आज का पंचांग और तिथि, गुरूवार का सूर्यसिद्धान्तीय पंचांग

जय श्रीराधेकृष्ण
-सूर्यसिद्धान्तीय
-(सूर्य पंचांग रायपुर)

-दिनांक 16 अगस्त 2018
-दिन गुरूवार
-सूर्योदय 05:29:19
-सूर्यास्त 18:12:08
-दक्षिणायन
-संवत् 2075
-शक् 1940
-ॠतु- वर्षा
-श्रावण मास
-शुक्ल पक्ष
-पंचमी तिथि 06:09:17 परं षष्ष्ठी तिथि 28:47:12 परं सप्तमी तिथि
-चित्रा नक्षत्र 20:51:34 परं स्वाती नक्षत्र
-शुभ योग 22:10:35 परं शुक्ल योग
-प्रथम बालव करण 01:40
-द्वितिय कौलव करण 30:27 परं तैतिल करण
-राहुकाल-15 /31- 17:01अशुभ
-अभिजीत 11:57 / 12 :50 शुभ
-सूर्य- कर्क राशि
-चन्द्र- कन्या राशि 08:56:53 परं तुला राशि

डाॅ गीता शर्मा, ज्योतिष मनीषी, कांकेर छत्तीसगढ।
(7974032722)

-कल्क्यावतार 6
( सायाह्रो)
सायं शिवपार्वतोः पूजनं
-चित्रा में- पुंसवन,सीमंत, सूतीस्नान, जाकर्म, नामकरण, अन्नप्राशन, शैयासनाद्युपभोग, लतापादपारोपण, नववस्त्ररत्नादिधारण, शिल्प-भैषज्य, वाणिज्य आदि मुहूर्त।

-श्रावणमास
-पार्थिव शिवपूजन ( एक मास तक)
शाकत्यागव्रतं
-कल्क्यावतार:
-रानी अवन्तिका बाई लोधी जयंती।

श्रावणमास

“क्षमा ब्रह्म क्षमा सत्यं क्षमा भूतं च भावि च।
क्षमा तपः क्षमा शौचं क्षमयेदं धृतं जगत्।।”

अर्थात् क्षमा ब्रह्म है, क्षमा यज्ञ है,क्षमा वेद हैऔर क्षमा शास्त्र है।जो इस प्रकार जानता है, वह सब कुछ क्षमा करने योग्य हो जाता है।क्षमा ब्रह्म है, क्षमा सत्य है, क्षमा भूत है, क्षमा भविष्य है, क्षमा तप है और क्षमा शौच है। क्षमा ने ही सम्पूर्ण जगत् को धारण कर रखा है।

“भवाय भवनाशाय महादेवाय धीमहि।
उग्राय उग्रनाशाय शर्वाय शशिमौलिने।।” (शि पु 20/43)

उक्तमंत्र द्वारा विद्वान उपासक भगवान शंकर की पूजा करें।यह भ्रम छोड़कर उत्तम भाव- भक्ति से शिव की अराधना करें; क्योंकि भगवान शिव भक्ति से ही मनोवांच्छित फल देते हैं।
“दुर्गेया शाम्भवी माया सर्वेषां प्राणिनामिह।
भक्तं विनार्पितात्मानं तया सम्मोह्यते जगत्।।”
(शि पु रू सृ 2/25)

ज्योतिष
〰〰〰 गुरू वृहद् हैं भारी हैं और जन्मकुण्डली के बारह भावों में गुरू पांच भावों के कारक ग्रह हैं, यही इनका भारकत्व है।गुरू प्रभावित व्यक्ति महत्वाकांक्षी,शुद्ध विचार शक्ति से युक्त, सत्यवादी ,उच्चस्तरीय कार्यों को करने वाला, शिक्षाप्रद व्यवस्थाओं में संलग्न, समाज सुधारक, पकाशक,उपदेशक,पादरी , पंडित,न्यायधीश, प्रवक्ता, ज्योतिष,दार्शनिक योगी आदि होता है ।
धन सन्तान भाग्य कर्म आय के कारक गुरू – धार्मिक प्रवत्ति, बुद्धि का विकास, उच्चपद, राज्य-सम्मान, पैतृक-धन व आय के साधनों का हमें ज्ञान कराता है।

जिनकी जन्म कुण्डली में गुरू पापाक्रान्त, शत्रु ग्रह से दृष्ट, क्रूर ग्रहों आक्रान्त हो व नीचराशिगत हो तो जीवन में उन्हें उक्त पद व प्राप्त फलों की हानि करता है । उपाय बहुत ही आवश्यक हैं।
गुरू को बलवान करें।
कैसे करें?
ताकि आपको लाभ मिल सके ।आपका जीवन सरल सहज व उन्नतिकारक हो ?
समाधान अवश्य कर लेना चाहिये।

निज चिन्तन

” जो आपसे “ईर्षा” करते हैं—–,
उनसे “कभी” भी “घृणा- ईर्षा” मत करिये—–,

क्योंकि “यही” तो वह “लोग” हैं —-,
जो यह “समझते” हैं कि—-,
“आप” उनसे “बेहतर” हैं—-!

(चलते रहिये)

श्रीकृष्णं शरणं ममः

 

डाॅ गीता शर्मा , ज्योतिष मनीषी, 
माँ गायत्री ज्योतिष
अनुसंधान केन्द्र, कांकेर,छत्तीसगढ (7974032722)

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