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Vikram Samvat : 13 अप्रैल से हो रही है हिंदु नववर्ष की शुरूआत, जाने कैसा रहेगा नया साल

चैत्र मास से हिंदुओं के नए साल की शुरूआत होती है.हिंदू कैलेंडर का आखिरी माह फाल्गुन होता है. इस साल 13 अप्रैल को चैत्र प्रतिपदा से नया साल लग रहा है, इसी दिन नवरात्रि प्रारंभ हो रही है वहीं गुड़ी पड़वा का पर्व भी इस दिन मनाया जाएगा. 13 अप्रैल के दिन ही विक्रम संवत 2078 प्रारंभ हो रहा है. कई जगह लोग इसे संवत्सर भी कहते हैं जिसका अर्थ होता है बारह महीने.

नवसंवत्सर का अर्थ

हर साल जब नया साल आरंभ होता है तो इसके साथ ही नया संवत्सर भी प्रारंभ होता है. जैसे साल में 12 महीने होते हैं वैसे ही 60 संवत्सर होते हैं. संवत्सर का अर्थ 12 महीने का काल होता है.संवत्सर का निर्धारण बृहस्पति ग्रह के आधार पर किया जाता है. 60 संवत्सरों को 20-20-20 के तीन बराबर हिस्सों में बांटा जाता है. जिन्हें ब्रह्माविंशति (1-20), विष्णुविंशति (21-40) और शिवविंशति (41-60) कहा जाता है.

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60 संवत्सर का अर्थ

संवत्सर अर्थात वर्ष, हिंदु धर्म में हर साल का एक अलग नाम होता है. जिसमें कुल 60 साल होते हैं. जब ये पूरे हो जाते हैं तो एक चक्र पूरा् हो जाता है. वर्तमान में प्रमादी संवत्सर चल रहा है.

 

संवत्सर के नाम

प्रभव, विभव, शुक्ल, प्रमोद, प्रजापति, अंगिरा, श्रीमुख, भाव, युवा, धाता, ईश्वर, बहुधान्य, प्रमाथी, विक्रम, वृषप्रजा, चित्रभानु, सुभानु, तारण, पार्थिव, अव्यय, सर्वजीत, सर्वधारी, विरोधी, विकृति, खर, नंदन, विजय, जय, मन्मथ, दुर्मुख, हेमलम्बी, विलम्बी, विकारी, शार्वरी, प्लव, शुभकृत, शोभकृत, क्रोधी, विश्वावसु, पराभव, प्ल्वंग, कीलक, सौम्य, साधारण, विरोधकृत, परिधावी, प्रमादी, आनंद, राक्षस, नल, पिंगल, काल, सिद्धार्थ, रौद्रि, दुर्मति, दुन्दुभी, रूधिरोद्गारी, रक्ताक्षी, क्रोधन और अक्षय.

13 अप्रैल से शुरू होने जा रहे हिंदू नव वर्ष से विक्रम संवत 2078 से आनंद नाम का संवत्सर आरंभ होने जा रहा है. हर संवत्सर का प्रभाव लोगों पर भी पड़ता है आनंद संवत्सर के नाम से अंदाजा लगाया जा सकता है कि ये संवत्सर जनता को आनंद देगा.कोरोना महामारी के प्रकोप से लोगों को राहत मिलने की संभावना भी बनती है. इस संवत्सर के स्वामी भग देवता हैं,नया संवत्सर जनता को आनंद और सुख-शांति प्रदान करेगा.

प्रतिपदा की तिथि मंगलवार से शुरू हो रही है, जिसके कारण इस संवत का स्वामी मंगल होगा, मंगल ग्रह एक क्रूर ग्रह माना जाता है जो कि युद्ध की परिस्थितियों को निर्मित करता है. नए संवत की ग्रह परिषद में 6 ग्रह क्रूर स्वाभाव के हैं जबकि 4 ग्रह सौम्य स्वाभाव के हैं. शनि ग्रह को सबसे क्रूर स्वाभाव का माना जाता है जो कि इस संवत में नहीं है शनि ग्रह पूरे साल मकर राशि में रहेगा.

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नया विक्रम संवत 6.02 बजे वृषभ लग्न में प्रवेश करेगा और चैत्र नवरात्रि 13 अप्रैल को रेवती नक्षत्र में मंगलवार को शुरू होगी. अमावस्या और नव संवत्सर के दिन, सूर्य और चंद्रमा मीन राशि में एक ही अंश पर रहेंगे, नए चंद्रमा का उदय मीन राशि में होगा. वहीं वृषभ राशि में मंगल और राहु ग्रह विराजमान रहेंगे. राजा, मंत्री और वर्षा का अधिकार मंगल ग्रह के पास है. विक्रम संवत 2078 में मंगल ग्रह को राजा और मंत्री का पद प्राप्त हुआ है वहीं वित्त पद की प्राप्ति गुरू ग्रह को हुई है.

मंगल ग्रह एक क्रूर ग्रह है जिसके चलते इसे युद्ध का देवता भी कहा जाता है. मंगल ग्रह हिंसा, दुर्घटना, भूकंप, विनाश, शक्ति, सशस्त्र बलों, सेना, पुलिस, इंजीनियरिंग, अग्निशमन, शल्य चिकित्सा, कसाई, छिपकर हत्या करने वाला, दुर्घटना, अपहरण, बलात्कार, उपद्रव, सामाजिक और राजैनतिक अस्थिरता का कारक ग्रह हैं. विक्रम संवत 2078 का राजा मंगल होने से इस साल आंधी-तूफान आने की आशंका भी रहेगी. लोग महामारी से निजात पा लेंगे, लेकिन प्राकृतिक घटनाओं और अन्य उपद्रवों का सामना लोगों को करना होगा. मंगल के प्रभाव के कारण कई जगहों पर हिंसा और दंगे हो सकते हैं लोगों को दुर्घटनाओं का समाना भी करना पड़ सकता है राजनैतिक उठा पटक की खबरें भी लोगों को मिल सकती हैं.

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