जय माँ लक्ष्मी : शुक्रवार का पंचांग, 14 सितम्बर 2018 के ग्रह नक्षत्र और आप

जय श्रीराधेकृष्ण
-सूर्यसिद्धान्तीय
-(सूर्य पंचांग रायपुर)
-दिनांक 14 सितम्बर 2018
-दिन शुक्रवार
-सूर्योदय 05:36:16
-सूर्यास्त 05:48:01
-दक्षिणायन
-संवत् 2075
-शक् 1940
-ॠतु निरयन- वर्षा
-ऋतु सायन- शरद
-भाद्रपद मास
-शुक्ल पक्ष
-पंचमी तिथि 17:12:20 परं षष्ठी तिथि
-विशाखा नक्षत्र 29:08:32 परं
-अनुराधा नक्षत्र
-वैधृति योग27:55:47 परं
-विष्कुम्भ योग 28:16:47
-प्रथम बालव करण 29:00
-द्वितिय कौलव करण 59:01
-राहुकाल-10:31 / 12:01अशुभ
-अभिजीत 11:50 / 12 :40 शुभ
-सूर्य- सिंह राशि
-चन्द्र- तुला राशि 22:57:31 परं वृश्चिक राशि
-ऋषिपंचमी व्रतं 5
-सप्तऋषिपूजा
-(मध्याह व्यापिनी ग्राह्या)
-रक्षापंचमी 5
-गुरूपंचमी 5 (उड़ीसा)
-संवत्सरी (पंचमीपक्ष-जैन)
-दशलक्षण (14-से 23 तक-जैन)
-पुष्पांजलि (14-18 तक, जैन)
-नुआखाई
-सिद्धयोगः 17:12 या
-उत्तराफाल्गुन्यांरवि: 14:54
-विशाखा में वैधृति व्याप्त।

 

डाॅ गीता शर्मा, ज्योतिष मनीषी, कांकेर छत्तीसगढ।
(7974032722)

-भाद्रपदमास
-दधिभाद्रपदे त्यजेत्
-हिन्दी दिवस (भारतेन्दु जयंती)

पतिव्रता
“धन्यापतिव्रता नारी नान्या पूज्या विशेषतः।
पावनी सर्वलोकानां सर्वपापौघनाशिनी।।

“सेवते या पतिं प्रेम्ण परमेश्वरवच्छिवे।
इह भुक्त्वाखिलान्भोगानन्ते पत्या शिवां गतिम्।।”

अर्थात्
संसार में पतिव्रता नारी ही धन्य है, दूसरी नहीं।वही विशेषरूप से पूजनीय है। पतिव्रता सब लोगों को पवित्र करने वाली और समस्त पापराशि को नष्ट कर देनेवाली है ।शिवे! जो पति को परमेश्वर के समान मान कर प्रेम से उसकी सेवा करती है, वह इस लोक में सम्पूर्ण भोगों का उपभोग करके अन्त में कल्याणमयी गति को पाती है।
-उदाहरण स्वरूप- सावित्री, लोपामुद्रा,लक्ष्मी,स्वधा,सती,संज्ञा, सुमति, श्रद्धा मेना और स्वाहा आदि -ये तथा और भी बहुत सी स्त्रियां साध्वी कही गयी हैं।

निज चिन्तन
” “मन” में जो है “साफ-साफ कहना ही “हितकर” है——,
क्योंकि “सच” बोलने से ही “फैसले” होते हैं—-,

और “झूठ” बोलने से “फासले” बढ जाते हैं—–!

-चलते रहिये-

श्रीकृष्णं शरणं ममः

डाॅ गीता शर्मा
माँ गायत्री ज्योतिष अनुसंधान केन्द्र, कांकेर,छत्तीसगढ

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