राजिम कुंभ में आए ये नागा संत सिर्फ कारनामा ही नहीं, मरीजों को निकाल लाते हैं मौत के मुंह से

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राजिम कल्प कुंभ. हिंदू धर्म की संत धारा में नागा साधुओं का राष्ट्र और धर्म रक्षा में बड़ा योगदान है। अपने तप, हठ योग, ध्यान-साधना के बलबूते सनातन परंपरा की ताकत हर बार दिखाई है।
नागा महंत सत्यगिरी नागा बाबा (जिला मुंगेली, लोरमी तहसील, ग्राम सारधा) ने अपने प्राइवेट पार्ट से चमत्कार दिखाया तो देखने वाले हैरान रह गए। जब राजिम कल्प कुंभ में नागा साधु अपने बेहद नाजुक हिस्से से चमत्कार दिखा रहे थे, तब वहां देखने वाले संत की तपस्या के गवाह बन रहे थे।

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नागा बाबा महंत सत्यगिरी बताते हैं कि वे बीते 20 साल से साधना कर रहे है। वे इस साधना के बल पर लोगों के कई असाध्य रोगों का उपचार कर देते हैं। उन्होंने बताया कि काली मंदिर बिलासपुर में उन्होंने साधना शुरु की थी।

पहले से नहीं करते तैयारी

महंत सत्यगिरी नागा बाबा बताते हैं कि वे अपने प्राइवेट पार्ट से कुछ भी करतब दिखाते हैं तो उसके लिए पहले से कोई तैयारी नहीं होती हैं। शरीर के सबसे नाजुक हिस्से पर इतना वजन होने पर हम भी हैरान थे। इस मामले में हमने कई जानकार चिकित्सकों से भी पूछा तो उनका कहना है कि आम व्यक्ति ऐसा कारनामा नहीं कर सकता है, यह सिर्फ स्प्रिचुअल पॉवर से ही संभव हो सकता हैं।


सबकी मदद करना है नागा साधु का उद्देश्य

इस स्प्रिचुअल पॉवर के बारे में हमने महंत सत्यगिरी नागा बाबा से बात की तो उन्होंने कहा कि मेरा उद्देश्य सभी की मदद करना हैं। उन्होंने बताया कि मैं अपनी शक्तियों से कई लोगों की असाध्य बीमारियों को भी ठीक कर देता हूं।

महादेव की खास पूजन करते हैं नागा संत

नागा साधु संत भगवान महादेव के उपासक होते हैं। वे शिवजी की विशेष पूजन के साथ उन्हें भस्म भी चढ़ाते हैं। खास पूजन के साथ नागा संत भगवान शिव की तरह ही स्वयं को भी भस्म लगाते हैं। देश के बारह ज्योतिर्लिंगों में से उज्जैन महाकालेश्वर मंदिर में भगवान महाकाल की रोजाना सुबह भस्म आरती की जाती है और उन्हें भस्म लगाई जाती है। यही कारण है कि उनके उपासक नागा साधु भी स्वयं को भस्म लगाते हैं।

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