25 साल पहले टीवी पर सिर्फ रामायण देखते थे, आज हर जेब में है बिगडऩे की सविधा, तय करें क्या देखें, क्या सुनें

shrimad bhagwat katha in ramgarh

shrimad bhagwat katha by pandit sanjay krashn trivedi in ramgarh

रामगढ़. रामगढ़ में श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के तीसरे दिन भारी भीड़ कथा सुनने पहुंची। पंडित संजय कृष्ण त्रिवेदी के मुखारबिंद से कथा वाचन हुआ। कथा के तीसरे दिन शनिवार को भगवान कण-कण में बसे हुए हैं, किंतु इस कलयुग में परखने के लिए निगाहों की आवश्यक्ता है। द्वापर युग की बात करते हुए मीरा और शबरी, ध्रव-प्रहलाद आदि का उदाहरण दिया। कथा में पंडित त्रिवेदी ने जीवन की सच्चाई से रुबरु करवाया।

सत्यनारायण है सच-सच्चाई
सच-सच्चाई की तुलना भगवान सत्यनारायण से करते हुए राजा हरिश्चंद्र का उदाहरण देकर समझाया। एक सत्य के कारण राजा हरिश्चंद्र अपने पुत्र-पत्नी सहित काशी में बिके और राजा हरिश्चंद्र ने सच्च का परिचय देते हुए अपने पुत्र को भी बगैर कर लिए शमशान में नहीं जलाने दिया।



भारतीय नारी की लाज का जिक्र करते हुए कहा कि जिसने भी नारी की लाज पर हाथ डाला है, उसे भगवान ने भी नहीं बख्शा है। इतिहास उठाकर देखें तो द्रोपती पर बुरी  नजर रखने वाले और सीता हरण करने वाले रावण को भी नहीं बख्शा गया। कलयुग में बुरी निगाह से देखने वालों एवं नाबालिकों के साथ कुकर्म करने वालों को राक्षस गिद्ध पक्षी से भी नीचा बताया है।

वीडियो में लाइव कथा

हमें मन को काबू में पाना होगा, पाप मन को बिगाड़ता है। मन तो अपने अंदर है, मन में कान और आंख दो जगह हैं, जहां से पाप जाता है। हम तय करें कि क्या देखें और क्या सुनें। 50 साल पहले लोग फिल्म देखना पसंद नहीं करते थे। 25 साल पहले टीवी पर सिर्फ रामायण देखते थे, लेकिन आज तो बिगडऩे की सुविधा हर किसी के जेब में आ गई हैं और इस सुविधा से क्या-क्या देख लेते हैं, सबको पता है। एक बार गंदें चित्र देख लें, तो सारे पुण्य नष्ट हो जाते हैं।



मां की ज्यादा है जिम्मेदारी
आज जो महिलाओं का सम्मान नहीं कर रहे हैं, उनके कारण समाज का पतन होता जा रहा है। महिलाओं के सम्मान की शिक्षा देने की सबसे ज्यादा जिम्मेदारी महिलाओं की होती हैं, मां बचपन से ही स्त्री का सम्मान करने की शिक्षा दे तो हर बच्चा घर के बाहर महिलाओं को आदर और सम्मान की नजर से देखेगा। सत्संग जवानी का विषय है, इसकी शिक्षा युवाओं को देनी चाहिए, तभी धर्म की रक्षा और समाज में परिवर्तन आएगा। लोग आराम करने के समय वृद्धावस्था में पहाड़ चढक़र तीर्थ यात्रा पर जाते हैं, जब उनमें ताकत ही नहीं होती हैं।

 

ये होंगे विशेष आयोजन
दिनांक 21 जनवरी रविवार को श्रीकृष्ण जन्म
दिनांक 22 जनवरी सोमवार को छप्पन भोग
दिनांक 23 जनवरी मंगलवार को श्रीकृष्ण रुक्मणी विवाह
दिनांक 24 जनवरी बुधवार को सुदाम चरित्र, पूर्णाहुती
दिनांक 24 जनवरी बुधवार को ही महाप्रसादी (दो. 4 बजे)




यह हैं आयोजक
सर्वश्री नंदकिशोर, ग्यारसीराम, कैलाशचंद्र, जगदीश प्रसाद, श्रीनाथ, बृजमोहन, केदारनाथ, शिवप्रसाद, सुरेश चंद्र, पुरुषोत्तम (ब्यावरा), रामेश्वर प्रसाद (भालता), दिनेश कुमार, घनश्याम स्वरुप, राममूर्ति, कृष्णकांत, रमाकांत (इंदौर), चि. रामबाबू, श्यामबाबू, मोहनलाल (खिलचीपुर) एवं समस्त सिंघी परिवार (जुलानिया), रामगढ़, तह. जीरापुर, जिला राजगढ़, (ब्यावरा), मप्र.।

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