हैं। इस रात मंत्र जाप करने से वे मंत्र सिद्धि प्राप्त होती है। जीवन सुखमय बनता है, जीवन में आने वाली सभी परेशानियों का अपने आप निराकरण हो जाता है।

होलिका दहन मुहूर्त holika dahan 2021 muhurat

होलिका दहन तिथि- रविवार 28 मार्च 2021 शाम 06:36 से लेकर 8:56 तक कुल अवधि – लगभग 02 घंटे 19 मिनट

होली तिथि holika dahan 2021 date and muhurat

पूर्णिमा तिथि प्रारम्भ- 28 मार्च 2021 को प्रातः 03:27 से, पूर्णिमा तिथि समाप्त- 29 मार्च 2021 को रात 12:17 तक

क्यों किया जाता है होलिका दहन holika dahan 2021

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार विष्णु भक्त प्रहलाद को जब राक्षस हिरण्यकश्यप की बहन और प्रहलाद की बुआ होलिका आग पर बिठाकर मारने की कोशिश करती है तो वे खुद जल जाती है। जिसके नाम पर होलिका दहन की परंपरा है। विख्यात कुण्डली विश्ल़ेषक अनीष व्यास ने बताया कि दरअसल, होलिका का अर्थ समाज के बुराई को जलाने के प्रतिक के तौर पर मनाया जा जाता है। आपको बता दें कि राक्षस हिरण्यकश्यप चाहता था कि लोग उसे भगवान की तरह पूजे लेकिन, बेटे को भगवान विष्णु की भक्ति पसंद थी। इसी से क्रोधित होकर हिरण्यकश्यप ने होलिका को गोद में रखकर जलाने का निर्देश दिया था। दरअसल, होलिका को नहीं जलने का वर प्राप्त था। इसके अलावा होली को लेकर राक्षसी ढुंढी, राधा-कृष्ण के रास और कामदेव के पुनर्जन्म से संबंधित पौराणिक कथाएं हैं। साथ ही यह भी मान्यता है कि होली में रंग लगाकर, नाच-गाकर लोग शिव के गणों का वेश धारण करते हैं तथा शिव की बारात का दृश्य बनाते है। साथ ही ऐसी भी मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने होली के दिन ही पूतना नामक राक्षसी का वध किया था, इसी खुशी में गोपियों और ग्वालों ने रासलीला की और रंग खेला था।

विश्व विख्यात भविष्यवक्ता और कुंडली विश्ल़ेषक अनीष व्यास बता रहे है होलिका दहन पर राशि अनुसार उपाय।

मेष- सर्वश्रेष्ठ काम करने में सक्षम रहेंगे, लेकिन मनचाहा फल प्राप्त नहीं हो पाएगा। दूसरों को अपनी बात समझाने में परेशानी आएगी। व्यर्थ की बातों में उलझ सकते हैं। इससे बचें। क्या करें- होलिका पर बिल्व पत्र की माला अर्पण करें।
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वृषभ- धन की कमी हो सकती है, लेकिन कुछ दिन बाद समय में सुधार होने लगेगा। कर्ज से मुक्ति मिलेगी। माता-पिता से स्नेह और सहयोग प्राप्त होगा। काम की अधिकता भी रहेगी और यात्रा का योग भी है। क्या करें- होलिका पर लाल पुष्प अर्पण करें ।
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मिथुन- आपके लिए समय अच्छा है, असंभव से दिखने वाले काम भी पूरे हो सकते हैं। मंगल-गुरु की दृष्टि होने से कोई विशेष फर्क नहीं पड़ेगा। संतान पक्ष से भी लाभ होगा। क्या करें- होलिका पर वस्त्र दान करें।

कर्क- इस राशि पर शनि की दृष्टि बनी हुई है। द्वितीय चंद्र आर्थिक आधार को मजबूत बनाकर रखें। आत्मविश्वास रहेगा, लेकिन मनमाफिक सफलता मिलने में संदेह रहेगा। क्या करें- होलिका पर तेल का दीपक लगाएं एंव प्रसाद चढ़ाएं।

सिंह- मन कुछ उदास रह सकता है, लेकिन इससे आर्थिक मामलों में कोई परेशानी नहीं आएगी। लक्ष्य प्राप्ति भी आसानी से होगी। परेशानियों का अंत होगा। क्या करें- होलिका पर आंकड़े का पुष्प अर्पण करें और प्रसाद चढ़ाएं।
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कन्या- इस राशि के लिए चंद्र नुकसान की वृद्धि कर सकता है। कुछ दिन बाद स्थिति सामान्य होने लगेगी और कार्य में तेजी आएगी। विवादों से दूर रहने की सलाह है। क्या करें- होलिका पर धूप अर्पित करें।
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तुला- राशि स्वामी शुक्र की प्रबल दृष्टि प्राप्त नहीं हो रही है। फिर भी ये राशि परेशानियों से लड़ने की शक्ति प्राप्त कर रही है। आत्मबल बढ़ा हुआ रहेगा। मेहनत सफल हो सकती है। क्या करें- होलिका के नीचे जल चढ़ाएं और घी का दीपक जलाएं।
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वृश्चिक- चंद्र का गोचर पूर्णत अनुकूल बना हुआ है, लेकिन कुछ दिनों बाद विशेष सतर्कता रखनी होगी। धन प्राप्त हो सकता है। कोई बड़ा काम बन सकता है। क्या करें- होलिका पर लाल गुलाल चढ़ाएं।
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धनु- मंगल-गुरु और केतु का गोचर है। कार्य का विस्तार होगा और जिम्मेदारियों में वृद्धि होगी। जीवन व्यवस्थित चलता रहेगा। विवादों से बचने का प्रयास करें। क्या करें- होलिका के पास बैठकर श्रीसूक्त का पाठ करें।
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मकर- राशि स्वामी शनि का गोचर है एवं यह समय सभी प्रकार से सुख पंहुचाने वाला बनेगा। कार्यों में सफलता मिलेगी और क्रेडिट भी प्राप्त होगा। योजनाएं सफल होंगी। क्या करें- होलिका पर हरा गुलाल चढ़ाएं।
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कुंभ- कोई बड़ा आर्थिक लाभ प्राप्त हो सकता है, लेकिन कुछ उदासी भी रह सकती है। परिवार में वर्चस्व बना रहेगा। योजनाएं सफल होंगी। क्या करें- होलिका पर दूर्वा और लाल फूल चढ़ाएं।
kumbh rashi
मीन- ये समय संभलकर रहने का और विवादों से दूर रहने का है। कई बार विषम परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है। कुछ दिन बाद समय पक्ष का रहेगा। क्या करें- होलिका पर पीला गुलाल चढ़ाएं।
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