जय माँ लक्ष्मी : शुक्रवार 28 सितम्बर 2018 लक्ष्मी जी भर देगी आपकी खाली झोली, ये 6 राशियाँ होगी मालामाल!

goddess lakshmi worship

आज का पंचांग : प्रिया शरण त्रिपाठी

दिनांक 28.09.2018, शुभ संवत 2075 शक 1940 …, सूर्य द्क्षिरायण का …,
भाद्रपद शुक्ल पक्ष… तृतीया तिथि… सुबह में 08 बजकर 03 मिनट से… शुक्रवार… भरणी नक्षत्र… रात्रि को 02 बजकर 28 मिनट तक… आज चन्द्रमा … मेष राशि में… आज का राहुकाल दिन को 10 बजकर 24 मिनट से 11 बजकर 54 मिनट तक होगा …

आज के राशियों का हाल तथा ग्रहों की चाल

मेष राशि –
शेयर या लाटरी में अचानक हानि की संभावना…
प्रतिद्वंतिदयों से विवाद की संभावना….
भाईयों का साथ दिन को बेहतर बना सकता है….
छुट्टियों का आनन्द लेंगे…
शुक्र से उपाय –
1. दुर्गा कवच का जाप करें…2. चावल, दूध, दही का दान करें…

वृषभ राशि –
कुछ कार्य बीच में ही बंद हो सकता है….
आपके यहां कुछ अनचाहे मेहमान आ सकते हैं…..
स्कीन एलर्जी संबंधित कष्ट….
शनि के उपाय –
‘‘ऊॅ शं शनैश्चराय नमः’’ की एक माला जाप कर दिन की शुरूआत करें…..
भगवान आशुतोष का रूद्धाभिषेक करें….
उड़द या तिल दान करें….

मिथुन राशि –
कार्य में तेजी दिखाई देगी….
सर्तकता ना बरतने पर चोटिल हो सकते हैं…..
कार्यो में लाभ की संभावना….
आज लाभ की स्थिति को बनाये रखने के लिए…..
ऊॅ गं गणेशाय नमः का एक माला जाप करें….
पौधे का दान करें…..
इलायची खायें एवं खिलायें….

कर्क राशि –
लगातार आपको कोई चिट कर रहा है….
अपने कार्य में गोपनीयता बरतें….
भरोसे पर पूरा कार्य छोड़ने से हानि….
रक्त विकार संभव….

राहु से संबंधित कष्टों से बचाव के लिए –
ऊॅ रां राहवे नमः का एक माला जाप कर दिन की शुरूआत करें..
दवाईयों का दान करें..
सूक्ष्म जीवों को आहार दें..

सिंह राशि –
नई कला सीखने की शुरूआत या…..
नये योजना से कार्य करने से लाभ…
नये लोगों से व्यवहारिक दूरी बनाये रखना उचित होगा….
असंभावित हानि से बचने के लिए के निम्न उपाय करने चाहिए –
ऊॅ कें केतवें नमः का जाप कर दिन की शुरूआत करें…
सूक्ष्म जीवों की सेवा करें…
गाय या कुत्ते को आहार दें…

कन्या राशि –
कार्य में दोस्तों के आ जाने …..
भागीदारों से विवाद…..
यकृत रोग से कष्ट….
मंगल जनित दोषों को दूर करने के लिए –
ऊॅ अं अंगारकाय नमः का एक माला जाप करें..
हनुमानजी की उपासना करें..
मसूर की दाल, गुड दान करें…

तुला राशि –
पारिवारिक विवाद…
जिम्मेदारी में वृद्धि किंतु लाभ में कमी से तनाव….
व्यसन से अपयष…
राहु कृत दोषों की निवृत्ति के लिए –
ऊॅ रां राहवे नमः का जाप कर दिन की शुरूआत करें…
काली चीजों का दान करें….

वृश्चिक राशि –
मोबाईल में लगातार खराबी….
वित्तीय तौर पर परेषानी का समय…
उदर विकार…
सूर्य के निम्न उपाय आजमायें-
ऊ धृणि सूर्याय नमः का जाप कर, अध्र्य देकर दिन की शुरूआत करें,
लाल पुष्प, गुड, गेहू का दान करें,
आदित्य ह्दय स्त्रोत का पाठ करें…

धनु राशि –
आत्मविष्वास से कार्य में लाभ…
घरेलू सुख में वृद्धि….
फूड पाइजनिंग….
शनि से उत्पन्न कष्टों की निवृत्ति के लिए –
‘‘ऊॅ शं शनिश्चराय नमः’’ का जाप कर दिन की शुरूआत करें,
भगवान आशुतोष का रूद्धाभिषेक करें,
काले वस्त्र का दान करें..

मकर राशि –
विवाह से संबंधित बात के अधूरे रहने से तनाव…
धार्मिक स्थल की यात्रा के योग…
स्वास्थगत कष्ट…
मंगल के दोषों की निवृत्ति के लिए –
ऊॅ अं अंगारकाय नमः का एक माला जाप करें..
हनुमानजी की उपासना करें..
मसूर की दाल, गुड दान करें…

कुंभ राशि –
अपयष की संभावना….
प्रेमसंबंधों में प्रगाढ़ता….
दोस्तो का साथ मिलेगा…
चंद्रमा के निम्न उपाय करें –
ऊॅ श्रां श्रीं श्रीं एः चंद्रमसे नमः का जाप करें…
दूध, चावल, का दान करें…

मीन राशि –
परिवार में संपन्न पूजा में शामिल होंगे ….
आकस्मिक हानि या चोरी…
दोस्तों तथा परिचितों का साथ….
गुरू के लिए निम्न उपाय करें-
ऊॅ गुं गुरूवे नमः का जाप करें…
कुल पुरोहित, ब्राह्ण्य को यथासंभव दान दें,

 

शुक्र भरणी श्राद्ध से पायें खोयी समृद्धि

हिन्दूधर्म की मान्यता अनुसार, प्रत्येक शुभ कार्य के प्रारम्भ में माता-पिता, पूर्वजों को आर्शीवाद लेना प्रमुख कर्तव्य है, हमारे पूर्वजों की वंश परम्परा के कारण ही आज यह सुखी जीवन देख रहे हैं, इस जीवन का आनंद प्राप्त कर रहे हैं। वेदों में वर्ष में एक पक्ष को पितृपक्ष का नाम दिया, जिस पक्ष में हम अपने पितरों का श्राद्ध, तर्पण, मुक्ति हेतु विशेष क्रिया संपन्न कर उन्हें अर्ध्य समर्पित करते हैं। यदि किसी कारण से उनकी आत्मा को मुक्ति प्रदान नहीं हुई है तो हम उनकी शांति के लिए विशिष्ट कर्म करते है इसीलिए आवश्यक है -श्राद्ध और साथ ही जीवन में किसी प्रकार के वृद्धिकार्य जैसे विवाहादि संस्कार, पुत्र जन्म, वास्तु प्रवेश इत्यादि प्रत्येक मांगलिक प्रसंग में भी पितरों की प्रसन्नता हेतु श्राद्ध होता है यह एक प्रकार का कर्म कार्य होता है। दैनंदिनी जीवन में देव-ऋषि-पित्र तर्पण भी किया जाता है, जिससे जीवन में जो समृद्धि प्राप्त होती है वह चिरस्थायी बनी रहे और निरंतर वृद्धि प्राप्त होती रहे इस हेतु भरणी श्राद्ध किये जाने का विधान है..

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Top
error: Content is protected !!