हर साल आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवशयनी एकादशी मनाई जाती है।

देवशयनी एकादशी से भगवान विष्णु 4 महीनों के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं।

जब श्रीहरि विष्णु योगनिद्रा में होते हैं, तब भोलेनाथ सृष्टि का संचालन करते हैं।

इन 4 महीनों में कोई भी नया व्यवसाय शुरू करना वर्जित माना गया है।

इस दौरान गृह प्रवेश, नामकरण, भूमि पूजन, तिलक  जैसे मांगलिक कार्य न करें।

चातुर्मास में तामसिक भोजन जैसे मांस, मदिरा, प्याज, लहसुन आदि का सेवन न करें।

इस अवधि में दही, मूली और साग का सेवन वर्जित माना गया है।

इस दौरान जप, तप, दान, व्रत, गायत्री मंत्र और ध्यान का विशेष महत्व है।

चातुर्मास संयम, श्रद्धा और साधना का काल है।

इन नियमों का पालन करने से धार्मिक लाभ व पुण्य की प्राप्ति होती है।