राष्ट्रीय प्रेस दिवस विशेष : मीडिया समाज का दर्पण और दीपक दोनों है…

स्वप्निल व्यास इंदौर @ राष्ट्रीय प्रेस दिवस’ भारत में मनाए जाने वाले राष्ट्रीय दिवसों में से एक है। यह दिन एक स्वतंत्र और जिम्मेदार प्रेस की मौजूदगी का प्रतीक है। राष्ट्रीय प्रेस दिवस प्रत्येक वर्ष '16 नवंबर' को मनाया जाता है। विश्‍व में अब लगभग 50 देशों में प्रेस परिषद या मीडिया परिषद है। भारत में प्रेस को 'व\चडॉग' एंव प्रेस परिषद इंडिया को 'मोरल व\चडॉग' कहा गया है। राष्ट्रीय प्रेस दिवस, प्रेस की स्वतंत्रता एवं जिम्मेदारियों की ओर हमारा ध्यान आकृष्ट करता है। दरअसल, प्रथम प्रेस आयोग ने भारत

संदेशो से सजी संजा

संजा के जरिये संस्कृति के संरक्षण और पर्यावरण को सहेजने का अनूठा प्रयास संस्था मालवमंथन द्वारा किया गया। बुधवार को मल्हारगंज क्षेत्र के सार्वजनिक उद्यान में संजा संध्या प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की जानकारी देते हुए संस्था के स्वप्निल व्यास ने बताया कि विलुप्त होती संजा संस्कृति के संरक्षण हेतु संस्था द्वारा इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें स्थानीय महिलाओं और बालिकाओं द्वारा पर्यावरण संरक्षण , स्वच्छता ,मतदाता जागरूकता,संदेशों से प्रेरित आकर्षक संजा बनाई गई। स्त्री और प्रकृति साथ साथ स्त्री और प्रकति दोनों का समान समाज के

इंदौर फिर से इतिहास रचेगा… शत प्रतिशत मतदान करेगा

जीस तरह दान करने से पुण्य मिलता है उसी तरह मतदान करने से सुशासन मिलता है। इन्हीं विचारो के साथ चुनाव चौपाल का आयोजन जन अभियान परिषद एवं नेहरू युवा केंद्र के सयुक्त तत्वावधान में ग्राम रंगवासा किया गया जहाँ ग्रामवासीयों को मतदान का महत्व बताया गया एवं मतदान करने के लिए शपथ दिलाई गई कार्यक्रम के पूर्व मतदाता जागरूकता रैली निकाली गई जिसमें बड़ी संख्या में ग्राम वासी मौजूद रहे कार्यक्रम में प्रभा पोरवाल ने मतदान का महत्व एवं इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन की जानकारी दी वही स्वप्निल व्यास ने

एक गाथा महारानी से पुण्यश्लोक लोकमाता बनने की, देवी अहिल्याबाई के पुण्य स्मरण दिवस पर विशेष

इतिहास-प्रसिद्ध सूबेदार मल्हारराव होलकर के पुत्र खंडेराव की पत्नी थीं, अहिल्याबाई सन १७४५ मे अहिल्याबाई के पुत्र हुआ और तीन वर्ष बाद एक कन्या। पुत्र का नाम मालेराव और कन्या का नाम मुक्ताबाई रखा। एक बार मल्हरराव राजस्थान में चौथ वसूल करने के लिए घूम रहे थे। साथ मे खण्डेराव भी थे। बढ़ते-बढ़ते भरतपुर के पास डींग पहुंचे। वहां के जाट उनका मुकाबला करने के लिए खड़े हो गये। घनघोर युद्ध हुआ। एकाएक खण्डेराव के गोली लगी और वह वही वीरगति को प्राप्त होगये। मल्हाराव जरा दूर लड़ रहा थे।

औषधीय पौधे अर्पण कर मनाया शिक्षक दिवस

संस्था मालवमंथन के तत्वाधान में स्थानीय शारदा कन्या एवं शासकीय उर्दू प्राथमिक विद्यालय में संयुक्त रूप से एक अनोखे अंदाज में शिक्षक दिवस मनाया गया, विद्यार्थीयो द्वरा अपने शिक्षक गण को उपहार स्वरूप औषधीय पौधों दीये गए वही आयोजित आरोग्य सवांद को संबोधित करते हुए प्रो. स्वप्निल व्यास ने औषधीय पौधों का महत्व एवं प्रयोग बताया विद्यालय के छोटे- छोटे विद्यार्थी यो द्वरा अपने-अपने घरों में पौधा लगाने की मांग पर आगामी त्योहारों में संपूर्ण विद्यालय के बच्चों को उपहार स्वरूप औषधीय पौधे देने की घोषणा श्री व्यास ने की

मर्द की तालीम से सिर्फ वही शिक्षित होता है पर औरत की तालीम से पूरी नस्ल-स्वप्निल व्यास

अल्प संख्यक महिलाओं के नेतृत्व विकास शिविर 2018 में मुख्य वक्ता के रूप में स्वप्निल व्यास ने विचार व्यक्त करते हुए कहा की खुदा ने भी कहा है की जो माँ-बाप अपनी औलाद को तालीम नही देते उनके गुनाह को बख्शा नहीं जाता है और और यह भी खुदा की जुबा है की मर्द अगर तालीम हासिल करता है तो सिर्फ एक व्यक्ति ही शिक्षीत होता है पर औरत की तालीम से पूरी कोम पूरी नस्ल आगे बढ़ती है।उन्होंने कहा की अगर हमें अपनी शक्ति का पता ही नहीं है।

उज्जैन में ऐसे आए महाकाल, पुजारी ने पुत्र की चिता की चढ़ाई थी भस्म, पढ़ें पूरी कथा

उज्जैन. भगवान शिव का प्रिय सावन माह। यह महीना हिंदू धर्म में काफी पवित्र माना गया है, इसलिए शास्त्रों में इस माह को धर्म-कर्म का माह कहा गया है। सावन माह में बाबा महाकाल की आराधना का अलग ही महत्व है। मप्र के उज्जैन में स्थित महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग देशभर में सिर्फ एक मात्र दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग है। यह स्वयंभू ज्योतिर्लिंग कहा जाता है। इसी वजह से तंत्र क्रियाओं की दृष्टी से उज्जैन महाकालेश्वर मंदिर शुरु से ही खास रहा है। -शिवपुराण में बताई गई कथा के अनुसार अवंतिका राज्य के राजा वृषभसेन

1000 साल से नागदेेवता का वास है इस मंदिर में, भाग्यशाली ही कर पाते हैं दर्शन!

हमारे देश में नागों के कई मंदिर हैं, जिनमें से एक उज्जैन में नागचंद्रेश्वर है, जहां विदेशों से भक्त दर्शन करने आते हैं। विश्व प्रसिद्ध इस मंदिर में भगवान नाागदेवता साल में सिर्फ एक बार ही दर्शन देते हैं। साल 2018 की नाग पंचमी 15 अगस्त को रहेगी। इस दिन भगवान नागचंद्रेश्वर के मंदिर में देशविदेश से भक्त दर्शन करने पहुंचते हैं।11वीं शताब्दी की अद्भुत प्रतिमा के दर्शन के लिए श्रद्धालु नागचंद्रेश्वर मंदिर में आते हैं। मंदिर में फन फैलाए नाग के आसन पर शिव-पार्र्वती बैठी मुद्रा में दर्शन देते

पौराणिक रहस्य, इस मंदिर में आज भी आती है एक दिव्य आत्मा

सतना। वैसे तो भारत देश में ओर से छोर तक कहीं भी चमत्कारों की कमी नही है, लेकिन कुछ ऐसे भी रहस्य हैं जिनसे अब तक पर्दा नहीं उठ सका है। कोई इसे चमत्कार मानता है तो कोई दैविय शक्ति, तो कोई भक्ति का एक ऐसा उदाहरण जिसके बारे में सिर्फ किताबों में ही पढ़ने नही मिलता, बल्कि हर रोज साक्षात् देखने भी मिलता है। जी हां, आज यहां हम बात कर रहे हैं सतना के समीप ही स्थित सुप्रसिद्ध दैविय स्थान मैहर की, जो कि एक शक्तिपीठ के रूप

सांप के काटने पर ये 2 इलाज जरूर पढ़ ले.. ना जाने कब आपके काम आ जाए और जिंदगी बच जाए :o

साँप के काटने का इलाज जरूर पढ़ें, पता नहीं कब आपके काम आ जाए : दोस्तो सबसे पहले साँपो के बारे मे एक महत्वपूर्ण बात आप ये जान लीजिये । कि अपने देश भारत मे 550 किस्म के साँप है । जैसे एक cobra है ,viper है ,karit है । ऐसी 550 किस्म की साँपो की जातियाँ हैं । इनमे से मुश्किल से 10 साँप है जो जहरीले है सिर्फ 10 । बाकी सब non poisonous है। इसका मतलब ये हुआ 540 साँप ऐसे है जिनके काटने से आपको कुछ नहीं

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