वे सत्ता के नशे में डूबे हैं, हम ‘श्री’ के मद्य में ललायित

shrimad bhagwat katha in ramgarh

shrimad bhagwat katha by pandit sanjay krashn trivedi in ramgarh

रामगढ़. रामगढ़ में श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का भव्य शुभारंभ शोभा यात्रा के साथ 18 जनवरी 2018 गुरुवार को हुआ। पंडित संजय कृष्ण त्रिवेदी के मुखारबिंद से कथा वाचन हुआ। समारोह की शुरुआत कथा स्थल से भव्य शोभायात्रा आयोजित की, जो भगवान श्रीगणेश मंदिर में कलश यात्रा के रुप में पूरे गांव में निकलते हुए फिर कथा स्थल पहुंचे। यहां संगतीमयी कथा में गोकर्ण उपाख्यान हुआ। यह कार्यक्रम दोपहर 12 से 3 बजे तक सात दिन तक सभी के लिए खुला है।

किसी न किसी नशे में डूबे हैं सब katha in hindi

कथा की शुरुआत में पंडित त्रिवेदी जी ने एक किस्सा सुनाते हुए कहा कि आज के दौर में सभी किसी न किस मद्य यानी नशे में डूबे हुए हैं, किसी को सत्ता का मद्य है, तो किसी को विधायक तक पहुंच होने का मद्य है। लेकिन यहां आए लोगों को श्री का मद्य है, इसलिए श्री मद्भागवत कथा में श्री के मद्य का आनंद ले रहे हैं। आज पूर्ण रूप से श्री के मद्य को पान करने के लिए हम ललायित है।


पापा का नाम बताने लायक नहीं shrimad bhagwat katha

कथा में एक किस्सा सुनाते हुए पंडित त्रिवेदी जी ने कहा, कि एक बार किसी जगह पर एक महिला से उसका परिचय पूछा तो उसने अपने गांव का नाम ले लिया। पूछने वाले समझे नहीं, तो पति का नाम पूछा, महिला ने बच्चों को नाम बताने के लिए कहा, तो एक बेटे ने तपाक से कहा, भय्या मत बताना, पापा का नाम बताने लायक नहीं हैं, होता तो मम्मी नहीं बता देती। पंडित त्रिवेदी जी ने कारण बताते हुए कहा कि 5 लोगों का नाम नहीं लिया जाता है।

कब-कब न लेवें नाम taking husband’s last name 

-स्वयं का नाम कोई अच्छा काम कर दो तब मत बताओ, कर्म छिपता नही दिखता ही है।



-मतंग मुनि का मार्ग साफ कोई कर जाता था, उन्होंने पता किया तो पता नहीं चला। वे सुबह 5 बजे उठते थे तो पोने 5 बजे उठने लगे। सुबह 4 बजे उठने लगे। फिर 3 बजे उठने लगे लेकिन पता नहीं लगा। फिर उन्होंने शिष्यों को इस कार्य मे लगाया। तो 5 साल बाद चला कि एक भील की लडक़ी यह मार्ग साफ कर रही है। उसको बुलाया तो वह काफी डरी हुई थी, उसने माफी मांगी की आगे से नही करूंगी। तो मतंग मुनि ने कहा ये काम करो आगे चलकर तेरे यहाँ भगवान आएंगे। यह लडक़ी भी बगैर अपना नाम बताए अच्छा काम कर रही थी।

वीडियो में लाइव कथा

-अत्यधिक कंजूस का भी नाम नहीं लेना चाहिए।
-गुरु का नाम नही लेना चाहिए। जब भी किसी से गुरु का नाम पूछा जाता हैं, तो वे अपने गुरु का नाम कान पकडक़र बताते हैं।
-पंडित त्रिवेदी जी ने कहा कि, एक बार एक कंजूस ने देखा की एक व्यक्ति दान कर रहा है। दूसरा व्यक्ति कथा करवा रहा है, लेकिन फिर भी कोई कमी नहीं हो रही हैं, यह देखकर कंजूस उदास हो गया।

कंजूस इंद्र की गोद में था indra dev maharaj ki bhagwat katha

कथा के दौरान पंडित त्रिवेदी ने एक कंजूस का किस्सा सुनाते हुए कहा कि एक कंजूस का एक दिन मन बदल गया, उसने अपने मुनिम के लिए खीर बनवाई। मुनिम भी हैरान था, कि आज यह क्या हो गया है सेठ को। लेकिन कुछ ही देर बाद सेठ वापस पुरानी मुद्रा में आया और उसने सोचा मैं यह क्या कर रहा हूं, फिर अक्ल भिड़ाई और मुनिम से कहा, कि हम एक प्रतियोगिता करते हैं, कि यह खीर सुबह खाते है और आज रात जिसे सबसे अच्छा स्वप्न आएगा वह यह खीर खाएगा। मुनिम सेठ की चालाकी समझ गया, सेठ भी सोच रहा था, कि सुबह में पहले मुनिम का स्वप्र पूछूंगा फिर अपना सबसे अच्छा बताउंगा। रात को दोनों सो गए।



सुबह उठे तो सेठ ने कि मुझे स्वप्न में चार अफ्सराएं लेने आई और कहा कि इंद्र थक गए हैं, मुझे स्वर्ग की गद्दी संभालनी हैं, इंद्र ने गोद में लेकर बेहद सम्मान से मुझे काम संभलाया। इसके बाद मुनिम से पूछा कि तुम्हे क्या स्वप्न आया। मुनिम ने कहा मेरा क्या, सेठ जी मैं तो नौकर हूं, मुझे तो स्वप्न भी वैसे ही आते हैं। मुनिम से सेठ जी ने कहा बताओ तो, फिर मुनिम ने कहा, रात को दो भीमकाय लठेत आए और मुझे उठाकर अंदर कमरे में ले गए कहा, खीर निकालो नहीं तो तुम्हें मार देंगे। फिर कटोरा निकालो और खीर डालकर खाओ। सेठजी मैंने आपके बगैर किस मुश्किल से खीर खाई मैं ही जानता हूं। लेकिन आपने बिलकुल सही कहा था, ठंडी खीर बेहद अच्छी लगती हैं। उन लठेतों ने सारी खीर खिला दी। सेठ धीरे-धीरे समझ रहा था, कि सारा काम बिगड़ तो नहीं गया। सेठ ने कहा, तुमने मुझे जगा नहीं सकता था, मुनिम बोले आप इंद्र की गोद में थे, तो कैसे बुलाता।

 

ये होंगे विशेष आयोजन shrimad bhagwat katha in hindi

दिनांक 19 जनवरी शुक्रवार को परिक्षित जन्म
दिनांक 20 जनवरी शनिवार को शिव विवाह
दिनांक 21 जनवरी रविवार को श्रीकृष्ण जन्म
दिनांक 22 जनवरी सोमवार को छप्पन भोग
दिनांक 23 जनवरी मंगलवार को श्रीकृष्ण रुक्मणी विवाह
दिनांक 24 जनवरी बुधवार को सुदाम चरित्र, पूर्णाहुती
दिनांक 24 जनवरी बुधवार को ही महाप्रसादी (दो. 4 बजे)


यह हैं आयोजक bhagwat katha news in hindi 

सर्वश्री नंदकिशोर, ग्यारसीराम, कैलाशचंद्र, जगदीश प्रसाद, श्रीनाथ, बृजमोहन, केदारनाथ, शिवप्रसाद, सुरेश चंद्र, पुरुषोत्तम (ब्यावरा), रामेश्वर प्रसाद (भालता), दिनेश कुमार, घनश्याम स्वरुप, राममूर्ति, कृष्णकांत, रमाकांत (इंदौर), चि. रामबाबू, श्यामबाबू, मोहनलाल (खिलचीपुर) एवं समस्त सिंघी परिवार (जुलानिया), रामगढ़, तह. जीरापुर, जिला राजगढ़, (ब्यावरा), मप्र.।

 

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