मंगलवार का पंचांग, राशिफल, व्रत त्योहार और राशियों के हाल और ग्रहों की चाल

pandit priya sharan tripathi

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आज हम बात करेंगे आज यानी मंगलवार का राशिफल, पंचांग, व्रत त्योहार और राशियों के हाल और ग्रहों की चाल की साथ ही .., इसके साथ ही पंडित पी. एस. त्रिपाठी आपको बताएंगे सफलता पाने के लिए क्या ग्रही उपाय करें और कैसे स्वयं कठिन समय में भी संभालें…

आज का पंचांग aaj ka panchang in hindi

दिनांक 20.03.2018

शुभ संवत 2074 शक 1939

सूर्य उत्तरायणयन का …

चैत्र शुक्ल पक्ष…. तृतीया तिथि… सायं 04 बजकर 44 मिनट तक … मंगलवार… अश्विनी नक्षत्र.. रात्रि 07 बजकर 45 मिनट तक … आज चन्द्रमा …मेष राशि में… आज का राहुकाल दिन को 03 बजकर 12 मिनट से 04 बजकर 43 मिनट तक होगा …

 

दुर्गा जी का चंद्रघंटा अवतार देता है आध्यात्मिक शांति –

दुर्गा जी का तीसरा अवतार चंद्रघंटा हैं। देवी के माथे पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र होने के कारण इन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है। अपने मस्तक पर घंटे के आकार के अर्धचन्द्र को धारण करने के कारण माँ ‘चंद्रघंटा’ नाम से पुकारी जाती हैं। अपने वाहन सिंह पर सवार माँ का यह स्वरुप युद्ध व दुष्टों का नाश करने के लिए तत्पर रहता है। चंद्रघंटा को स्वर की देवी भी कहा जाता है। दिव्य रुपधारी माता चंद्रघंटा की दस भुजाएं हैं। मां के इन दस हाथों में ढाल, तलवार, खड्ग, त्रिशूल, धनुष, चक्र, पाश, गदा और बाणों से भरा तरकश है। मां चन्द्रघण्टा का मुखमण्डल शांत, सात्विक, सौम्य किंतु सूर्य के समान तेज वाला है। इनके मस्तक पर घण्टे के आकार का आधा चन्द्रमा भी सुशोभित है। जब महिषासुर के साथ माता दुर्गा का युद्ध हो रहा था, तब माता ने घंटे की टंकार से असुरों का नाश कर दिया था। इसलिए नवरात्रि के तृतीय दिन माता के इस चंद्रघण्टा रूप का पूजन किया जाता है। देवी चंद्रघंटा का स्वरूप सदा ही युद्ध के लिए उद्यत रहने वाला दिखाई देता है। माना जाता है कि इनके घंटे की तेज व भयानक ध्वनि से दानव, अत्याचारी और राक्षस डरते हैं। देवी चन्द्रघंटा की भक्ति से आध्यात्मिक और आत्मिक शक्ति प्राप्त होती है। जो व्यक्ति माँ चंद्रघंटा की श्रद्धा एवं भक्ति भाव सहित पूजा करता है उसे मां की कृपा प्राप्त होती है जिससे वह संसार में यश, कीर्ति एवं सम्मान प्राप्त करता है। इनके घंटे की ध्वनि सदैव भक्तों की प्रेत-बाधा आदि से रक्षा करती है तथा उस स्थान से भूत, प्रेत एवं अन्य प्रकार की सभी बाधाएं दूर हो जाती है। इनकी आराधना से मनुष्य के हृदय से अहंकार का नाश होता है तथा वह असीम शांति की प्राप्ति कर प्रसन्न होता है। माँ चन्द्रघण्टा मंगलदायनी है तथा भक्तों को निरोग रखकर उन्हें वैभव तथा ऐश्वर्य प्रदान करती है। उनके घंटो मे अपूर्व शीतलता का वास है। देवी चन्द्रघण्टा भक्त को सभी प्रकार की बाधाओं एवं संकटों से उबारने वाली हैं. इस दिन का दुर्गा पूजा में विशेष महत्व बताया गया है तथा इस दिन इन्हीं के विग्रह का पूजन किया जाता है. माँ चंद्रघंटा की कृपा से अलौकिक एवं दिव्य सुगंधित वस्तुओं के दर्शन तथा अनुभव होते हैं…

पूजा विधि

नवरात्री के तीसरे दिन माता की पूजा के लिए सबसे पहले कलश की पूजा करके सभी देवी देवताओं और माता के परिवार के देवता, गणेश, लक्ष्मी, विजया, कार्तिकेय, देवी सरस्वती, एवं जया नामक योगिनी की पूजा करें उसके बाद फिर माता देवी चन्द्रघंटा की पूजा अर्चना करें। माता चंद्रघंटा की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। इसके बाद गंगा जल या गोमूत्र से शुद्धिकरण करें। चैकी पर घड़े में जल भरकर उस पर नारियल रखकर कलश स्थापना करें। इसके बाद पूजन का संकल्प लें और वैदिक एवं सप्तशती मंत्रों द्वारा मां चंद्रघंटा सहित समस्त स्थापित देवताओं की षोडशोपचार पूजा करें। इसमें आवाहन, आसन, पाद्य, अध्र्य, आचमन, स्नान, वस्त्र, सौभाग्य सूत्र, चंदन, रोली, हल्दी, सिंदूर, दुर्वा, बिल्वपत्र, आभूषण, पुष्प-हार, सुगंधितद्रव्य, धूप-दीप, नैवेद्य, फल, पान, दक्षिणा, आरती, प्रदक्षिणा, मंत्रपुष्पांजलि आदि करें। तत्पश्चात प्रसाद वितरण कर पूजन संपन्न करें। श्री दुर्गा सप्तशती का एक से तीन तक अध्याय पढ़ें।

 

मां का भोग

मां चंद्रघंटा मां चंद्रघंटा को दूध और उससे बनी चीजों का भोग लगाएं और और इसी का दान भी करें। ऐसा करने से मां खुश होती हैं और सभी दुखों का नाश करती हैं। इसमें भी मां चंद्रघंटा को मखाने की खीर का भोग लगाना श्रेयकर माना गया है। भेंट में कलश और मंदिर की घंटी भेंट करना चाहिए।

– दुर्गा माँ के हाथ में शंख ‘‘प्राणवायु’’ या ष् ॐ ष् का प्रतीक है,जिसकी ध्वनि भगवान की उपस्थिति का प्रतीक है ।

– धनुष और तीर ऊर्जा का प्रतिनिधित्व करते हैं। धनुष और तीर दोनों एक हाथ में पकड़ कर माँ यह दर्शा रही है ऊर्जा के दोनों रूपों क्षमता और गति पर नियंत्रण कैसे किया जाता है ।

– वज्र दृढ़ता का प्रतीक है। भक्त वज्र की तरह शांत होने चाहिए किसी की प्रतिबद्धता में। व्रज की तरह वह सभी को तोड़ सकता है जिससे भी वह टकराता है।

– दुर्गा माँ के हाथ में कमल पूरी तरह से खिला हुआ नहीं है, यह सफलता नहीं बल्कि अन्तिम की निश्चितता का प्रतीक है। संस्कृत में कलम को ‘पंकजा’ कहा जाता है जिसका मतलब है कीचड़ में जन्मा हुआ। इस प्रकार, कमल वासना और लालच की सांसारिक कीचड़ के बीच श्रद्धालुओं का आध्यात्मिक गुणवत्ता के सतत विकास के लिए खड़ा है ।

– चक्र इच्छा के अधीन का प्रतीक है और उनके आदेश का भी। वह बुराई को नष्ट करने और धर्म के विकास के लिए अनुकूल वातावरण का निर्माण करने के लिए इस अमोघ हथियार का उपयोग करती है।

– तलवार जो माँ एक हाथ में पकड़ती है वह ज्ञान का प्रतिनिधित्व करता है, जो तेज होता है। सभी संदेहों से मुक्त है जो ज्ञान, तलवार की चमक का प्रतीक है।

– त्रिशूल तीन गुणों का प्रतीक है और वह तीन प्रकार के दुःख मिटाती है शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक।

 

मंत्र- छात्रों, संगीतकारों और साहित्यकारों के लिए-

सरस्वती महाभागे विद्ये कमललोचने। विद्यारूपे विशालाक्षि विद्यां देहि नमोस्तु ते।।

ऊं ह्रीं क्लीं वाग्वादिनी देवी सरस्वती मम् जिह्वाग्रे वासं कुरु-कुरु स्वाहा।

 

माँ चंद्रघंटा का मंत्र –

स्वर्ण के समान उज्जवल वर्ण वाली माँ चंद्रघंटा की पूजा का यह मंत्र है-

पिण्डजप्रवरारुढा चण्डकोपास्त्रकैर्युता।

प्रसादं तनुते मह्यां चन्द्रघण्टेति विश्रुता॥

 

ध्यान मंत्र

 

पिण्डजप्रवरारूढ़ा चण्डकोपास्त्रकैर्युता।

 

प्रसादं तनुते मह्रयं चन्द्रघण्टेति विश्रुता॥

 

माँ चंद्रघंटा का उपासना मंत्र-

 

समस्त भक्त जनों को देवी चंद्रघंटा की वंदना करते हुए कहना चाहिए

” या देवी सर्वभूतेषु चन्द्रघंटा रूपेण संस्थिता. नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः”..

 

कुछ उपाय जो नवरात्र में करने चाहिए

– कच्चे आटे की लोई में गुड भरकर मछली को खिलायें।

– कमल गट्टे से आहुति दें।

– कौड़ी और हर सिंगार की जड़ को रोली, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप से पूजन करके रखें, ऋण से मुक्ति प्राप्त होगी।

– कमल की पंखुड़ियों में आज के दिन माता को मक्खन मिसरी का भोग लगाकर लौंग और कपूर की आहुति दे सकते हैं।

– केले के पेड़ की जड़ में रोली, चावल, फूल और जल अर्पित करें और नवमी वाले दिन केले के पेड़ की थोड़ी सी जड़ तिजोरी में रखें कर्ज से मुक्ति होगी।

 

नवरात्र के तीसरे दिन मां दुर्गा की जिस तीसरी शक्ति पूजा-अर्चना की जाती है, उन सांसारिक कष्टों से मुक्ति मिलती है। इनकी आराधना से मनुष्य के हृदय से अहंकार का नाश होता है तथा वह असीम शांति की प्राप्ति कर प्रसन्न होता है। माँ चन्द्रघण्टा मंगलदायनी है तथा भक्तों को निरोग रखकर उन्हें वैभव तथा ऐश्वर्य प्रदान करती है। उनके घंटो मे अपूर्व शीतलता का वास है।

 

आज के राशियों का हाल तथा ग्रहों की चाल-

 

मेष राशि –

भौतिक सामानों कि खरीदी …..

घरेलू यात्रा की भी संभावना….

व्यय अधिक हो सकता है….

बुध के उपाय –

उॅ बुं बुधाय नमः का जाप करें…..

देवीजी में हरे वस्त्र, हरी चूड़िया चढ़ायें….

दूबी तथा मूंग बनी मिठाईयाॅ चढ़ायें…सभी में वितरित करें….

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वृषभ –

सरप्राइज उपहार मिल सकता है….

सामाजिक यश की प्राप्ति….

इलेक्ट्रानिक्स की खरीदी संभव….

नित्यचर्या में सावधान रहें…

राहु के उपाय –

उॅ रां राहवे नमः का जाप करें….

देवीजी में नीले वस्त्र का चढावा चढ़ायें….

देवी दर्शन को आये भक्तजनों के पानी की व्यवस्था करें….

 

मिथुन –

गजब का उत्साह एवं उर्जा रहेगी…

सामुहिक उत्सव में सम्मिलित होगें….

लोगों को आपकी नई हुनर से परिचय होगा…

आतुरता का त्याग करें….संयमित रहें….

केतु जन्य दोषों को दूर करने के लिए –

उॅ कें केतवे नमः का जाप करें….

देवी में हल्दी, नारियल…मिष्ठान का चढ़ावा चढ़ायें….

गाय…कुत्ता को आहार खिलायें…

कर्क –

संपत्ति या वाहन की खरीदी संभव….

आध्यामिक अवसर में शामिल होंगे…

सीनियर से लाभ तथा प्रषंसा की प्राप्ति….

सूर्य के उपाय –

उॅ धृणिः सूर्याय नमः का जाप करें….

मातृशक्ति भगवती गायत्री की आराधना करें….

लाल वस्त्र…लाल पुष्प चढ़ायें…

पंजीरी का प्रसाद चढ़ाकर वितरित करें….

 

सिंह –

लेखन या आर्ट के क्षेत्र में प्रसिद्धि मिल सकती है…..

किसी आत्मीय से मुलाकात…

आलस्य तथा भावुकता का असर रहेगा….

यात्रा की वापसी के बाद थकान….

चंद्रमा के उपाय –

उॅ सों सोमाय नमः का जाप करें….

दूध…घी…फूल, नारियल का काम या वितरण करें….

सफेद मिष्ठान का दान कुवारी कन्याओं को करें….

सफेद वस्त्र धारण करें……

 

कन्या –

सामाजिक कार्यक्रम के संचालन का दायित्व मिलेगा….

शुभ समाचार की प्राप्ति होगी…

मातृपक्ष से लाभ…..

स्वास्थ्यगत कष्ट संभव….

शनि के उपाय-

उॅ शं शनैश्चराय नमः का जाप करें….

माता को जामुनिया रंग के वस्त्र चढ़ायें….

काली वस्तु का चढ़ावा चढ़ायें….

 

तुला –

कार्य अधिकता से पारिवारिक नाराजगी संभव…

वाहन आदि की खरीदी होगी….

पिता तथा बाॅस से लाभ….

आहार का असयंम हानिकारक….

मंगलजन्य दोषों की निवृत्ति के लिए –

उॅ अं अंगारकाय नमः का जाप करें….

माता में लाल वस्त्र चढ़ायें…

लड्डू का प्रसाद बाॅटें…

तुलसी का सेवन करें….

 

वृश्चिक –

परिवार के साथ घरेलू यात्रा….

पारिवारिक धार्मिक कर्म करेंगे….

बड़ों से लाभ

नौकरी में उन्नति की शुभ सूचना मिल सकती है….

गुरू के उपाय करें –

उॅ गुं गुरूवे नमः का जाप करें….

देवी जी में पीला वस्त्र…

पीले पुष्प, लड्डू का भोग लगायें….

केला चढ़ायें…

 

धनु –

पुरानी उधारी की प्राप्तियाॅ….

वस्त्र या कीमती वस्तु की खरीदी संभव….

नये अवसर की उपलब्धि संभव…

दोस्तों का साथ मिलेगा….

शुक्र के उपाय-

उॅ शुक्र शुक्राय नमः का जाप करें….

माता का दूध दही से अभिषेक करें….

लाल वस्त्र…पुष्प से श्रृगांर करें….

दुर्गासप्तशती का पाठ करें…..

मकर –

नई उपलब्धि हासिल होगी…

धार्मिक स्थल की यात्रा संभव….

कुटुंब या पारिवारिक प्रसिद्धि से लाभ….

मौसमी बीमारी से कष्ट…

शनि के उपाय-

उॅ शं शनैश्चराय नमः का जाप करें….

आज देवी को जामुनिया…नीले…वस्त्र से तैयार करें….या चढ़ायें….

तिल…गुड….से बने लड्डू का भोग लगायें….

सभी भक्तजनों को प्रसाद वितरित करें….

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कुंभ –

पारिवारिक संपत्ति में भागीदारी मिलेगी….

दोस्तों के साथ यात्रा….

पार्टनर या ससुराल से लाभ…..

चोट की आषंका….

सूर्य के उपाय –

उॅ धुणिः सूर्याय नमः का जप करें….

मातृशक्ति भगवती गायत्री की आराधना करें….

लाल वस्त्र…लाल पुष्प चढ़ायें…

पंजीरी का प्रसाद चढ़ाकर वितरित करें….

 

मीन –

षिक्षा के क्षेत्र में सफलता….

प्रतियोगिता परीक्षा या नौकरी में चयन से बदलाव संभव….

घर लौटेंगे पारिवारिक तथा दोस्तों से मुलाकात….

भावुक रिष्तें में तनाव….

 

मंगल के उपाय –

 

ओं अं अंगारकाय नमः का जाप करें…..

माता में लाल वस्त्र चढ़ायें…

लड्डू का प्रसाद बाॅटें…

तुलसी का सेवन करें….

 

 

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