हरतालिका तीज 2018 व्रत: जानिए शुभ मुहूर्त, पूजन विधि और व्रत कथा : पँ कपिल शर्मा काशी

हरतालिका तीज का व्रत हिन्दू धर्म में सबसे बड़ा व्रत माना जाता हैं। यह तीज का त्यौहार भाद्रपद मास शुक्ल की तृतीया तिथि को मनाया जाता हैं। खासतौर पर महिलाओं द्वारा यह त्यौहार मनाया जाता हैं। कम उम्र की लड़कियों के लिए भी यह हरतालिका का व्रत श्रेष्ठ समझा गया हैं। विधि-विधान से हरितालिका तीज का व्रत करने से जहाँ कुंवारी कन्याओं को मनचाहे वर की प्राप्ति होती है, वहीं विवाहित महिलाओं को अखंड सौभाग्य मिलता है.हरतालिका तीज में भगवान शिव, माता गौरी एवम गणेश जी की पूजा का महत्व

धन प्राप्त करने के लिए शुक्रवार को करें यह पूजा, खींचे चले आएंगे लक्ष्मी-कुबेर

पैसा खुदा तो नहीं पर खुदा से कम भी नहीं। आज के परिवेश में यह बात शत प्रतिशत खरी उतरती है। मनुष्य के जीवन की सबसे बड़ी समस्या हैं गरीबी अर्थात निर्धनता। धन के अभाव में मनुष्य मान-सम्मान प्रतिष्ठा से भी वंचित रहता है। ऐसा शास्त्रों में वर्णन है की व्यक्ति को दरिद्रता दूर करने हेतु मां लक्ष्मी की आराधना करनी चाहिए। शास्त्रों के अनुसार लक्ष्मी को चंचला कहा जाता है अर्थात जो कभी एक स्थान पर रूकती नहीं। अतः लक्ष्मी अर्थात धन को स्थायी बनाने के लिए कुछ उपाय,

जन्माष्टमी को सुख-समृद्धि प्राप्ति के लिए करें ये ज्योतिष के विशेष उपाय

शास्त्रों के अनुसार श्री कृष्ण की पत्नी रुक्मणी माँ लक्ष्मी का अवतार थी अत: अगर इस दिन भगवान श्रीकृष्ण को प्रसन्न करने के लिए विशेष उपाय किए जाएं तो माता लक्ष्मी भी प्रसन्न हो जाती हैं और भक्तों पर कृपा बरसाती हैं। यदि आप जन्माष्टमी के दिन ये उपाय पूर्ण श्रद्धा एवं विश्वास से करेंगे तो आपको अभीष्ट फल की प्राप्ति होगी कृष्ण जन्माष्टमी कब है हिन्दू पंचांग के अुनसार भादो मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र में अर्धरात्रि को कृष्ण का जन्म हुआ था. इसलिए हर साल

श्रावण मास की अष्टमी के दिन वरलक्ष्मी व्रत

श्रावण मास की अष्टमी के दिन वरलक्ष्मी व्रत रखा जाता हैं। इस पूजा में माता की कृपा पाप्त करने के लिए कलश बैठाकर वर मुद्रा वाली देवी लक्ष्मी की प्रतिमा की पूजा की जाती है। इसलिए इसे वरद लक्ष्मी व्रत के नाम से जाना जाता है। यह व्रत संतान की लम्बी उम्र, अपने सुहाग के लिए रखती हैं। वरलक्ष्मी व्रत रखना अष्टलक्ष्मी को पूजने के बराबर है। इस दिन पूजा करने से धन, प्रसिद्धि, ज्ञान, बल, आनंद, प्रेम, शांति की कभी कमी नहीं होती है। पूजा विधि इस दिन प्रात: सभी कामों

श्रावण मास की नागपंचमी क्या करें और क्या न करें, जानिए अचूक उपाय!

नागपंचमी : 15/8/2018 बुधवार को हिंदू धर्मग्रन्थों के अनुसार, श्रावण मास की शुक्ल पक्ष पंचमी को "नागपंचमी" का पर्व परम्परागत , श्रद्धा एवं विश्वास के साथ मनाया जाता है। यह नागों और सर्पों की पूजा का पर्व है। मनुष्य और नागों का संबंध पौराणिक कथाओं से झलकता रहा है। हिंदू धर्मग्रन्थों में नाग को देवता माना गया है और इनका विभिन्न जगहों पर उल्लेख भी किया गया है। हिन्दू धर्म में कालिया, शेषनाग, कद्रू (साँपों की माता) तक्षक आदि बहुत प्रसिद्ध हैं। कथाओं के अनुसार दक्ष प्रजापति की पुत्री तथा कश्यप ऋषि

आज नागपंचमी है : नागपंचमी व्रत से पायें सर्पदोष से मुक्ति.

श्रावण मास की शुक्लपक्ष की पंचमी को नाग पंचमी के नाम से मनाया जाता है। इस दिन नागों का पूजन किया जाता है। इस दिन व्रत करके सांपों को दूध पिलाया जाता है। गरूड़ पुराण में उल्लेख है कि इस दिन अपने घर के दोनों किनारों पर नाग की मूर्ति बनाकर पूजन करना चाहिए।ज्योतिष शास्त्र के अनुसार पंचमी तिथि का स्वामी नाग है। अर्थात् शेषनाग आदि सर्पराजाओं का पूजन पंचमी के दिन किया जाता है। श्रावण मास को शिव का मास माना जाता है साथ ही चूॅकि नाग शिवजी के

जय शिव शंकर : शिवजी की पूजा से चुटकियों में भगाएं टेंशन

स्वस्थ इंसान वह जो शारीरिक रूप से रिलैक्स, मानसिक तौर पर अलर्ट अर्थात सचेत, भावानात्मक तौर पर शांत व आध्यत्मिक तौर पर सजग है। क्योंकि पूर्ण रूप से स्वस्थ रहने के लिए मानसिक और भावानात्मक पक्ष भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है, जितना कि शारीरिक पक्ष।अर्थात् मानसिक तौर पर स्वस्थ्य रहने के लिए रिलैक्स रहना लगातार शुभ सोचना ही दिमाग की शांति के लिए आवश्यक है। सचेत रहने के साथ ही रिलैक्स रहना दिमाग ही नहीं अपितु मन की शांति के लिए भी जरूरी है। मन की व्यथा को दूर कर भावनात्मक

शनैश्चरी हरियाली अमावस्या विशेष : इस सटिक विधि से करें पूजन, मिलेगी पितृदोष से मुक्ति

शनैश्चरी हरियाली अमावस्या विशेष "नीलांजनं समाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम्। छाया मार्तण्ड सम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम्।।"शनि अमावस्या के दिन श्री शनिदेव की आराधना करने से समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होंती हैं। इस वर्ष 11 अगस्त 2018 को शनिवार के दिन शनि अमावस्या मनाई जाएगी, इस दिन हरियाली अमावस्या भी साथ होने से अधिक शुभ संयोग बन रहा है। यह पितृकार्येषु अमावस्या के रुप में भी जानी जाती है. कालसर्प योग, ढैय्या तथा साढ़ेसाती सहित शनि संबंधी अनेक बाधाओं से मुक्ति पाने का यह दुर्लभ समय होता है जब शनिवार के दिन अमावस्या का समय हो

हरियाली अमावस्या पर इस विधि से करें पूजा, भगवान शिव बना देंगे मालामाल!

hariyali amavasya

श्रावण कृष्ण पक्ष अमावस्या को हरियाली अमावस्या के नाम से जाना जाता है। देश के कई भागों विशेषकर उत्तर भारत में इसे एक धार्मिक पर्व के साथ ही पर्यावरण संरक्षण के रूप में मनाया जाता है। श्रावण मास में महादेव के पूजन का विशेष महत्व है इसीलिए हरियाली अमावस्या पर विशेष तौर पर शिवजी का पूजन किया जाता है। हरियाली अमावस्या को पेड़-पौधे और प्रकृति का पूजन किया जाता है। इस दिन विशेष रूप से पीपल के पेड़ का पूजन किया जाता है, उसके फेरे लिए जाते हैं और मालपुओं

गुडहल का पुष्प बदल सकता है आपकी उर्जा शक्ति

‘शंकर: पुरुषा: सर्वे स्त्रिय: सर्वा महेश्वरी।’ (शिवपुराण) अर्थात्–समस्त पुरुष भगवान सदाशिव के अंश और समस्त स्त्रियां भगवती शिवा की अंशभूता हैं, उन्हीं भगवान अर्धनारीश्वर से यह सम्पूर्ण चराचर जगत् व्याप्त है। शिव की आराधना, शक्ति की आराधना है और शक्ति की उपासना शिव की उपासना है। शिव की सम्पूर्ण शक्ति, देवी में मानी गयी है.सावन मास में शिव पूजा तभी पूर्ण मानी जायेगी जब देवी प्रसन्न हों और देवी पुराण के अनुसार माता पर गुड़हल का फूल चढ़ाना उतना ही लाभदायक है जितना बाबा महाकाल को बेलपत्र चढ़ाना। माता को लाल

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