गाय की जगह कुत्ते पाल रहे हैं, कैसे उद्धार होगा? दिव्य संत पं.कमलकिशोरजी नागर ने कथा में कहा

सुुुनेल/कोटा। सरस्वती के वरदपुत्र संत पं.कमलकिशोरजी नागर ने मंगलवार को विराट श्रीमद्् भागवत कथा के समापन में कहा कि जिनका हृदय बड़ा रहता है, वहीं परमात्मा रहता है। भक्ति का रंग जिन पर चढ़ता है, उतरता नहीं है। उन्होंने कहा कि एक भक्त ने नदी पर स्नान करते हुए मगरमच्छ देख उसे प्रणाम किया, उसने कहा नदी मुझसे बड़ी है, मैं उसमें रहता हूं। नदी ने सागर को, सागर ने आकाश को व आकाश ने परमात्मा को नमन करने को कहा। परमात्मा ने कहा कि मैं मनुष्य के हृदय मंे

संत पं. कमल किशोर नागर जी श्रीमद् भागवत कथा में बोले: काया, माया व छाया कभी साथ नहीं देती

सुुुनेल। पाटन बायपास मार्ग पर चल रही विराट श्रीमद् भागवत कथा में सोमवार को सरस्वती के वरदपुत्र संत पं.कमलकिशोरजी नागर ने ओजस्वी प्रवचनों में कहा कि काया, माया, छाया, जाया, कमाया और परनाया ये पांच तत्व कभी अपना साथ नहीं देते हैं। काया क्षणभंगुर है, माया चलायमान है, हम चलते है तो छाया साथ चलती हैं लेकिन विपत्ति में छाया भी दूर हो जाती है। इसलिए हम माया या छाया को साथी बनाए तो यह अविद्या है। जो द्वारिकाधीश को सारथी बनाए, वही विद्या है। उन्होंने दशम स्कंध के सूत्र बताते

जिस घर में मेहमान का स्वागत हो, वहां भगवान आते हैं : संत पं. कमलकिशोर नागर की श्रीमद् भागवत कथा

सुनेल। दिव्य गौसेवक संत पूज्य पं.कमलकिशोरजी नागर ने कहा कि परिवार में भले ही भाईयों में अलग-अलग रोटी बनती हो लेकिन जब भी कोई मेहमान आए तो एक हो जाओ। कोशिश करो कि घर का कोई राग-द्वेष बाहर न जाने पाए। ईश्वर के लिए अपना अंतःकरण शुद्ध कर लो। सुनेल-पाटन बायपास मार्ग पर 50 बीघा भूमि में चल रही श्रीमद् भागवत कथा का विराट पांडाल रविवार को भक्ति सागर से सराबोर रहा। पूज्य संत पं.नागरजी ने ओजस्वी प्रवचनों में कहा कि नारी घर का असली श्रृंगार है। वह अपने कानों में

श्रीमद् भागवत कथा में दिव्य संत पं.कमलकिशोर नागर जी बोले, बड़ा आदमी बनने पर छूट जाती है रोटी और हंसी

सुुनेल। दिव्य गौसेवक संत पूज्य पं. कमलकिशोर नागर ने कहा कि जितना बडा बनने की होड़ करोगे, उतनी ही रोटी और हंसी कम होती चली जाएगी। सुखों को हमने नहीं भोगा, सुखो ने हमको भोगा है। सांसारिक जीवन में वस्तु-विषयों से संबंध बनाएं लेकिन उसके बाद ईश्वर को भी समय दें। एक उम्र के बाद जिम्मेदारियों बच्चों को सौंपकर भक्ति के लिए समय निकालें। बड़प्पन की चाह में हम हंसी, ताली, भजन सब कुछ छोड़ रहे हैं। शुक्रवार को सुनेल-झालरापाटन बायपास मार्ग पर ‘नंदग्राम’ में विराट श्रीमद्् भागवत कथा महोत्सव

श्रीमद् भागवत कथा में गौसेवक संत पं.कमलकिशोर ‘नागरजी’ ने कहा, ‘ब्रह्मा’ दूध है और ‘माया’ चाय की तरह

सुनेल 29 नवबर। गौसेवक संत कमलकिशोर ‘नागरजी’ ने कहा कि पुत्र पिता जैसा हो, शिष्य गुरू जैसा हो और भक्त भगवान जैसा हो जाए जो सारी बुराइयां अच्छाई मे बदल सकती हैं। लेकिन सनातन धर्म में इससे उलटी हो रहा है। मधुमेह पिता से पुत्र को वंशानुगत हो सकती है लेकिन पिता के अच्छे गुण पुत्र नहीं स्वीकार कर रहे हैं। जरा सोचें कि भक्ति वंशानुगत क्यों नहीं चल पा रही है। बच्चे अपने पिता से गुण, त्याग और संयम की सीख ले लें तो परिवारों में कलह खत्म हो

श्रीमद् भागवत में गौसेवक संत कमलकिशोर नागर जी ने कहा, ‘नारी में स्वर्ण आभूषण से नहीं शरम से मर्यादा है’

कोटा, 28 नवबर। गौसेवक संत कमलकिशोर ‘नागरजी’ ने कहा कि ईश्वर ने हमें अनमोल कंचन काया बिनमोल दी है, फिर भी हमारा भरोसा उससे टूट रहा है। कोई कार्य नहीं होने पर हम कहते हैं ईश्वर ने मेरी नहीं सुनी। याद रखें, परमात्मा अचानक इंसान पर भरोसा नहीं करता है। पहले भजन व भक्ति करते हुए उससे मन के तार जोडो। उससे जुडने वालों को वो संभालता जरूर है। सुनेल-पाटन बायपास मार्ग पर कथा स्थल‘नंदग्राम’ में विराट श्रीमद् भागवत कथा महोत्सव के प्रथम सोपान में उन्होंने भक्ति और शौर्य की

मानव जाति की एकता का प्रतीक थे गुरु नानक देव

स्वप्निल व्यास, इंदौर @ जयंती पर विशेष. सब महि जोति-ज्योति है, सोई, तिस दै चानणां सम चाणन होई।' यानी सभी मनुष्य एक ही परमात्मा के अंश हैं और सभी को समान भाव से देखना ही आत्मज्ञान है। लेकिन अपने भीतर समता की भावना विकसित करने के लिए क्या करना चाहिए। नानक कहते थे कि अहंकार छोड़े बिना समता का भाव पैदा नहीं होगा। वे संसार से पलायन के विरुद्ध थे। समाज से हटकर मनुष्य कभी मुक्ति प्राप्त नहीं कर सकता। हमें अपने समाज में ही जीना और मरना है। अत:

कड़वे प्रवचन देकर जिन्दगी में मिठास भरने वाले मुनि का अंतिम विहार

भावपूर्ण श्रद्धांजली @ स्वप्निल व्यास, इंदौरतुम्हारी वजह से जीते जी किसी की आंखों में आंसू आए तो यह सबसे बड़ा पाप है। लोग मरने के बाद तुम्हारे लिए रोए, यह सबसे बड़ा पुण्य है। इसीलिए जिंदगी में ऐसे काम करो कि, मरने के बाद तुम्हारी आत्मा की शांति के लिए किसी और को प्रार्थना नहीं करनी पड़े। क्योंकि दूसरों के द्वारा की गई प्रार्थना किसी काम की नहीं है। जैन मुनि तरुण सागर का शनिवार को सुबह निधन हो गया। 51 वर्षीय जैन मुनि लंबे समय से बीमार चल रहे थे।

ब्राह्मण का सबसे बड़ा उत्सव है श्रावणी उपकर्म : रक्षाबंधन का यह भी एक रूप

श्रावणी उपाकर्म ब्राह्मणों व द्विज का सबसे बड़ा पर्व हैं। श्रावण मास के अंतिम दिन पूर्णिमा पर यह उत्सव मनाया जाता हैं श्रावणी उपाकर्म द्विज के शरीर मन और आत्मशुद्धि की क्रियाओं के साथ यज्ञोपवीत बदलें जाते हैं। इस दिन पुराना यज्ञोपवीत बदल कर नया धारण करते हैं, अर्थात् उस जिम्मेदारी को नए सिरे से स्मरण करते हैं। वैदिक काल से पवित्र नदियों के तट पर आत्मशुद्धि का यह उत्सव मनाया जा रहा हैं, इस कर्म में आंतरिक व ब्राह्य शुद्धि गोबर, मिट्टी, भस्म, अपामार्ग, धृत, गोमूत्र, प्राशन कर शरीर

स्वतंत्रता दिवस विशेष : हमें गर्व है हमारे ज्ञान से दुनिया को विज्ञान मिला

स्वप्निल व्यास @ इंदौर. लोग यह मानते या कहते पाए गए हैं कि पश्चिम ने विश्व को विज्ञान दिया और पूर्व ने धर्म | दूसरी ओर हमारे ही भारतीय लोग यह कहते हुए भी पाए गए हैं कि भारत में कोई वैज्ञानिक सोच कभी नहीं रही | ऐसे लोग अपने अधूरे ज्ञान का परिचय देते हैं या फिर वे भारत विरोधी हैं| भारत के बगैर न धर्म की कल्पना की जा सकती है और न विज्ञान की| हमारे भारतीय ऋषि-मुनियों और वैज्ञानिकों ने कुछ ऐसे आविष्कार किए और सिद्धांत गढ़े हैं

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