अकाल मौत कोई नहीं मरता, जान लेने से 24 घंटे पहले हर इंसान को ये 4 संकेत देते हैं यमराज ..

जिसका जन्म हुआ है, उसकी मृत्यु होना भी निश्चित ही है। इस सच को कोई नहीं बदल सकता, लेकिन कब हमारी मृत्यु हो सकती है, इसका पता पहले ही लग जाता है। माना जाता है कि यमलोक के दूत हर इंसान को उसकी मौत से पहले यमराज के 4 संदेश भेजते हैं, जिनसे यह समझा जा सकता है कि अब उसका अंतिम समय आने वाला है।एक प्रचलित कथा के अनुसार यमराज ने अपने एक भक्त अमृत को वचन दिया था कि वे हर किसी के मौत से पहले ही 4 संकेतों से जरिए

आज भी भारत के इस गाँव में हनुमान जी की पूजा करना माना जाता है गुनाह ..

हनुमान जी की पूजा – ऐसा माना जाता है कि कलियुग में आज भी एक ऐसा देवता मौजूद हैं जो अपने भक्‍तों की हर मनोकामना पूर्ण करते हैं।सभी कष्‍टों को हरने वाले हनुमान जी ही वो देवता हैं जो आज भी मौजूद हैं और मनुष्‍य जाति की रक्षा कर रहे हैं।भारत में भगवान राम के बाद हनुमान जी की पूजा सबसे ज्‍यादा की जाती है। शनिवार और मंगलवार के दिन तो जैसे हनुमान जी के मंदिरों में मेला सा लग जाता है। आपने अब तक सोचा होगा कि हनुमान जी को

द्रौपदी की लाज बचाने के पीछे ये थे कारण, नहीं जानते होंगे दूसरा कारण ..

महाभारत के युद्ध के बारे में सभी ने पढ़ा और देखा होगा। वो संसार में हुआ अब तक का सबसे बड़ा युद्ध था जो धर्म और अधर्म के लिए लड़ा गया था। एक ऐसा युद्ध जिसमें शत्रु ही भाई थे और भाई ही शत्रु। इस युद्ध के होने के पीछे कई कारण थें। उनमें से एक बड़ा कारण थीं पांडवों की पत्नी द्रौपदी। एक कहानी ये भी प्रचलित है कि द्रौपदी का जब चीर हरण हुआ तो उनकी लाज की रक्षा भगवान श्री कृष्ण ने की थी हालांकि इसके पीछे भी

माता इस वर्ष सिंह के बजाय नौका पर सवार आयेगीं, माता की सवारी इस वर्ष नौका रहेगी

माता इस वर्ष सिंह के बजाय नौका पर सवार आयेगीं चूंकि प्रतिपदा तिथि इस वर्ष बुधवार को पड रही है इसीलिये माता की सवारी इस वर्ष नौका रहेगी। इस वर्ष शरद ऋतु अंर्तगत पडने वाली शारदीय नवरात्र या महाकाली नवरात्र की महत्वपूर्ण तिथियां और उस दिन किया जाने वाले सफलता प्राप्ति के मंत्र जिनके जप से आप अप्रत्याशित लाभ प्राप्त कर सकते है । वे बालिकाऐं जिनके विवाह में अनावश्यक विलंब हो रहा है वे संपूर्ण नवरात्र में रोजाना प्रातः एवं संध्या काल के समय मंत्र ’ ऊॅं कात्यायनी महामाये

हमारी संस्कृति में श्रद्धा तत्व को जीवित रखने का उत्सव है श्राद्ध

स्वप्निल व्यास, इंदौर @ प्रारंभ से प्रारब्ध भारतीय संस्कृति और हिन्दू धर्म में श्राद्ध का अपना विशेष स्थान है। श्राद्ध शब्द श्रद्धा से बना है और उसी से उसके गुप्त तात्पर्य पर प्रकाश पड़ता है। सत्कर्मों के लिए, सत्पुरुषों के लिए आदर की, कृतज्ञता की भावना रखना श्रद्धा कहलाता है। जिस व्यक्ति ने हमारे साथ उपकार किया है, हम उसका श्रद्धा सहित स्मरण करते हैं। इस स्मरण में भजन-पूजन के साथ-साथ भोजन की व्यवस्था भी रहती है। यह सम्मिलित रूप श्रद्धा कहलाता है। श्राद्ध एक प्रकार से मृत पूज्य व्यक्तियों के

श्राद्ध कौन हैं पितृगण? महिलाएं भी कर सकती हैं पितृ तर्पण

हमारे पूर्वज ही हमारे पितृगण हैं।हमारे पितृदेवता श्राद्धपक्ष में सूर्य के उदित होते ही सूक्ष्म-शरीर के रूप में (वायुरूप) सूर्य की रश्मियों पर सवार हो हमारे दरवाजे पर आकर खडे हो जाते हैं। जब उनका पुत्र उन्हें संकल्प सहित आमंत्रित करता है तभी वह ग्रह प्रवेश करते हैं ।और अपना भाग वायुरूप में ग्रहण कर सूर्य की वापस होती किरणों के साथ पितृ लोक को चले जाते हैं। जो पुत्र पितृऋण के तहत तर्पण नहीं करता तो पितर दुःखित कातर हो अपने पुत्र को श्रापित कर चले जाते हैं।पितृपक्ष के 15

अनंत चतुर्दशी व्रत उद्यापन विधि, कथा, ऐसे करें भगवान विष्णु की पूजा

अनन्त चतुर्दशी का व्रत: दिनाँक 23/9/2018 दिन रविवार को अनन्त चतुर्दशी व्रत है। आईये जानें इस व्रत के बारे में। पंडित मनोज शुक्ला से। यह व्रत भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को किया जाता है। इस व्रत में अनन्त के रूप में भगवान श्रीहरि विष्णु की पूजा होती है। अनन्त चतुर्दशी के दिन पुरुष दाहिने हाथ में तथा नारियाँ बाँये हाथ में अनन्त धारण करती हैं। अनन्त कपास या रेशम के धागे से बने होते हैं, जो कुंकमी रंग में रंगे जाते हैं तथा इनमें चौदह गाँठे होती हैं।

गौतम बुद्ध : जिसने अपने मन को साधा वही सच्चा साधु

स्वप्निल व्यास, इंदौर @ प्रारंभ से प्रारब्ध एक दिन भगवान गौतम बुद्ध ने सोचा अपने शिष्यों को दीक्षा देने के बाद उनकी परीक्षा ली जाए।उन्होंने शिष्यों से कहा,”तुम सभी जहाँ कहीं भी जाओगे वहाँ तुम्हें अच्छे और बुरे दोनों प्रकार के लोग मिलेंगे।अच्छे लोग तुम्हारी बातों को गौर से सुनेंगे और तुम्हारी सहायता करेंगे।लेकिन बुरे लोग तुम्हारी निंदा करेंगे और तुम्हें गालियाँ देंगे।तुम्हे इससे कैसा लगेगा?” एक गुणी शिष्य ने भगवान गौतम बुद्ध को जवाब दिया,”मैं तो किसी को बुरा नहीं समझता।यदि कोई मेरी निंदा करेगा या मुझे गालियाँ भी देगा तो

तेजादशमी विशेष: वचन पर अटल… सत्यवादी… समाज सुधारक… गोरक्षक…. तेजाजी

स्वप्निल व्यास, इंदौर @ तेजाजी ने ग्यारवीं शदी में गायों की डाकुओं से रक्षा करने में अपने प्राण दांव पर लगा दिये थे। वे खड़नाल गाँव के निवासी थे। भादो शुक्ला दशमी को तेजाजी का पूजन होता है। तेजाजी का तेजाजी सत्यवादी और दिये हुये वचन पर अटल थे। उन्होंने अपने आत्म - बलिदान तथा सदाचारी जीवन से अमरत्व प्राप्त किया था। उन्होंने अपने धार्मिक विचारों से जनसाधारण को सद्मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया और जनसेवा के कारण निष्ठा अर्जित की। जात - पांत की बुराइयों पर रोक लगाई।

जाने राधा कृष्ण के जीवन की अनसुनी कहानी!

स्वप्निल व्यास इंदौर @ श्री कृष्ण और राधा का संबंध आमतौर पर पति-पत्नी का नहीं बल्कि प्रेमी-प्रेमिका के रूप में जाना जाता है। हलांकि ब्रह्मवैवर्त पुराण में दोनों के विवाह की कथा भी मिलती है और विवाह स्थल का जिक्र भी किया गया है। इसके बाद भी भगवान श्री कृष्ण के साथ कहीं भी उनकी पत्नियों की तस्वीर या मूर्ति नहीं मिलती है। हर जगह श्री कृष्ण के साथ राधा ही नजर आती हैं। इसकी वजह यह है कि 16108 पत्नियों पर राधा का प्रेम भारी था। यह बात भगवान

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