रायपुर में हैं चमत्कारिक श्री शीतल नाथ जिनालय जैन मंदिर

jain temple in hindi

(Shree Sheetal Nath Jain Temple Devendra Nagar Raipur Chhattisgarh In Hindi )

रायपुर. छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में परम तारक श्री शीतल नाथ जिनालय जैन मंदिर देवेंद्र नगर में मनमोहक प्रतिमा हैं। मंदिर के पुजारी बताते हैं कि मंदिर के ठीक सामने नाग-नागिन का जोड़ा रहता हैं, उनकी विशेष कृपा भी रहती है। नाग देवता जोड़े से प्रत्यक्ष रूप से भी दर्शन देते है। यहां विराजमान भगवान श्री शीतलनाथजी जैन तीर्थंकर में दसवें नम्बर के भगवान है। इनके पिता का नाम दृढरथ, माता सुनंदा, श्रीवत्स प्रतीक है। यहां भगवान श्रीशीतल नाथ की अलौकित प्रतिमा के दर्शन करने दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचते है। मंदिर की अंजन सलाखा एवं प्राण प्रतिष्ठा 17 अप्रैल 2017 को हुई थी।


पुजारी नीरज द्विवेदी ने बताया कि इस मंदिर के निर्माण में पांच वर्ष का समय लगा। इसमें सभी पत्थर राजस्थान के मकराना से मंगवाए गए और पूरे मंदिर में लोहे का उपयोग नहीं किया गया है। इसमें मार्बल, तांबे और पीतल से बनाया गया।

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तीन अष्ठधातु की प्रतिमाएं ( jain mandir in raipur )
मंदिर में मूल नायक श्री शीतल नाथ भगवान है। मूल गंभारे में तीन अष्ठधातु की तीन प्रतिमाओं में भगवान विराजमान है। इनकी जन्मस्थली हस्थिनापुर हैं वहीं निर्माण स्थली सम्मेद शिखर हैं। वहीं जन्म ज्येष्ठ कृष्णा 14 को हुआ है। केवल ज्ञान पौष शुक्ल 10 और आयु 1 लाख वर्ष हैं। इनकी ऊंचाई 40 धनुष और वर्ण स्वर्ण एवं कंचन है।

 

यहां होती है विशेष तरह से पूजन (jain mandir puja vidhi in hindi)
इस मंदिर में पूजन के दौरान कुछ नियमों का विशेष ध्यान रखा जाता हैं। पूजन में धोती और दुपट्टा पहना जाता है। मोर पंख से भगवान के शरीर से स्पर्श किया जाता हैं। पूंजड़ी का उपयोग भी किया जाता है। इसके बाद भीगे कपड़े से केसर और चंदन को उतारा जाता है। खस कूंची के माध्यम से भी केसर उतारते है।



तीन कपड़ों से भगवान को अलूषणा की जाती है। नीचे पाट किया जाता है। यहां हर पूनम एवं अमावस्या को दादा गुरुदेव की पूजन होती हैं। प्रतिदिन प्रात: स्नात्र पूजन होती है और संध्या को आरती होती है। पूजन भगवान के नौ अंगों में की जाती हैं। भगवान के नयन सोने के लगे हुए हैं।

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यहां चांदी की गद्दी पर विराजमान है भगवान (jain mandir devendra nagar raipur in hindi)
इस मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा एवं अंजन सलाखा मणी सागरजी महाराज साहब (खतर गच्छ के अधिपत्य )ने करवाई थी।



प्रतिमा के नीचे और शिखर के ऊपर चांदी की गादी बनाई गई। इसके साथ ही भैरव सोसायटी जैन मंदिर की अंजन सलाखा हुई। इस समय 10 दिन का विशेष आयोजन किया गया था। लाखों की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित हुए थे। इसमें कई कार्यक्रम हुए।

 

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