जय श्रीराधेकृष्ण! सूर्यसिद्धान्तीय (सूर्य पंचांग रायपुर) दिनांक 17 अक्टूबर 2018 बुधवार

जय श्रीराधेकृष्ण!

-सूर्यसिद्धान्तीय
-(सूर्य पंचांग रायपुर)

-दिनांक 17
अक्टूबर 2018
-बुधवार
-सूर्योदय 05:44:23
-सूर्यास्त 05:18:27
-दक्षिणायन
-संवत् 2075
-शक् 1940
-ऋतु- शरद
-आश्विन मास
-शुक्ल पक्ष
-अष्टमी तिथि 11:55:29
परं नवमी तिथि
-उत्तराषाढ़ा नक्षत्र 21:34:57
परं श्रवण नक्षत्र
-सुकर्मा योग 10:08:06 परं धृति योग
-प्रथम बव करण 15:08
-द्वितिय बालव करण 48:03
-राहुकाल-
12:00 / 13:30 अशुभ
-अभिजीत 11:41/ 12 :28 ❎अशुभ
-सूर्य- कन्या राशि
-चन्द्र- मकर राशि (अहोरात्र)

डाॅ गीता शर्मा, ज्योतिष मनीषी, कांकेर छत्तीसगढ।
(7974032722)

-श्रीदुर्गाष्टमी 8 व्रतं
-महाष्टमी व्रतं
-महागौरीदेवीदर्शनं
-सिद्धिदात्रीपूजनं
-श्रीसरस्वती बलिदानं
– हवनाष्टमी 8
-अन्नपूर्णा परिक्रमा (11:55 यावत्)

-आश्विनीमासः
-नवरात्रि पर्व
-महागौरीदेवीदर्शनं
-महागौरीपूजनं
-नवमी बलिपूजनं

*नवरात्रि महापर्व*➖
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या देवि! सर्वभूतेषु!
-नवरात्रि महापर्व, शक्ति आराधना, उपासना, साधना, का पर्व है ।इन्द्रियों के संयमन एवं आसुरी प्रवत्तियों पर नियंत्रण का यह पर्व है।
दुर्गादेवी की दिव्य शक्तियां समस्त विश्व में , समस्त सृष्टि में, समस्त ब्रह्माण्ड में व्याप्त हैं।देवी शक्ति के जितने भी अवतार हुये उन सभी देवियों ने किसी न किसी असुर का संहार कर जगत की रक्षा की है।

“सर्वस्वरूपे सर्वेशे सर्व शक्ति समन्विते।
भयेभ्यस्त्रहि नो देवी दुर्गे देवी नमोऽस्तुते।।”
अपने नित्य के इष्ट-मंत्र का जप करके ही महागौरी श्रंगारपूजन पश्चात हवन करिये।

श्रीमद् भगवद् गीता
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विश्व में गीता का समादर है।भारत में प्रकट हुई गीता विश्व मनीषा की धरोहर है।
अतः इसे राष्ट्रीय शास्त्र का मान देकर कलह-कष्ट से पीड़ित विश्व की जनता को शान्ति देने का प्रयास आवश्यक है।

“अस्माकं तु विशिष्टा ये तान्निबोध द्विजोत्तम।
नायका मम सैन्यस्य संज्ञार्थं तान्ब्रवीमि।।”
(प्र अ 7)
अर्थात्➖द्विजोत्तम!
हमारे पक्ष में जो जो प्रधान हैं, उन्हें भी आप समझ लें।आपको जानने के लिये मेरी सेनाके जो नायक हैं, उनको कहता हूं—– ,
क्रमशः-

गीता में अन्तःकरण की दो प्रवत्तियों का संघर्ष है।जिसमें द्वैत का आचरण ही द्रोण है।जब तक प्रकृति विद्यमान है , द्वैत बना है।इस “द्वि” पर जय पाने की प्रेरणा प्रथम गुरू द्रोणाचार्य से मिलती है ।अधूरी शिक्षा ही पूर्ण जानकारी के लिये प्रेरणा प्रदान करती है ।

निज चिन्तन➖

“सत्य” “परेशान” हो सकता है—-,
लेकिन “पराजित” नहीं—–,
“झूठ” “परेशान” कर सकता है—-;
-पर “जीत” नहीं सकता—-!?

(चलते रहिये)
श्रीकृष्णं शरणं ममः

डाॅ गीता शर्मा
माँ गायत्री ज्योतिष अनुसंधान केन्द्र, कांकेर,छत्तीसगढ

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