सूनी गोद भरती हैं दसई की भवानी माता, यहां मन्नत मांग 70 साल के जालम सिंह बने थे पिता!

chamatkari bhawani mata fulfill barren woman's wish at dasai dhar

धार. कहते हैं सच्चे मन से भगवान के दरबार में प्रार्थना करो तो मनोकामना जरुर पूरी होती है। मध्यप्रदेश के धार जिले में ऐसा ही चमत्कार भवानी माता के मंदिर में होता हैं। यहां सच्चे मन से की गई प्रार्थना कभी खाली नहीं जाती है।
धार के समीप दसई में स्थित यह मंदिर खासतौर से एक प्राचीन कथा के लिए जाना जाता है, जो आज भी सच साबित होती हैं। दरअसल भवानी माता के सामने अपनी परेशानी बताने पर पुंवार वंश के जालम सिंह को 70 साल की उम्र में पुत्र प्राप्त हुआ था।



जालम सिंह ने मां के चरणों में अपनी परेशानी बताकर मन्नत मांगी थी, जो पूरी हुई। मां ने जालम सिंह की झोली में नौनिहाल भेजा। यह कहानी आज भी कई बार सच हुई हैं। मां के मंदिर से जुड़े ऐेसे कई किस्से हैं, जो भक्तों के मन में असीम आस्था और प्रेम जगाता हैं।

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जालम सिंह की मनोकामना पूरी होने के बाद माता रानी का मंदिर की क्षेत्र में ख्याति हुई। इसके बाद पुंवार वंश ने पीढि़दर पीढि़ मंदिर में मां की पूजन की और वे उनकी कुलदेवी कही जाती है।

हर कोई चौंक गए थे फिर जालम सिंह ने बताया…
राजस्थान के चित्तोड़ के ग्राम बिलासेरी के रहने वाले बड़वाजी लालसिंह की सिद्ध पोथी से माता के मंदिर के इतिहास के पुख्ता प्रमाण मिले हैं। माता मंदिर के पुजारी पं. संजय शर्मा बताते हैं कि भीम सिंह ने अंबाजी का निर्माण करवाया था। इसके बाद प्रथम संवत 1372 वैशाक सुदि 3 को पावागढ़ से भवानी माताजी को यहां लाए थे, तब से माताजी यहीं विराजित हैं। राजा सांगाराव तेहसीलदार तानाजी की बखत में जालम सिंह को संतान नहीं थी।

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(सूनी गोद भरती है दसई की भवानी माता)

इसके कारण वे बहुत परेशान थे। एक बार मां के चरणों में जालम सिंह ने प्रार्थना करके मन्नत मांगी, तो मन्नत चमत्कारिक ढंग से पूरी हुई।



इसके बाद हर कोई चौंक गया था कि जालम सिंह को 70 साल की उम्र में बच्चा कैसे पैदा हुआ तो उन्होंने माता रानी के चमत्कार के बारे में बताया।

 

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