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अक्षय तृतीया एवं वृषभ सक्रांति का दुर्लभ पुण्य प्रद संयोग, पंडित कपिल शर्मा (काशी) से जानें

दिनांक 14 मई 2021, शुक्रवार वैशाख शुक्ल पक्ष -तृतीया, अक्षय तृतीया| अक्षय का मतलब कभी क्षय ना होने वाला ।अक्षय तृतीया पुराणों में एक पुण्य प्रद तिथि बताई गई है। अक्षय तृतीया के दिन ही सतयुग एवं त्रेता युग का प्रारंभ हुआ था। इसी दिन भगवान विष्णु के छठे अवतार भगवान परशुरामका जन्म हुआ था। ब्रह्मा जी के पुत्र अक्षय कुमार का अवतरण भी इसी दिन हुआ था। कृष्ण एवं सुदामा का मिलन भी अक्षय तृतीया के दिन हुआ था । मां अन्नपूर्णा का प्राकट्य भी इसी दिन हुआ था। अक्षय तृतीया बहुत पुण्य प्रद तिथि है। *इस दिन किया हुआ जाप ,पूजन ,पाठ ,दान, गौ सेवा का अक्षय फल होता है। अक्षय तृतीया के दिन सुबह सूर्योदय से पहले स्नान करके भगवान विष्णु एवं लक्ष्मी जी की पूजा करनी चाहिए। विष्णु सहस्त्रनाम एवं कनकधारा स्तोत्र का भी पाठ करना चाहिए । जल से भरा मिट्टी का घड़ा ,शरबत एवं शक्कर का भी दान करना चाहिए। साथ ही छाता ,चप्पल, सत्तू ,श्रीखंड का भी दान करना चाहिए। सायंकाल भगवान परशुराम की पूजा कर अपने घर के बाहर दीप प्रज्वलित करना चाहिए। गीता के संपूर्ण 18 अध्याय के पाठ करने से अक्षय फल प्राप्त होता है। एवं पितरों की आत्मा को भी शांति मिलती है।

akshaya tritiya 2021

अक्षय तृतीया शुभ पूजन मुहूर्त

सुबह 7:26 से 10:44 बजे तक, दोपहर 12:23 से 2:00 बजे तक। अक्षय तृतीया में प्रदोष काल में रूद्र अभिषेक, शिवपूजन एवं कुबेर पूजन का भी विशेष महत्व है । कोरोना कर्फ्यू का पालन करें। अपने घरों में रहकर पूजा पाठ करें ।😷मास्क लगाएं सामाजिक दूरी का पालन करें ।📌वैक्सिंग खुद भी लगाएं एवं दूसरों को भी लगाने के लिए प्रेरित करें ।पूजा पाठ से अपनी आध्यात्मिक ऊर्जा शक्ति 🧘‍♀️🧘‍♂️को बढ़ाएं एवं 🦠कोरोना रूपी दैत्य के नाश में में सहभागी बने।
दवाई भी एवं कढ़ाई भी ।
हम सब जीतेंगे कोरोना हारेगा। मुस्कुराएगा भारत कोरोना को हराएगा भारत।
जय हिंद वंदे मातरम
पंडित कपिल शर्मा (काशी)

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