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Gudi Padwa 2021 : जानिए क्यों मनाया जाता है गुड़ी पड़वा, क्या है इसका महत्व

महाराष्ट्र में नव वर्ष को गुड़ी पड़वा (Gudi Padwa 2021) के तौर पर मनाया जाता है, ये दिन वसंत के मौसम के प्रारंभ को भी दर्शाता है इसलिए दक्षिण भारत में इसे फसल दिवस भी माना जाता है. गुड़ी पड़वा का पर्व पूरे देश में अलग-अलग नामों के साथ मनाया जाता है. इस दिन पूरे देश में अलग-अलग वर्गों के लोग विभिन्न अनुष्ठान करते हैं जो कि दिन भर चलते हैं.

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कब मनाया जाता है गुड़ी पड़वा Gudi Padwa 2021

चैत्र महीने के पहले दिन को गुड़ी पड़वा (Gudi Padwa 2021) के रूप में मनाया जाता है. किसान जब रवि की फसल को काटते हैं तब इसे हिंदु नव वर्ष की शुरूआत माना जाता है.

इस दिन को चैत्र शुक्ल प्रतिपदा भी कहते हैं.

इस साल 13 अप्रैल को गुड़ी पड़वा का पर्व मनाया जाएगा.

प्रतिपदा तिथि प्रारंभ- 12 अप्रैल 2021 दिन सोमवार की सुबह 08 बजे से।

प्रतिपदा तिथि समाप्त- 13 अप्रैल 2021 दिन मंगलवार की सुबह 10 बजकर 16 मिनट तक।

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गुड़ी पड़वा पूजा विधि gudi padwa puja vidhi

  1. गुड़ी पड़वा के दिन सूर्योदय से पूर्व स्नान करने का महत्व है.
  2. हर शुभ काम और पर्व पर अपने घर में आम के पत्तों का तोरण लगाना चाहिए, गुड़ी पड़वा के दिन भी अपने घर के मुख्य द्वार को आम के पत्तों से बने तोरण से सजाएं.
  3. गुड़ी पड़वा के दिन गुड़ी का विशेष महत्व है घर के एक हिस्से में गुड़ी लगाई जाती है जो कि फूल, आम के पत्तों और कपड़े से बनी होती है.
  4. भगवान ब्रह्मा की पूजा करने के बाद गुड़ी को फहराया जाता है.
  5. गुड़ी फहराने के बाद भगवान विष्णु की पूजा की जाती है.

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गुड़ी पड़वा का महत्व importance of gudi padwa

ऐसा कहा जाता है कि गुड़ी पड़वा (Gudi Padwa 2021) के दिन ही भगवान ब्रह्मा ने सृष्टि का निर्माण किया था इसलिए गुड़ी पड़वा के दिन सबसे पहले उनकी आराधना की जाती है. गुड़ी पड़वा मुख्य रूप से महाराष्ट्रीयन पर्व है इसलिए जिस भव्यता के साथ इसे महाराष्ट्र में मनाया जाता है वैसा देश के किसी और हिस्से में देखने नहीं मिलेगा. ये पर्व बुराईयों को दूर कर लोगों को सुख और समृद्धि प्रदान करता है.

देश के अन्य राज्यों जैसे आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में इस अवसर को उगाड़ी त्योहार के रूप में मनाया जाता है. उत्तर भारतीय इस पर्व को चैत्र नवरात्रि के रूप में मनाते हैं.गुड़ी पड़वा से जुड़ी किंवदंती

गुड़ी पड़वा का पर्व हूणों पर शाकास की विजय का प्रतीक भी है. गुड़ी पड़वा के पीछे एक प्राचीन कथा प्रचलित है जिसके अनुसार इस दिन हूणों को राजा शालिवाहन ने हराया था. इसी दिन भगवान ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना की और सत्य युग की शुरूआत हुई थी.

गुड़ी पड़वा के दिन सूर्योदय से पूर्व शरीर पर तेल लगाकर स्नान कर के पवित्र हो जाना चाहिए. घर को आम के पत्तों और सुंदर फूलों से सजाना चाहिए. घर में सुंदर रंगोली बनाना चाहिए. भगवान ब्रह्मा की पूजा करने के बाद गुड़ी फहराना चाहिए. गुड़ी फहराने के बाद भगवान विष्णु की पूजा करें. सुख और समृद्धि के लिए भगवान से प्रार्थना करें.

गुड़ी पड़वा से जुड़ी खास बातें importance of gudi padwa

  1. गुड़ी पड़वा को महाराष्ट्रीयन नव वर्ष है इस दिन नई फसल की पूजा की जाती है.

2. गुड़ी पड़वा के दिन पूरण पोली बनाने की परंपरा है.

  1. गुड़ी पड़वा को घर में लगाने से घर बुरी नजर से बचता है और घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है.
  2. विक्रम संवत हिंदू पंचांग के अनुसार इसी दिन भगवान ब्रह्मा ने सृष्टि का निर्माण किया था.
  3. गुड़ी पड़वा का पर्व पहली बार छत्रपति शिवाजी महाराज ने युद्ध जीतने के बाद किया था तब से ही इसे मराठी वर्ग के लोग बड़े उल्लास के साथ मनाते आ रहे हैं.
  4. लोग इस दिन नीम की पत्तियों को खाकर दिन की शुरूआत करते हैं कहा जाता है कि इससे खून साफ होता है.
  5.  गुड़ी पड़वा के दिन देश के अलग-अलग राज्यों में भी पर्व मनाए जाते हैं जिन्हें अलग-अलग नामों से जाना जाता है उगादी,युगादी, चेट्री चंद.
  6. ये दिन किसी नए काम की शुरूआत करने के लिए बहुत शुभ होता है, नया घर या नया वाहन भी इस दिन लिया जा सकता है.

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