करोड़ों का सोना पहनकर बने गोल्डन बाबा, संत बनने से पहले कंधे पर लादकर बेचते थे कपड़े

प्रयागराज. एक ऐसे बाबा हैं जो सादगी से नहीं बल्कि सोने के आभूषणों की चमक से पहचाने जाते हैं। देश में संतों की बात की जाए तो उनका नाम अलग ही चमके के साथ लिया जाता हैं। जी हां हम गोल्डन बाबा के बारे में बात कर रहे हैं।दिल्ली के व्यवसायी के रुप में सुधीर कुमार माकड़ नाम से अपनी पहचान रखने कपड़ा व्यापारी को एकाएक अहसास होता है कि मैंने बहुत पाप किए हैं, तब मैंने साधु बनने और जरुरतमदों की मदद करने का जिम्मेदारी उठाई। बस वो दिन

सूर्यदेव की पुत्री से हुआ था हनुमान का व‍िवाह, क्‍या है इसका रहस्य

हनुमान जी को ब्रह्मचारी माना जाता है लेकिन पुराणों में उनकी पत्‍नी सुवर्चला बताई गई हैं। तेलंगाना में उनके नाम का एक मंद‍िर भी बना है। जानें क्‍या है हनुमान जी की शादी का राज. हनुमान भक्‍त उन्‍हें ब्रह्मचारी मानते हैं और उनकी पूजा में अक्‍सर उनके नाम के आगे इस शब्‍द का प्रयोग करते हैं। लेकिन तेलंगाना के एक मंद‍िर में उनकी और उनकी पत्‍नी सुवर्चला की एक साथ मूर्तियां स्‍थाप‍ित हैं। यहां पूरी श्रद्धा के साथ उनका पूजन क‍िया जाता है। बता दें कि तेलंगाना के खम्मम जिले में हनुमान जी

मंदिर में शिवलिंग की हर साल बढ़ती है लंबाई, इंच टेप से ऊंचाई नापते हैं अफसर! :)

खजराहो. पर्यटकों के बीच मशहूर खजुराहो में भोलेनाथ का एक मंदिर ऐसा भी है जहां का शिवलिंग हर साल बढ़ता है. इस चमत्कार के कारण इस मंदिर में बड़ी तादाद में श्रद्धालु आते हैं और भोलेनाथ का आशीर्वाद ले जाते हैं. शिवलिंग की ऊंचाई कितनी बढ़ी इसे खुद अधिकारी इंची टेप से नापते हैं। यही नहीं, हर साल कार्तिक माह की शरद पूर्णिमा के दिन शिवलिंग की लंबाई एक तिल के आकार के बराबर बढ़ती जाती है। अपनी कलाकृतियों के लिए विश्व प्रसिद्ध पर्यटन क्षेत्र खजुराहो एक तीर्थ स्थल के

कमाख्या से चलकर थावे पहुंची थी मां भवानी, चमत्कार दुनियाभर में हैं मशहूर

गोपालगंज. बिहार के गोपालगंज जिले से सीवन मार्ग पर थावे नाम के स्थान पर माता का चमत्कारिक मंदिर हैं। माता यहां मां भवानी के अवतार के रुप में विराजमान हैं। यह मां दुर्गा के एक रुप मां थावेवाली का प्राचीन मंदिर हैं। मां थावेवाली को श्रृद्धालुगण सिंहासिनी भवानी, थावे भवानी और रहषु भवानी के नाम से भी पहचाते हैं। जो भक्त यहां की महिमा जान लेता हैं वह इस पौराणिक स्थल पर बार-बार हाजिरी देने आता है। कई भक्त माता के चमत्कारों में इतनी आस्था रखते हैं कि वे विदेशों

सोमवार को इस व्रत कथा विधि से करें उपवास, महाकालेश्वर करेंगे हर मनोकामना पूरी :)

उज्जैन. भगवान का पूजन-अर्चना के लिए कोई जगह, समय या दिन निश्चित नहीं है, ऐसा माना जाता है। लेकिन हिंदू धर्म की प्रथाओं के मुताबिक सोमवार का दिन भगवान शिव की भक्ति के लिए विशेष दिन माना गया है। इस दिन भगवान शिव की पूजा करने से शिव-पार्वती प्रसन्न होते हैं। भगवान भक्तों के सारे कष्ट हर लेते हैं। सच्चे मन से भगवान शिव की पूजा करने वालों को कभी निराश नहीं होना पड़ता हैं। सोमवार को भगवान शिव के साथ माता पार्वती की भी पूजन करनी चाहिए। इस दिन

बिच्छु के काटने के 2 ये इलाज हमेशा याद रखें, ना जाने कब काम आ जाए और जिंदगी बच जाए :o

नमस्कार दोस्तों धर्म कथाएं डॉट कॉम पर आपका हार्दिक स्वागत है। आज हम आपको बेहद जहरीले जीव जिससे घर-बाहर कहीं भी हमारा सामना हो जाता हैं। इस खतरनाक जीव के एक डंक से कई लोगों की जान जा चुकी हैं तो कई तड़फ-तड़फ कर मर गए। इसके बाद हम अब कसम खाते हैं कि यह महत्वपूर्ण जानकारी हर किसी के पास भेजेंगे ताकि अब कोई इलाज मिलने से बच सके। बारिश गर्मी, सर्दी किसी भी मौसम में जीवजंतु कीड़े और जहरीले जंतु ज्यादा निकलते देखे गए हैं। एक बार एक

गाय की जगह कुत्ते पाल रहे हैं, कैसे उद्धार होगा? दिव्य संत पं.कमलकिशोरजी नागर ने कथा में कहा

सुुुनेल/कोटा। सरस्वती के वरदपुत्र संत पं.कमलकिशोरजी नागर ने मंगलवार को विराट श्रीमद्् भागवत कथा के समापन में कहा कि जिनका हृदय बड़ा रहता है, वहीं परमात्मा रहता है। भक्ति का रंग जिन पर चढ़ता है, उतरता नहीं है। उन्होंने कहा कि एक भक्त ने नदी पर स्नान करते हुए मगरमच्छ देख उसे प्रणाम किया, उसने कहा नदी मुझसे बड़ी है, मैं उसमें रहता हूं। नदी ने सागर को, सागर ने आकाश को व आकाश ने परमात्मा को नमन करने को कहा। परमात्मा ने कहा कि मैं मनुष्य के हृदय मंे

संत पं. कमल किशोर नागर जी श्रीमद् भागवत कथा में बोले: काया, माया व छाया कभी साथ नहीं देती

सुुुनेल। पाटन बायपास मार्ग पर चल रही विराट श्रीमद् भागवत कथा में सोमवार को सरस्वती के वरदपुत्र संत पं.कमलकिशोरजी नागर ने ओजस्वी प्रवचनों में कहा कि काया, माया, छाया, जाया, कमाया और परनाया ये पांच तत्व कभी अपना साथ नहीं देते हैं। काया क्षणभंगुर है, माया चलायमान है, हम चलते है तो छाया साथ चलती हैं लेकिन विपत्ति में छाया भी दूर हो जाती है। इसलिए हम माया या छाया को साथी बनाए तो यह अविद्या है। जो द्वारिकाधीश को सारथी बनाए, वही विद्या है। उन्होंने दशम स्कंध के सूत्र बताते

जिस घर में मेहमान का स्वागत हो, वहां भगवान आते हैं : संत पं. कमलकिशोर नागर की श्रीमद् भागवत कथा

सुनेल। दिव्य गौसेवक संत पूज्य पं.कमलकिशोरजी नागर ने कहा कि परिवार में भले ही भाईयों में अलग-अलग रोटी बनती हो लेकिन जब भी कोई मेहमान आए तो एक हो जाओ। कोशिश करो कि घर का कोई राग-द्वेष बाहर न जाने पाए। ईश्वर के लिए अपना अंतःकरण शुद्ध कर लो। सुनेल-पाटन बायपास मार्ग पर 50 बीघा भूमि में चल रही श्रीमद् भागवत कथा का विराट पांडाल रविवार को भक्ति सागर से सराबोर रहा। पूज्य संत पं.नागरजी ने ओजस्वी प्रवचनों में कहा कि नारी घर का असली श्रृंगार है। वह अपने कानों में

श्रीमद् भागवत कथा में दिव्य संत पं.कमलकिशोर नागर जी बोले, बड़ा आदमी बनने पर छूट जाती है रोटी और हंसी

सुुनेल। दिव्य गौसेवक संत पूज्य पं. कमलकिशोर नागर ने कहा कि जितना बडा बनने की होड़ करोगे, उतनी ही रोटी और हंसी कम होती चली जाएगी। सुखों को हमने नहीं भोगा, सुखो ने हमको भोगा है। सांसारिक जीवन में वस्तु-विषयों से संबंध बनाएं लेकिन उसके बाद ईश्वर को भी समय दें। एक उम्र के बाद जिम्मेदारियों बच्चों को सौंपकर भक्ति के लिए समय निकालें। बड़प्पन की चाह में हम हंसी, ताली, भजन सब कुछ छोड़ रहे हैं। शुक्रवार को सुनेल-झालरापाटन बायपास मार्ग पर ‘नंदग्राम’ में विराट श्रीमद्् भागवत कथा महोत्सव

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