बुद्धि के देव भगवान गणेश: पूजा का महत्व, आरती

worship of lord ganesha on wednesday puja vidhi and niyam

भगवान गणपति यानी भगवान श्री गणेश की पूजा के लिए बुधवार विशेष दिन माना जाता है। वैसे तो हर शुभ काम के पहले गणेशजी की पूजा-अर्चना की जाती है, लेकिन बुधवार को पूजा से भगवान गणेश प्रसन्न हो जाते है। बुधवार को भगवान गणेश की पूजा करने से हर विघ्न और बाधाएं दूर हो जाती है। भगवान गणेश कुंडली के अशुभ योग भी दूर करते हैं।




श्री गणेश दुख के हर्ता और खुशियों के दाता है। भगवान गणेश को मंगल मूर्ति कहा जाता है। सच्चे मन से भगवान गणेश की पूजा की जाए तो जीवन की सारी समस्याएं एक-एक करके दूर हो जाती है।

भगवान गणेश की पूजा के लिए यह करें
-भगवान गणेश को पहले साफ पानी से नहलाएं
– सिंदूर और चंदन लगाएं
-यज्ञोपवीत, दूर्वा, लड्डू या गुड़ से बनाई गई किसी भी प्रकार की मिठाई चढ़ाएं
-धूप और दीप जलाएं और आरती करें

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पत्ते करें अर्पित
भगवान गणेश की पूजा सबसे आसान है, भगवान गणेश की पूजा पत्तों से भी की जा सकती है। पत्तों से की गई आराधना बेहद फलती है। पत्ते अलग-अलग मंत्रों के साथ भगवान गणेश को अर्पित करने से मनोकामना पूरी होती है। गणेशजी को सुबह किसी भी समय पूरी श्रद्धा के साथ पत्ते अर्तित करें।

श्री गणेश के 5 दिव्य पौराणिक मंत्र :-
1. – श्री गणेशाय नम:
2. – ॐ श्री गणेशाय नम:
3. – गं गणपतये नम:
4. – ॐ गं गणपतये नम:
5. – ॐ गं ॐ

इनमें से कोई एक मंत्र 21 बार या श्रद्धानुसार शुभ संख्या में स्मरण करने के बाद सुंगधित धूप और घी के दीप से श्री गणेश की आरती सपरिवार श्रद्धा और भक्ति से करें।
भगवान श्री गणेश बुद्धि के दाता होने के साथ भय, चिंता दूर करने वाले देवता हैं। इनका किसी भी समय स्मरण किया जा सकता है।
गणेश गायत्री मंत्र से पाएं हर प्रकार की सिद्धि
सुबह सूर्योदय से पहले जागें और स्नान करें।
घर या देवालय में पीले वस्त्र पहन श्री गणेश की पूजा सिंदूर, दूर्वा, गंध, अक्षत, अबीर, गुलाल, सुंगधित फूल, जनेऊ, सुपारी, पान, मौसमी फल व भोग में लड्डू/मोदक अर्पित करें।
पूजा के बाद पीले आसन पर बैठ नीचे लिखे अचूक श्री गणेश मंत्र से पूजन संपन्न करें।

गणेश गायत्री मंत्र:-
एकदंताय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दंती प्रचोदयात्।।
महाकर्णाय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दंती प्रचोदयात्।।
गजाननाय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दंती प्रचोदयात्।।

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