चमत्कारिक है श्री अमरवास बालाजी मंदिर, दूर-दूर से आते हैं भक्त!

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(Amazing Story of Shree Amarwas Balaji Temple At Garoth Mandsaur In Hindi)
गरोठ. संकट मोचन हनुमानजी के मंदसौर के गरोठ स्थित चमत्कारिक मंदिर में दूर-दूर से आस्था और विश्वास के साथ आते हैं। यहां श्री अमरवास बालाजी मंदिर एक प्रार्थना मात्र से सारे संकट दूर कर देते हैं। मध्यप्रदेश के मंदसौर जिले के गरोठ से करीब डेढ़ किमी दूर गांव बरखेड़ा के पास हैं।
यहां हर मंगलवार और शनिवार को बालाजी की विशेष आराधना की जाती हैं। पुजारी कुलदीप (विक्की भैया) जोशी बताते हैं कि बालाजी के चोले के लिए श्रद्धालुओं की लम्बी कतार रहती हैं। वे बताते हैं कि यहां खुदाई के दौरान पुराने जमाने के बर्तन तेल के घणी निकलते हैं। कई श्रद्धालु यहां संतान प्राप्ति के लिए लोग बालाजी से मन्नत मांगते हैं और सच्ची आस्था से मांगी गई मन्नत जरुर पूरी होती हैं।



श्री अमरवास बालाजी मंदिर के चमत्कार की गाथाएं आज की नहीं बल्कि सदियों पहले की बताई जाती हैं। पाटन के श्रद्धालु कमल गुप्ता बताते हैं कि मंदिर में सच्चे मन से मांगी मनोकामना जरुर पूरी होती हैं। यहां से कोई भक्त खाली हाथ नहीं लौटता है।

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बालाजी पहले खड़े थे अब बैठ गए (balaji mandir ki kahani)

श्री अमरवास बालाजी, मंदिर में करीब 400 सालों से खड़े थे, लेकिन करीब 15 साल पहले से बैठे हुए दर्शन दे रहे हैं। मंदिर में बालाजी ने अपना चोला छोड़ा उसके बाद वे बैठी अवस्था में दर्शन दे रहे हैं। मंदिर में भगवान बालाजी की सफेद रंग की मूर्ति हैं। मंदिर परिसर सफेद रंग के 7 नाग देवता निवास करते हैं। श्री अमरवास बालाजी मंदिर परिसर भगवान शिव के भी दर्शन किए जा सकते हैं। यहां पूजन के लिए आंवला और पीपल का पेड़ भी हैं।

जब साक्षात बालाजी आए और…(hanuman mandir in hindi)

श्री अमरवास बालाजी मंदिर के बारे में कहा जाता हैं कि बालाजी के चमत्कार से आसपास के गांवों के लोगों में एकदम से मरने की अनोखी बीमारी हो गई थी, जिससे बालाजी ने उन्हें बचाया था। आसपास के गांवों के लोगों में हर पांच मिनट में मरने की बीमारी हो गई थी।



यह घटना करीब 400 साल पुरानी बताई जाती हैं। मृतकों को जलाकर आते और फिर कुछ लोगों की मौत हो जाती थी। फिर गांव के लोगों ने बालाजी मंदिर में आकर प्रार्थना की, इसके बाद यह बीमारी क्षेत्र से खत्म हुई।

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मंदिर में श्रद्धालुओं को मार्गदर्शन देने वाले गुरुजी श्यामलाल फड़किया बताते हैं कि बालाजी के इस चमत्कार के बाद से ही मंदिर का नाम श्री अमरवास बालाजी मंदिर हुआ।

वे बताते हैं कि 40 साल पहले मुझे ट्रेन में एक संत मिले, हमने साथ में भोजन किया, जिसके बाद उन्होंने मंदिर के बारे में मुझे बताया। उन्होंने यह आर्शीवाद भी दिया कि आप किसी बीमार-परेशान के सिर पर हाथ रखेंगे, तो वह व्यक्ति ठीक हो जाएगा।

 

Amazing Story of Shree Amarwas Balaji Temple At Garoth Mandsaur In Hindi
(गुरुजी श्यामलाल फड़किया)

मैंने उज्जैन ट्रेन से उतरकर एक बीमार पर हाथ रखा तो वह ठीक हो गया। इसके बाद से ऐसेे कई बीमार-परेशान लोगों को बालाजी के आर्शीवाद से राहत मिली है। वे इसे बालाजी का चमत्कार बताते हैं। उनका कहना हैं कि भगवान श्री अमरवास बालाजी संत के रुप में मुझसे मिले थे।

 

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