3000 फीट की ऊंचाई पर विराजे थे दुर्लभ काले गणेश, 6 माह पहले हुए है अंतरध्यान, जानिए रहस्य की कहानी

Story of 13000 years old ganesh statue in dholkal dantewada

(Story of 13000 years old ganesh statue in dholkal dantewada)

दंतेवाड़ा. छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में 3000 फीट की ऊंचाई पर दुर्लभ काले भगवान गणेश विराजमान थे। छिंदक नागवंशी राजाओं ने ढोलकल की पहाड़ी पर 10 वीं व 11 वीं शताब्दी से पहले के दुर्लभ गणेशजी की प्रतिमा की स्थापना करवाई थी। यहां से वे रहस्यमयी तरीके से करीब 6 माह पहले यानी 26 जनवरी 2017 को अंतरध्यान हो गए। हालांकि अभी तक तथ्यात्मक तौर पर पता नहीं लगाया जा सका हैं कि भगवान गणेश की प्रतिमा कहां चली गई।




वहीं प्रशासन की जांच में अजीब-अजीब तर्क सामने आए हैं। आईए गणेश चतुर्थी के मौके पर दुर्लभ गणेश जी के बारे में जानते हैं।

प्रचलित भगवान के युद्ध की पौराणिक कथा
भगवान गणेश और भगवान परशुराम के युद्ध की पौराणिक कथा आज भी प्रचलित हैं। कहा जाता हैं कि ढोल कल की पहाडिय़ों में युद्ध के दौरान भगवान गणेश का एक दंत टूट गया था। भगवान परशुराम के फरसे से गणेश जी का दंत टूटा था।

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आज भी आदिवासी भगवान गणेश को अपना रक्षक मानकर पूजते हैं।
ब्रहवैवर्त पुराण में भी इसी तरह की कथा मिलती हैं। इसमें कहा गया हैं कि कैलाश पर्वत स्थित भगवान शंकर के अंत: पुर में प्रवेश करते समय भगवान गणेश ने परशुरामजी को रोका फिर भी वे जाने लगे। गुस्से में भगवान गणेश ने परशुरामजी को अपनी सूंड में लपेटकर समस्त लोकों में घुमा दिया था। इसी लड़ाई में गणेश जी का एक दांत टूटा था।

रहस्यमी तरीके से गायब हुई है भगवान की प्रतिमा
भगवान गणेश की प्रतिमा अपने स्थान से रहस्यमयी तरीके से गायब हो गई। यहां पर्यटक घुमने आए तो प्रतिमा गायब थी। अगले दिन प्रशासन ने जांच की तो अजीब-अजीब तर्क सामने आ रहे हैं।

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वहीं भक्तों का कहना हैं कि भगवान गणेश का चमत्कार हैं। प्रशासनिक टीम का कहना हैं कि यहां जंगल क्षेत्र होने के कारण नक्सलियों के एकांत में भगवान गणेश की प्रतिमा बाधा बन रही थी। इसलिए नक्सलियों ने गणेशजी की प्रतिमा को पहाड़ी से नीचे फैंक दिया।

यहां देखें वीडियो-

भगवान गणेश के पेट पर था नाग
दंतेवाड़ा शहर से ढोलकल पहाड़ी करीब 22 किमी के फासले पर हैं। इस पहाड़ी पर चढऩा बेहद मुश्किल हैं। एक दंत गजानन की 6 फीट ऊंची और 21/2 फीट चौड़ी ग्रेनाइट पत्थर से निर्मित प्रतिमा को वास्तुकला के लिहाज से अत्यंत कलात्मक तरीके से बनवाया गया था।

Story of 13000 years old ganesh statue in dholkal dantewada
(दंतेवाड़ा, ढोल कल प्रतिमा)

नागवंशी राजाओं ने भगवान की मूर्ति का निर्माण करवाते वक्त अपने राजवंश का एक चिन्ह अंकित कर दिया था। गणेशजी के पेट पर नाग देवता का चिन्ह स्पष्ट देखता था। भक्त भगवान गणेश की प्रतिमा में नाग देवता के भी दर्शन करते थे।

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फिर से स्थापित की गई प्रतिमा
कुछ समय बाद पहाड़ी के आसपास प्रतिमा की छानबीन की गई। तो प्रतिमा के कुछ हिस्से पहाड़ी के नीचे अलग-अलग क्षेत्रों में गिरे मिले। ग्रामीणों और प्रशासन का दावा हैं कि प्रतिमा को नक्सलियों ने गिरा दिया था। वापस लाकर फिर से गणेश जी की प्रतिमा स्थापित की गई।

 

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