साल में दो बार दर्शन देते थे मौनी बाबा, मौन रहकर करते थे कई चौंकाने वाले चमत्कार

mouni baba funeral ganga ghat ujjain

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उज्जैन.
मौन रहकर साधना करने वाले देश के नामी संत मौनी बाबा अब हमारे बीच नहीं रहे, लेकिन उनकी सीखाई शिक्षाएं और साधना मौनी आश्रम उज्जैन में आज भी बताई जाती हैं, जिनके माध्यम से अाम लोग भी तप के बल पर स्वयं को साधक बना सकता है।
संत मौनी बाबा नम आंखों से मौनी बाबा को बिदाई दी। उनका अंतिम संस्कार गंगाघाट पर हुआ। ख्यात संत एवं तपस्वी मौनी बाबा ने महाराष्ट्र के पुणे में अंतिम सांस ली। उनका शव उज्जैन के मंगलनाथ स्थित मौनतीर्थ आश्रम पर लाया गया, जिसके बाद 4 मार्च की सुबह आश्रम पर उनका पार्थिव शरीर अंतिम दर्शन के लिए रखा गया। दर्शन के बाद शिप्रा तट स्थित गंगाघाट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया। देश-विदेश से बड़ी संख्या में मौनी बाबा के अनुयायी ने नम आंखों से उन्हें बिदाई दी।
75 सालों से मौन रहकर साधना कर रहे 108 साल के मौनी बाबा के निधन की खबर जैसे ही आई देश-विदेश में फैले उनके अनुयायियों में शौक की लहर दौड़ गई। सुबह मौनतीर्थ आश्रम पर देश और विदेश से उनके भक्त और अनुयायी पार्थिव शरीर के अंतिम दर्शन करने के लिए पहुंचे। अनुयायी उनके दर्शन कर विलाप करने लगे। जिसके बाद आश्रम के नजदीक शिप्रा नदी के समीप स्थित गंगाघाट पर विधि-विधान से मौनी बाबा का अंतिम संस्कार किया गया। मौनी बाबा के मानस पुत्र एवं शिष्य सुमनभाई मानस भूषण ने उन्हें मुखाग्नि दी। जिसके बाद सभी भक्तों, अनुयायियों, गणमान्य नागरिकों ने मौनी बाबा को नम आंखों से बिदा करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की।

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मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने भी ट्वीट कर प्रकांड विद्वान और लोकहित में संपूर्ण जीवन समर्पित करने वाले मौनी बाबा को सादर श्रद्धांजलि दी। तपस्वी और कठोर साधक मौनी बाबा के जीवन भर चर्चाओं में बने रहे। तंत्र-मंत्र की सिद्धियों, कठोर तप और एकांतवास के लिए मौनी बाबा विख्यात रहे है। इसके अलावा कई नामी राजनेता, देश के उद्योगपति-व्यवसायी और प्रतिष्ठित हस्तियां मौनी बाबा के शिष्य है।

साल में 2 बार ही देते थे दर्शन

वे साल में दो बार ही भक्तों को दर्शन देते थे। एक गुरु पुर्णिमा के दिन और दूसरा 14 दिसम्बर को खूद के जन्मदिवस पर। बाकि समय वे एकांतावास में ही रहते थे। 75 वर्षो से मौन रहते हुए मौनी बाबा स्लेट पर लिखकर अपनी बात कहते थे। मौनी बाबा मोक्षदायिनी शिप्रा नदी को गंगा नदी के तुल्य मानते थे। तभी उन्होंने मौनी आश्रम के पास बने घाट को गंगाघाट नाम दिया। खास बात यह है कि इस घाट पर प्रतिदिन हरिद्वार में हर की पेड़ी की तरह शिप्रा गंगा आरती भी होती है।


कई राजनेता थे भक्त

मौनी बाबा के कई राजनेता भक्त थे। मौनी बाबा ने मौन साधना से कई चमत्कार किए थे। उनके भक्त पुर्व मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह तो अपने विरोधियों को पराजित करने के लिए यज्ञ हवन और तंत्र विद्या का सहारा लेने आते थे। अजीत जोगी सहित कई नेता मौनी बाबा के बड़े मुरीद थे। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने भी ट्वीट कर प्रकांड विद्वान और लोकहित में संपूर्ण जीवन समर्पित करने वाले मौनी बाबा को सादर श्रद्धांजलि दी।

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