रक्षाबंधन भाई-बहन के रिश्ते को समर्पित पावन पर्व है।

इस साल रक्षाबंधन सावन पूर्णिमा के दिन मनाया जाएगा।

सुबह 5:35 बजे से दोपहर 1:24 बजे तक राखी बांधने का श्रेष्ठ मुहूर्त है ।

इस दिन बहनें भाई को राखी बांधती हैं और उनके लंबी उम्र की कामना करती हैं।

श्रीकृष्ण को जब हाथ में चोट लगी, द्रौपदी ने अपनी साड़ी फाड़कर उनकी उंगली पर बांध दी।

लक्ष्मीजी ने वामन अवतार में भगवान विष्णु को लाने के लिए राजा बलि को राखी बांधी।

चित्तौड़ की रानी कर्णावती ने मुगल बादशाह हुमायूं को राखी भेजी।

रक्षाबंधन केवल एक परंपरा नहीं, यह एक भावना है –प्रेम, कर्तव्य और विश्वास की।

यह हमें सिखाता है कि रिश्तों को निभाना एक रस्म नहीं,बल्कि एक ज़िम्मेदारी है।