हिंदू : एक कौम जो अपने गौरवमयी इतिहास को भुला बैठी है

atala devi mandir
दुनिया में हिंदू ही एक ऐसी कौम है, जो ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ के छलावे में रहकर दूसरी कौमों को अपनी जमीन पर आने देती रही और वे यहां आकर लूट मचाते रहे। आखिरकार इस कौम की सत्ता पश्चिम में सुदूर ईरान और पूरब में कंबोडिया से सिमटकर अब महज अरुणाचल से गुजरात तक सिकुड़ चुकी है। और यह भी भ्रम है कि वर्तमान भारत में हिंदुत्व की सत्ता है। जरा केरल, मेघालय या मणिपुर चले जाइए, ईसाइयों का प्रभुत्व साफ महसूस करेंगे। जरा आजमगढ़, मुजफ्फरनगर, जौनपुर चले जाइए, आपको छोटे-मोटे कई पाकिस्तान मिल जाएंगे।
बीते दिनों मेरे पढ़ने में इतिहास की कुछ ऐसी कड़वी सच्चाइयां आईं, जिन्होंने हृदय को भीतर तक भेद दिया। मुझे लगता है कि एक सीरीज के रूप में आप सबको उन सच्चाइयों से परिचित करवाना चाहिए। इन्हें आप महज ‘रोचक किस्से’ मानकर मत पढि़एगा, बल्कि इसलिए पढि़एगा ताकि आप अपने अतीत की हार से सबक ले सकें और वर्तमान को समझकर भविष्य को बचा सकें।



अतला देवी मंदिर, जो अब अटाला मस्जिद है

आप गूगल या विकिपीडिया पर जौनपुर लिखेंगे तो इतिहास के रूप में आधा सच और आधा झूठ लिखा मिलेगा। उत्तरप्रदेश के इस नगर के बारे में लिखा है कि इसे ’14वीं शताब्दी में फिरोज तुगलक ने अपने चचेरे भाई सुल्तान मुहम्मद की याद में बसाया था। सुल्तान मुहम्मद का वास्तविक नाम जौना खां था। इसी कारण शहर का नाम जौनपुर रखा गया।’
मगर ये सच नहीं बताया जाएगा कि 14वीं शताब्दी के पहले इसी जगह पर कन्नौज के ​हिंदू राजा विजय चंद्र द्वारा बसाया गया एक सुंदर नगर हुआ करता था। ये राजा विजय चंद्र, महान हिंदू राजा पृ​थ्वीराज चौहान के ससुर थे। उन्होंने इसी नगर में विशाल मुकुटघाट मंदिर और मां अतला देवी का विराट मंदिर बनवाया था। जिसे बाद में फिरोजशाह तुगलक नामक मुस्लिम आक्रांता ने तहस-नहस कर दिया।
आपको बताया जाएगा कि ‘1394 के आसपास मलिक सरवर ने जौनपुर को शर्की साम्राज्य के रूप में स्थापित किया। शर्की शासक कला प्रेमी थे। उनके काल में यहां अनेक मकबरों, मस्जिदों और मदरसों का निर्माण किया गया। यह शहर मुस्लिम संस्कृति और शिक्षा के केन्द्र के रूप में भी जाना जाता है।’



मगर यह नहीं बताया जाएगा कि ये मस्जिदें मंदिरों को तहस—नहस कर उन्हीं के सजे—धजे सुंदर खंभों पर खड़ी  की गई हैं।
इतिहास और वर्तमान की विडंबना देखिए कि आज अगर आप जौनपुर के पर्यटन स्थलों के बारे में खोज-खबर लेंगे तो सबसे पहले आपको यहां बनी विशाल ‘अटाला मस्जिद’ की जानकारी मिलेगी। यह अटाला मस्जिद 14वीं शताब्दी के पहले ‘विशाल अतला देवी मंदिर’ हुआ करता था। जिसके शिखर को तोडकर वहां मस्जिद का गुंबद बना दिया गया। हिंदू शैली के खंभों पर इस्लाम की छाप के रूप में नक्काशी कर दी गई। और इस तरह एक विशाल मंदिर, मस्जिद में बदल दिया गया।
आश्चर्य कि अतला देवी का अब जौनपुर के इतिहास में नाम तक नहीं। न हिंदुओं को इसकी खबर है कि उनकी ऐसी कोई देवी भी थी, जो उस समय के हिंदू राजाओं की आराध्य हुआ करती थीं और न इस शर्मनिरपेक्ष देश में रह रहे मुस्लिमों को इस बात का मलाल कि उनके पूर्वजों ने इस मिट्टी को कितने घाव दिए।


हे मां अतला देवी, मोटे सैलेरी पैकेज लेने, अपने काम—धंधों को बढाने और पॉपकॉर्न खाते हुए पिच्चर देखने में मशगूल अपने हिंदू बेटों पर दया करते हुए इन्हें क्षमा कर देना, क्योंकि इनमें अपने इतिहास को जानने और उससे सबक लेने की ललक तक नहीं।
(-पत्रकार ईश्वर शर्मा जी द्वारा लिखी गई महत्वपूर्ण जानकारी। )
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