जब हनुमान जी ने सूर्यदेव को आकाश फल समझ मिटाई थी भूख

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relationship between Surya Dev and Hanuman and the reason why  Hanuman is also known as Sankat Mochan
हनुमान जी ने बचपन में सूरज को देखा, वह लाल रंग का था। हनुमानजी को लगा कि यह कोई फल है, यह मुझे खाना हैं। इसके बाद वे सूर्य के पीछे दौड़ते हैं और सूर्य को अपने मुंह में रख लेते हैं। इंद्रदेव ने देखा कि यह बच्चा कहां से आया सूर्य देव को परेशान कर रहा है। तो उन्होंने हनुमानजी पर व्रज से प्रहार कर दिया, जिसके बाद हनुमानजी जमीन पर गिर पड़े।
वायुदेव को बहुत गुस्सा आता है, फिर सभी देवताओं ने माफी मांगी और हनुमानजी से सभी ग्रहों ने कहा तुम्हारी बात मानेंगे, सूर्य का पीछा छोड़ो। इसीलिए ज्योतिष शास्त्र में किसी भी ग्रह की शांति के लिए हनुमानजी की पूजन के बारे में बताया गया हैं। इसीलिए हनुमानजी को संकट मोचन कहा जाता हैं।

हनुमानजी को नारदजी ने दिखाया था आकाश फल

हनुमानजी से नारदजी भेंट हुई। नारदजी ने कुछ फल हनुमानजी को खाने के लिए दिए। सभी फल खा लेने के बाद हनुमानजी ने नारदजी से और फल मांगे। नारदजी ने कहा मेरे पास तो सारे फल खत्म हो गए।



हनुमानजी ने कहा मां भी मेरी भूख खत्म नहीं होने से परेशान होती हैं। इतने में नारद जी ने कहा, एक फल है, जो सारी भूख मिटा देगा, हनुमानजी को नारद जी ने सूरज दिखाया और कहा मेरी शुभकामनाओं को साथ आगे बढ़े और जाकर खा लो आकाश फल। दरअसल नारद जी के सामने सूर्य देव ने अहंकार किया था। इसका सबक सीखाने के लिए नारद जी ने हनुमानजी को आकाश फल दिखाकर सूर्य के पीछे लगा दिया।

काल देव रोका और समझाया लेकिन

सूर्य को आकाश फल समझकर खाने के लिए तेजी से आगे बढ़ रहे हनुमानजी को रोकने के लिए सूर्य देव ने काल देव को भेजा। हनुमानजी का रास्ता रोका और समझाया भयभित किया लेकिन  हनुमानजी तो सिर्फ भय को मन का भ्रम मानकर आपने पथ पर चले जा रहे थे। ऐसे में काल देव ने हनुमान जी को काल पथ पर डाल दिया। लेकिन नारद जी की बात हनुमानजी को बार-बार याद आ रही थी कि मार्ग में कई बाधाएं आएंगी लेकिन दृढ़ निश्चय अडिग नहीं होने देना।



काल देव ने हनुमानजी में भक्ति की असीम शक्ति भारी हुई थी, मां की वेदना मिटाने के लिए हनुमानजी वे  दृढ़ निश्चय करके चले थे। इसलिए वे भयभित नहीं हुए। काल देव को हनुमानजी ने बातों में फंसा लिया। हनुमानजी ने अपना रुप छोटा सा करके दिखाया और कहा काल देव आप ऐसा नहीं कर सकते, अगर कर सकते हों तो छोटा रुप लेकर मेरी हथेली पर खड़े होकर दिखाएं।
बातों में फंसे काल देव ने ऐसा किया तो हनुमानजी ने मुट्ठी बंद कर ली और महाकाल के अंश की मुट्ठी में बंद होकर रह गए और हनुमानजी ने अपनी यात्रा आगे बढ़ाई। फिर सूर्य को खाने के लिए निकल पड़े और मुंह में रख लिया।
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