जय श्री गणेश जी : आज बुधवार का पंचांग सूर्यसिद्धान्तीय दिनांक 15 अगस्त 2018 सूर्य पंचांग

जय श्रीराधेकृष्ण
-सूर्यसिद्धान्तीय-
-(सूर्य पंचांग रायपुर)

-दिनांक 15 अगस्त 2018
-दिन बुधवार
-सूर्योदय 05:29:01
-सूर्यास्त 18:12:49
-दक्षिणायन
-संवत् 2075
-शक् 1940
-ॠतु- वर्षा
-श्रावण मास
-शुक्ल पक्ष
-चतुर्थी तिथि 07:26:42 परं पंचमी तिथि
-हस्त नक्षत्र 21:08:48 परं चित्रा नक्षत्र
– साध्य योग 24″19:51 परं शुभ योग
-प्रथम विष्टी करण 04:54
-द्वितिय बव करण 33:10
-राहुकाल-
12:01 / 13:31अशुभ
-अभिजीत 11:57 / 12 :50❎अशुभ
-सूर्य- कर्क राशि
-चन्द्र- कन्या राशि
(अहोरात्र)

डाॅ गीता शर्मा, ज्योतिष मनीषी, कांकेर छत्तीसगढ।
(7974032722)

-नागपंचमी 5
-जागृत पंचमी 5(उड़ीसा)
-प्रयागे दारागंज स्थले -नागवासुकी पूजनं दर्शनं
-यथोपचारं पूज्य तक्षकपूजा
-भद्रान्तः 07:26
-मृत्युबाण 17:12 उ

-स्वतान्त्र्यदिवस
-राष्ट्रीयध्वजोत्तोलनपूर्वकराष्ट्रगानं
-श्रावणमास
-पार्थिव शिवपूजन
(एक मास तक)
शाकत्यागव्रतं
– काश्यां नागकूपयात्रा ग्रामे ग्रामे यायामप्रदर्शनं
-भित्तौ लिखिता मृण्मयादि नागाः यथोपचार पूज्यः
-महर्षि अरविन्द जयंती
-चौरसिया दिवस

श्रावणमास

“भवाय भवनाशाय महादेवाय धीमहि।
उग्राय उग्रनाशाय शर्वाय शशिमौलिने।।” (शि पु 20/43)

उक्तमंत्र द्वारा विद्वान उपासक भगवान शंकर की पूजा करें।यह भ्रम छोड़कर उत्तम भाव- भक्ति से शिव की अराधना करें; क्योंकि भगवान शिव भक्ति से ही मनोवांच्छित फल देते हैं।

“दुर्गेया शाम्भवी माया सर्वेषां प्राणिनामिह।
भक्तं विनार्पितात्मानं तया सम्मोह्यते जगत्।।”
(शि पु रू सृ 2/25)

-वास्तव में इस संसार के भीतर सभी प्राणियों के लिये शम्भू की माया को जानना अत्यन्त कठिन है।जिसने भगवान शिव के चरणों में अपने आपको समर्पित कर दिया है, उस भक्त को छोड़ कर शेष सारा जगत उनकी माया से मोहित हो जाता है।

“ध्यानयज्ञात्परं नास्ति ध्यानं ज्ञानस्य साधनम्।
यतः समरसं स्वेष्टं योगी ध्यानेन पश्यति।।”
(शिवपुराण रू सृ खं 12/46)

ध्यानयज्ञ से बढ़ कर कोई वस्तु नहीं।ध्यान ज्ञान का साधन है; क्योंकि योगी ध्यान के द्वारा अपने इष्टदेव समरस शिव का साक्षात्कार करता है।

ज्योतिष

जिनकी जन्म कुण्डली में सूर्य पापाक्रान्त, शत्रु राशिस्थ व नीच राशिगत होकर सप्तमस्थ होकर कुपित हो, उनका दाम्पत्य जीवन मधुर सरस सफल नहीं रह जाता। उन्हें सूर्य की उपासना करनी चाहिये ।

गाय, पितर, ब्राह्मणों की सेवा करने से सूर्यदेव
प्रसन्न होते हैं।उनकी उग्रता का शमन होता है।
आदित्य ह्रदयस्तोत्र का पाठ भी सूर्यदेव के कुप्रभाव को क्षीण करता है।

सूर्यपिता का कारक ग्रह है।जिसके गृह में पिता दुःखी बेबस हैं उन्हें सूर्य का क्रोध ( ताप) जला (दुःखी करता है) डालता है ।
अतः अपने वृद्ध माता पिता की सेवा करें।आपके सूर्य शीतल होंगे। दाम्पत्य- जीवन में आई बाधा दूर होगी।

सूर्य के मंत्र से सूर्य को जल अर्घ्य भी देना चाहिये।
सूर्य से आत्मा प्रतिष्ठा,मान-सम्मान तथा आरोग्यता आदि का भी विचार किया जाता है।आत्माकारक ग्रह सूर्य जातक-जातिका के आन्तरिक गुण, दोष , शक्ति, चालचलन एवं उच्च अभिलाषा का भी बोध कराता है।सूर्य राजकीय शासकीय सेवा से भी जोड़ता है।

निज चिन्तन
“कृत्रिम” “प्रेम” बहुत दिनो तक “नहीं” चल सकता —-,
और—–,
“स्वाभाविक” “प्रेम” की “नकल” नहीं हो सकती।

(चलते रहिये)

श्रीकृष्णं शरणं ममः

डाॅ गीता शर्मा , ज्योतिष मनीषी,
माँ गायत्री ज्योतिष  अनुसंधान केन्द्र, कांकेर,छत्तीसगढ
(7974032722)

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Top
error: Content is protected !!