रामकृष्ण परमहंस: ऐसे महान संत जिन्होंने सभी धर्मों की एकता पर जोर दिया

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रामकृष्ण परमहंस एक ऐसे महान संत और विचारक थे, जिन्हें भारत में ही नहीं विदेशों में भी आज भी पहचाना जाता है। रामकृष्ण परमहंस ने शुरू से ही सभी धर्मों की एकता के लिए बात की।
उन्हें अपने बचपन में ही भरोसा हो गया था कि ईश्वर से मिला जा सकता है। इसके चलते वे बचपन से ही ईश्वर से मिलने के लिए कठोर साधना व ईश्वर की भक्ति करने में जुट गए। स्वामी रामकृष्ण मानवता के पुजारी कहलाए। उन्होंने सभी धर्मों की एकता के लिए कई संदेश दिए। एक बार उन्होंने कहा था कि सभी धर्म सच्चे है। सिर्फ ईश्वर के पास पहुंचने के रास्ते भिन्न-भिन्न हैं।
18 फरवरी 1836 को बंगाल के कामारपुकुर गांव में जन्मे रामकृष्ण परमहंस बाल सुलभ सरलता और मंत्रमुग्ध मुस्कुराहट से हर किसी को सम्मोहित करने के अच्छे जानकार थे। 16 अगस्त 1886 ई. के दिन श्रीरामकृष्ण ने नश्वर देह का त्याग किया और महासमाधि ले ली।

रामकृष्ण परमहंस के उपदेश
रामकृष्ण परमहंस उपदेश में आज भी जिंदा हैं। वे छोटे-छोटे किस्सों के माध्यम से लोगों को शिक्षा देते थे। एक बार कलकत्ता के बुद्धिजीवि वर्ग के लोगों पर बेहद चमत्कारी असर छोड़ा था। यह बात ओर हैं कि उनके विचार राष्ट्र की आजादी और आधुनिकताओं से भिन्न थे। मगर उनके आध्यात्मिक आंदोलन ने परोक्ष रूप से देश में राष्ट्रवाद की भावना को बढऩे में बड़ा योगदान दिया है। उनकी शिक्षा जातिवाद एवं धार्मिक पक्षपात से दूर है।

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