जय माँ लक्ष्मी : शुक्रवार का पंचांग, 12 अक्टूबर 2018 के ग्रह नक्षत्र और आप

जय श्रीराधेकृष्ण!
-सूर्यसिद्धान्तीय
-(सूर्य पंचांग रायपुर)
-दिनांक 12 अक्टूबर 2018
-दिन- शुक्रवार
-सूर्योदय 05:42:49
-सूर्यास्त 05:22:31
-दक्षिणायन
-संवत् 2075
-शक् 1940
-ऋतु- शरद
-आश्विन मास
-शुक्ल पक्ष
-तृतीया तिथि 06:22:05
परं चतुर्थी तिथि
-विशाखा नक्षत्र 12:36:00 परं अनुराधा नक्षत्र
-प्रीति योग 11:05:00 परं आयुष्यमान योग
-प्रथम गर करण 01:38
-द्वितिय वणिज करण 31:42
-राहुकाल-10:31 / 12:00 अशुभ
-अभिजीत 11:42/ 12 :30 शुभ
-सूर्य- कन्या राशि
-चन्द्र- तुला राशि 06:26:42 परं वृश्चिक राशि
-चन्द्रघंटादेवीदर्शनं
-तृतीयां सिन्दूरालत्तकं
-श्रीगणेश 4 चतुर्थी व्रतं
-अंगारक 4 चतुर्थी
-भद्रारंभः18:23 उ
-अमृतयोग 06:21 उ
-सर्वार्थ सिद्धि योग 12:35 उ
-आश्विनीमासः
-नवरात्रि पर्व
-चन्द्रघंटादेवीदर्शनम्
-राम मनोहर लोहिया पुण्य तिथि

डाॅ गीता शर्मा, ज्योतिष मनीषी, कांकेर छत्तीसगढ।
(7974032722)

क्षमा
क्षमा धर्मः क्षमा सत्यं क्षमा दानं क्षमा यशः।
क्षमा स्वर्गस्य सोपानमिति वेदविदो विदुः।।

अर्थात्-
क्षमा ही धर्म ह, क्षमा ही सत्य है और क्षमा ही दान,यश और स्वर्ग की सीढी है।क्षमा का विरोधी भाव क्रोध है।यह क्रोध दूसरे की कम अपनी स्वयं की अधिक हानि करता है।क्रोध पर विजय पाने पर ही क्षमा की प्रतिष्ठा होती है।

दान
“अन्नदानं प्रधानं हि कौन्तेय परिचक्षते।
अन्नस्य हि प्रदानेन रन्तिदेवो दिवगंतः।।”
अर्थात्-
अन्नदान सब दानों में श्रेष्ट है।अन्नदान के पुण्य के कारण ही राजा रन्तिदेव को स्वर्गलोक की प्राप्ति हुई।इसके अलावा अन्न व विभिन्न वस्तुओं के दान का भी बहुत महत्व हमारे शास्त्रोंमें बताया गया है। जिसे लक्ष्मी की कृपा प्राप्त है,उसे धन का ज्यादा से ज्यादा अंश धर्मकार्य, यज्ञादि तथा सेवा-परोपकार में लगाने को तत्पर रहना चाहिये।

श्रीमद् भगवद् गीता
विश्व में गीता का समादर है।भारत में प्रकट हुई गीता विश्व मनीषा की धरोहर है। अतः इसे राष्ट्रीय शास्त्र का मान देकर कलह-कष्ट से पीड़ित विश्व की जनता को शान्ति देने का प्रयास आवश्यक है।

युधामन्युश्च विक्रान्त उत्तमौजाश्च वीर्यवान।
सौभद्रो द्रौपदेयाश्च सर्व एव महारथाः।।6।।
(प्र अ गीता )

अर्थात्
पराक्रमी “युधामन्यु”- युद्ध के अनुरूप मन की धारणा,
“उत्तमौजा”- शुभ की मस्ती, सुभद्रापुत्र अभिमन्यु-जब शुभ समाचार आ जाता है, तो मन भय से रहित हो जाता है-ऐसा शुभ आधार से उत्पन्न अभय मन, ध्यानरूपी द्रोपदी के पाँचों पुत्र- वात्सल्य लावण्य, सह्यदयता, सौम्यता,स्थिरता सब के सब महारथी हैं।साधना पथ पर सम्पूर्ण योग्यता के साथ चलने की क्षमतायें हैं।
क्रमश——–

“अस्माकं तु विशिष्टा ये तान्निबोध द्विजोत्तम।
नायका मम सैन्यस्य संज्ञार्थं तान्ब्रवीमि।।”
(प्र अ 7)
अर्थात् द्विजोत्तम!
हमारे पक्ष में जो जो प्रधान हैं, उन्हें भी आप समझ लें।आपको जानने के लिये मेरी सेनाके जो नायक हैं, उनको कहता हूं—–
क्रमशः

निज चिन्तन

“संस्कारों” से भारी—–,
कोई “धन-दौलत” नहीं है—–!
“विकारों” से दूरी ही “संस्कारों” में “वृद्धि”—-!

(चलते रहिये)

श्रीकृष्णं शरणं ममः

डाॅ गीता शर्मा
माँ गायत्री ज्योतिष अनुसंधान केन्द्र, कांकेर,छत्तीसगढ

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Top
error: Content is protected !!